Rajesh Exports: बाजार नियामक सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (REL) और इसके एमडी राजेश मेहता को लेकर कंपनी की बैलेंस शीट में 15.15 लाख करोड़ रुपये की आय की हेराफेरी का खुलासा किया है. सेबी ने बीते तीन जून को राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड को लेकर अंतरिम आदेश जारी किया. इसमें कई बड़े खुलासे और कंपनी में निवेशकों की चिंता करते हुए 109 पन्नों की रिपोर्ट जारी की गई.
बता दें कि बेंगलुरु स्थिति राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड एक लिस्टेड पब्लिक लिमिटेड कंपनी है. यह गोल्ड रिफाइनरी और गोल्ड प्रोडक्ट्स बनाने का काम करती है. कंपनी अपने प्रोडक्ट्स दुनिया भर के अलग-अलग देशों में एक्सपोर्ट करती है. राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने भारत में अपने प्रोडक्ट्स होलसेल और रिटेल में और अपने खुद के रिटेल शोरूम के जरिए ‘SHUBH ज्वैलर्स’ ब्रांड नाम से भी बेचती है.
सेबी के द्वारा कंपनी में 15.15 लाख करोड़ रुपये की हेराफेरी का मामला आने पर इसके शेयरों में मात्र दो दिनों में 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. बीते कारोबारी सत्र यानी कि शुक्रवार को इसके शेयर में लोअर सर्किट लग गया. 5 जून को कंपनी के शेयर में 4.97% की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, सेबी ने जांच पूरी होने तक Rajesh Exports Ltd के एमडी राजेश मेहता को कंपनी के शेयर्स (सिक्योरिटीज) खरीदने, बेचने और किसी भी प्रकार का लेनदेन करने पर रोक लगा दी है.
इसके साथ ही सेबी ने आगे के लिए फॉरेंसिक जांच का भी आदेश दिया है. अब आइए विस्तार से जानते हैं कि राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड और एमडी राजेश मेहता के द्वारा 15.15 लाख करोड़ रुपये की हेराफेरी का मामला क्या है, यह कैसे सेबी के पास गया और सेबी ने इसकी जांचकर अंतरिम रिपोर्ट में क्या-क्या बताया और इसके साथ ही जानेंगे कि सेबी की इस अंतरिम आदेश पर कंपनी ने क्या कहा.

REL के निवेशक ने सेबी से की शिकायत
सेबी को 11 मार्च 2024 को ईमेल के माध्यम से एक शिकायत मिली, जिसमें राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (REL) के एक शेयरधारक ने आरईएल के बही-खातों/बैलेंस शीट में दो वर्षों से अधिक समय से बकाया व्यापार प्राप्त राशि (Trade Receivables) के संबंध में संभावित वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप लगाया.
ट्रेड रिसीवेबल्स की बात करें तो यह ऐसी राशि होती है, जो किसी बिजनेस में अपने कस्टमर को उधार पर बेचे गए सामानों या दी गईं सेवाओं के बदले मिलनी बाकी होती है. और भी आसान शब्दों में कहें तो यह किसी भी कंपनी के ग्राहक की ओर से बकाया लेनदारी होती है. वैसे इसको चुकता या पेमेंट करने की समय-सीमा 30 से 90 दिनों के बीच की होती है लेकिन शिकायकर्ता के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने करीब दो साल से अभी अधिक समय में अपने ट्रेड रिसीवेबल्स को क्लियर नहीं किया. शेयरधारक को इसपर संशय हुआ और फिर उन्होंने सेबी में शिकायत कर दी.
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सेबी का इन्वेस्टिगेशन पीरियड
राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (REL) के खिलाफ शेयरधारक के द्वारा शिकायत मिलने पर बाजार नियामक सेबी ने 2024 में जांच शुरू कर दी. इस जांच के इन्वेस्टिगेशन पीरियड की बात करें तो यह 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2024 रहा. सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड को लेकर वित्त वर्ष 2020-21 से लेकर 2024-25 करीब 4 वर्षों की जांच की और दो साल की जांच करने के बाद 3 जून 2026 को 109 पन्नों का अंतरिम आदेश जारी किया.
सेबी ने मौजूद आंकड़ों में शुरुआती जांच में पाया –
- REL के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू का ज्यादातर हिस्सा (लगभग 97%-99%) विदेशी सब्सिडियरी और स्टेप-डाउन सब्सिडियरी कंपनियों से आया.
