Home Latest News & Updates नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ना जरूरी, सनातन धर्म भारतीय सभ्यता की अमूल्य धरोहर: जगद्गुरु रामभद्राचार्य

नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ना जरूरी, सनातन धर्म भारतीय सभ्यता की अमूल्य धरोहर: जगद्गुरु रामभद्राचार्य

by Dheeraj Tripathi 6 June 2026, 8:40 PM IST (Updated 6 June 2026, 8:41 PM IST)
6 June 2026, 8:40 PM IST (Updated 6 June 2026, 8:41 PM IST)
सनातन धर्म भारतीय सभ्यता की अमूल्य धरोहर,सनातन धर्म भारतीय सभ्यता की अमूल्य धरोहर: जगद्गुरु रामभद्राचार्य

Sanatan Dharma: अखिल भारतीय संस्कृत परिषद लखनऊ की तरफ से सनातन धर्म और भारतीय वैदिक संस्कृति का सामंजस्य विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान एवं जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज के अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में देश के प्रख्यात संत, शिक्षाविद, महाकवि और रामानंद संप्रदाय के जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए. पद्म विभूषण, ज्ञानपीठ सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन धर्म और भारतीय वैदिक संस्कृति भारतीय सभ्यता की अमूल्य धरोहर हैं. इनकी शिक्षाओं में मानव कल्याण, नैतिक मूल्यों, विश्वबंधुत्व और प्रकृति संरक्षण का व्यापक संदेश निहित है.

गौरवशाली परंपरा के संरक्षण पर जोर

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति के मूल सिद्धांतों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, जिससे देश की गौरवशाली परंपरा का संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित किया जा सके. उन्होंने कहा कि वेद, उपनिषद, पुराण और अन्य धर्मग्रंथ मानव जीवन को उत्कृष्ट बनाने का मार्ग दिखाते हैं. सनातन धर्म के मूल सिद्धांत सत्य, अहिंसा, करुणा, सहिष्णुता और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना को बढ़ावा देते हैं. वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और वैश्विक शांति के लिए इन आदर्शों की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है.

कार्यक्रम में जगद्गुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास ने भी अपने विचार व्यक्त किए. वहीं राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के पूर्व कुलपति प्रो. राम सेवक दुबे ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा रचित भाष्यों और ग्रंथों की विशिष्टताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला. समारोह में लखनऊ के विधायक नीरज बोरा ने विशेष रूप से भाग लिया और अखिल भारतीय संस्कृत परिषद् के पुस्तकालय एवं अन्य विकास कार्यों के लिए अपनी विधायक निधि से पांच लाख रुपये देने की घोषणा की. इसके साथ ही जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भी परिषद् के विकास हेतु एक लाख रुपये के सहयोग की घोषणा की.

ये गणमान्य रहें मौजूद

कार्यक्रम में जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पाण्डेय, परिषद के अध्यक्ष डॉ. चन्द्रभूषण त्रिपाठी, उपाध्यक्ष डॉ. रवि किशोर त्रिवेदी, कोषाध्यक्ष डॉ. युग्गीलाल दीक्षित सहित अनेक शिक्षाविदों, संस्कृत विद्वानों और गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही. अखिल भारतीय संस्कृत परिषद के मंत्री प्रो. प्रयाग नारायण मिश्र ने संस्था का परिचय प्रस्तुत किया, जबकि अध्यक्ष डॉ. चन्द्रभूषण त्रिपाठी ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य के अभिनंदन पत्र का वाचन किया.

कार्यक्रम का संचालन प्रो. अशोक कुमार शतपथी ने किया. वैदिक मंगलाचरण एवं शांति पाठ के साथ संपन्न हुए इस आयोजन में विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों, संस्कृत प्रेमियों और विद्वानों सहित सौ से अधिक लोगों ने सहभागिता की. वक्ताओं ने कहा कि भारतीय वैदिक संस्कृति और सनातन धर्म का सामंजस्य समाज में नैतिकता, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करता है तथा भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

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