- REL बार-बार बुलाने के बावजूद ऐसे रेवेन्यू के वेरिफाई किए जा सकने वाले रिकॉर्ड नहीं दे पाई.
- REL सिंगापुर और दूसरी सब्सिडियरी कंपनियों का ऑपरेशन बहुत कम या बिल्कुल नहीं था.
- वैलकैम्बी SA, जिसे मुख्य ऑपरेटिंग एंटिटी के तौर पर दिखाया गया था, ने अपने ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट में वैल्यू एडिशन/प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर सिर्फ बहुत कम स्टैंडअलोन रेवेन्यू बताया.
- ग्लोबल गोल्ड रिफाइनरीज AG, स्विट्जरलैंड (GGR) ने कंसोलिडेटेड लेवल पर जो बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया अनऑडिटेड रेवेन्यू है, वह न तो ऑडिटेड स्टैंडअलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट से और न ही अंदरूनी ट्रांजैक्शनल रिकॉर्ड या अकाउंटिंग के कॉन्सेप्ट से सपोर्टेड है.

कंपनी फाइनेंशियल आंकड़ों को साबित करने में नाकाम- सेबी
सेबी ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में आगे कहा कि FAR (Forensic Audit Report) से पता चलता है कि REL ट्रांजैंक्शन टेस्टिंग के जरिए अपने फाइनेंशियल आंकड़ों को साबित करने में सिस्टमैटिक रूप से नाकाम रही है. 7,021.36 करोड़ रुपये के चुने हुए सैंपल में से, REL ने सैंपल वैल्यू के बहुत कम 2.03% के लिए डॉक्यूमेंट्स का पूरा सेट दिया. इसी तरह, कुल 12,217.15 करोड़ रुपये के सेल्स सैंपल्स की टेस्टिंग में, फॉरेंसिक ऑडिटर पूरे डॉक्यूमेंटेशन के साथ वैल्यू का सिर्फ 35.07% ही वेरिफाई कर सका. सेबी ने अपनी अंतरिम जांच आदेश में बताया है कि कंपनी की इस फर्जी लेन-देन में 11,487 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री और 11,488 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद शामिल थी.
15,15,385 करोड़ रुपये की गलत जानकारी- सेबी
सेबी ने अपने अंतरिम आदेश में बताया, “मैंने देखा है कि REL ने पहली नजर में लगभग 15,15,385 करोड़ रुपये की गलत जानकारी दी है, यानी FY 2020-21 से FY 2024-25 के दौरान सब्सिडियरी कंपनियों से मिले अपने रेवेन्यू का 99.80% दिखाया है. ऐसा लगता है कि इस काम ने पहली नजर में REL को इन्वेस्टर्स और सिक्योरिटीज मार्केट के सामने अपने ऑपरेशनल स्केल, कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल पोजीशन और फाइनेंशियल हेल्थ की बढ़ा-चढ़ाकर और गुमराह करने वाली तस्वीर दिखाने में मदद की है.”
सेबी ने जांच पूरी होने तक Rajesh Exports Ltd के एमडी राजेश मेहता को कंपनी के शेयर्स (सिक्योरिटीज) खरीदने, बेचने और किसी भी प्रकार का लेनदेन करने पर रोक लगा दी है. इसके साथ ही सेबी ने आगे के लिए फॉरेंसिक जांच का भी आदेश दिया है.
आरईएल ये फाइनेंशियल स्टेटमेंट देने में नाकाम रही- सेबी
- FY 2023-24 से FY 2024-25 के लिए REL सिंगापुर के स्टैंडअलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट
- FY 2020-21 से FY 2024-25 के लिए Bab AL Rayan Jewellery LLC के स्टैंडअलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट.
- कैलेंडर साल 2024 के लिए GGR के कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट
- कैलेंडर साल 2020 से 2024 के लिए GGR के स्टैंडअलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट.
- कैलेंडर साल 2020 के लिए Valcambi SA के स्टैंडअलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट.
- कैलेंडर साल 2020 से 2023 के लिए Valcambi USA Inc के स्टैंडअलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट.
- FY 2022-23 से FY 2024-25 के लिए ACC Energy के स्टैंडअलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट.
इसके अलावा, REL जांच के तहत हर साल अपनी सब्सिडियरी/स्टेप-डाउन सब्सिडियरी से जुड़ी नीचे दी गई जानकारी भी नहीं दे पाई:
- सेल्स रजिस्टर जिसमें कस्टमर के हिसाब से सेल्स की लिस्ट हो.
- परचेज रजिस्टर जिसमें वेंडर के हिसाब से परचेज की लिस्ट हो.
- कस्टमर के हिसाब से देनदारों का डिटेल्ड ब्रेकअप.
- वेंडर के हिसाब से क्रेडिटर का डिटेल्ड ब्रेकअप.
- रिलेटेड पार्टी और रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन की लिस्ट.

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राजेश मेहता के साथ सिर्फ पर्सनल हैसियत से ट्रेडिंग- Affluence के प्रमोटर
REL द्वारा FY 2021-22 से FY 2023-24 (सबमिशन I) के समय के लिए स्टैंडअलोन बेसिस पर दी गई कस्टमर-वाइज सेल्स लिस्ट और वेंडर-वाइज परचेज लिस्ट की जांच करने पर, यह देखा गया कि REL ने Affluence Shares and Stocks Private Limited नाम की एक एंटिटी के साथ कुल 11,487 करोड़ रुपये के सेल ट्रांजैक्शन और 11,488 करोड़ रुपये के परचेज ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड किए थे. ट्रांजैक्शन उस समय के दौरान REL की स्टैंडअलोन सेल्स का लगभग 66.02% और REL की स्टैंडअलोन परचेज का 67.11% थे.
Affluence की कमाई का सोर्स फाइनेंशियल एडवाइजरी, ब्रोकरेज और कंसल्टेंसी सर्विस बताया गया. Affluence ने 23 सितंबर, 2025 और 01 अक्टूबर, 2025 के ईमेल में, दूसरी बातों के साथ कहा कि:
- REL कभी भी Affluence का क्लाइंट नहीं था.
- REL के साथ कोई एग्रीमेंट या कॉन्ट्रैक्ट नहीं किया गया था.
- REL के साथ या उसकी ओर से कोई सेल या परचेज ट्रांजैक्शन नहीं किया गया था.
मैं यह भी बताना चाहता हूं कि Affluence के अधिकारियों, जिसमें Affluence के प्रमोटर धीरेन शाह भी शामिल हैं, ने 03 अक्टूबर, 2025 को SEBI के सामने दर्ज अपने बयान में कहा था कि Affluence के राजेश मेहता के साथ सिर्फ पर्सनल हैसियत से ट्रेडिंग संबंध थे और उन्होंने REL के साथ कोई लेन-देन नहीं किया था. रिकॉर्ड से पता चलता है कि राजेश मेहता ने अफ्लुएंस को कुल 7.45 करोड़ रुपये का नेट पेमेंट किया और इन ट्रांजैक्शन में उन्हें कुल 3.50 करोड़ रुपये का नेट लॉस हुआ.
ट्रांजैक्शन की असलियत पर गंभीर चिंता
यह भी देखा गया है कि REL ने राजेश मेहता को INR 7,45,00,000 ट्रांसफर किए.; राजेश मेहता ने इन फंड का इस्तेमाल अफ्लुएंस के साथ अपने पर्सनल अकाउंट से गोल्ड डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग के लिए किया.; अफ्लुएंस ने 3,50,64,490 रुपये के ट्रेडिंग लॉस का हिसाब लगाने के बाद राजेश मेहता को 3,94,35,510 रुपये का नेट बैलेंस रिफंड कर दिया और राजेश मेहता ने इसमें से 3,91,07,478 रुपये वापस REL को ट्रांसफर कर दिए.
राजेश मेहता ने सिर्फ एक माध्यम के तौर पर काम किया और ट्रांजैक्शन REL की तरफ से किए गए इसलिए REL की अकाउंट बुक्स में रिकॉर्ड किए गए थे. ये सभी मिलकर REL द्वारा Affluence के साथ रिकॉर्ड किए गए ट्रांजैक्शन की असलियत और आर्थिक सच्चाई के बारे में गंभीर चिंताएं उठाते हैं.
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22,472 से बढ़कर 2,06,942 हो गई शेयरहोल्डर्स की संख्या- सेबी
सेबी ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “मैं यह भी बताना चाहता हूं कि 31 मार्च, 2020 से 30 सितंबर, 2025 के दौरान, REL के शेयरहोल्डर्स की संख्या 22,472 से बढ़कर 2,06,942 हो गई.” रिपोर्ट में आगे कहा गया कि पहली नजर में हेरफेर किए गए फाइनेंशियल स्टेटमेंट को फैलाकर और सब्सिडियरी कंपनियों से जुड़ी जरूरी जानकारी छिपाकर, REL ने ऑपरेशनल ग्रोथ और फाइनेंशियल ताकत का भ्रम पैदा किया, जिससे मौजूदा और होने वाले इन्वेस्टर अपनी सब्सिडियरी कंपनियों के असली फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और योगदान के बारे में गुमराह हुए.
आखिरकार 02 अप्रैल, 2026 को REL का शेयर प्राइस गिरकर 80.11 रुपये हो गया, जो लगभग 2,365.33 करोड़ रुपये के मार्केट कैपिटलाइजेशन के बराबर था. REL में पब्लिक शेयरहोल्डिंग को ध्यान में रखते हुए, मार्केट कैपिटलाइजेशन में बताई गई कमी के कारण पब्लिक इन्वेस्टर की संपत्ति में काफी कमी आई, जिसका अनुमान लगभग 12,725.53 करोड़ रुपये है. सेबी ने कहा, “मुझे पहली नजर में लगता है कि REL के गुमराह करने वाले फाइनेंशियल स्टेटमेंट, जरूरी जानकारी छिपाने और गलत जानकारी देने से REL की फाइनेंशियल हेल्थ, ऑपरेशनल परफॉर्मेंस और वैल्यूएशन के बारे में गलत और गुमराह करने वाली छवि बनी और इस तरह सिक्योरिटीज मार्केट में नेचुरल प्राइस डिस्कवरी मैकेनिज्म बिगड़ गया.”

सेबी की अंतरिम रिपोर्ट पर कंपनी का बयान
सेबी की अंतरिम रिपोर्ट पर Rajesh Exports Ltd ने कहा- भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने हमारी कंपनी के संबंध में दिनांक 03.06.2026 को एक अंतरिम आदेश पारित किया है. इस आदेश को लेकर कंपनी निम्नलिखित स्पष्टीकरण देती है:
1) यह ऑर्डर अंतरिम है और SEBI किसी भी पहलू पर कोई गलत नतीजा नहीं निकाला है.
2) कंपनी ने जो रेवेन्यू बताया है, वह सही है और रेवेन्यू के बारे में कुछ भी बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बताया गया है.
3) ऐसा लगता है कि SEBI और कंपनी के बीच किसी तरह का कम्युनिकेशन गैप और कन्फ्यूजन है.
4) कंपनी सभी जरूरी और जरूरी डॉक्यूमेंट्स जमा करके SEBI को सभी पहलुओं को साफ करने की प्रोसेस में है.
5) कंपनी को भरोसा है कि SEBI अपनी समझदारी से स्थिति को साफ करेगी और कंपनी द्वारा जमा किए जा रहे ऑथेंटिकेटेड डॉक्यूमेंट्स के आधार पर सही नतीजे पर पहुंचेगी.
कंपनी के शेयर के बारे में कुछ खास जानकारी
- कंपनी: पब्लिक लिमिटेड कंपनी
- रजिस्टर्ड ऑफिस:#4, बटाविया चैंबर्स, कुमारा कृपा रोड, कुमारा पार्क ईस्ट, बैंगलोर -560001
- स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग: 1995
- आईपीओ इश्यू साइज: 100 करोड़ रुपये
- कंपनी का मार्केट कैप: 2936.36 करोड़ रुपये (5 जून 2026)
- शेयर प्राइज: 99.45 रुपये
- 3 जून को सेबी की अंतरिम रिपोर्ट आने के बाद कंपनी के शेयरों में 10 फीसदी तक की गिरावट
- गुरुवार (4 जून 2026): 4.99% की गिरावट
- शुक्रवार (5. जून 2026): 4.97% की गिरावट
- शुक्रवार को Rajesh Exports Ltd की बड़ी गिरावट के बाद लोअर सर्किट लग गया.
राजेश एक्सपोर्ट्स में किसकी-किसकी हिस्सेदारी?
- कंपनी के प्रमोटर: करीब 54.55 फीसदी की हिस्सेदारी (एमडी .राजेश मेहता की 41 फीसदी की हिस्सेदारी और अन्य)
- एलआईसी (DIIs मतलब कि संस्थागत निवेश): 10.80 फीसदी की हिस्सेदारी
- विदेशी निवेशक (FIIs): करीब 14 फीसदी की हिस्सेदारी
- अन्य निवेशक: 21 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी
