Art of Living: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि भारत की आध्यात्मिक विरासत और सभ्यतागत ज्ञान एक अधिक दयालु और जागरूक दुनिया को प्रेरित कर रहा है. उन्होंने दुनिया भर में शांति, सद्भाव और मानवीय मूल्यों का संदेश फैलाने के लिए श्री श्री रविशंकर के प्रयासों की सराहना की. कहा कि श्री श्री रविशंकर ने आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में युवा विकास, उद्यमिता, स्थिरता और शिक्षा पर पांच पहल शुरू कीं, क्योंकि संगठन ने 45 साल की सेवा पूरी की. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग आंदोलन करुणा, लचीलापन, स्पष्टता और खुशी को बढ़ावा देने वाली एक वैश्विक मानवतावादी और आध्यात्मिक शक्ति के रूप में उभरा है.
स्मारक डाक टिकट का भी अनावरण
उन्होंने कहा कि जीना एक कला बनना चाहिए. संघर्ष और अनिश्चितता से भरी दुनिया में आपको हर दिन अपने जीवन का आनंद लेना चाहिए. उपराष्ट्रपति ने व्यक्तिगत कल्याण, सामाजिक परिवर्तन और वैश्विक शांति में आर्ट ऑफ लिविंग के योगदान के 45 वर्ष पूरे होने पर एक स्मारक डाक टिकट का भी अनावरण किया. उन्होंने कहा कि भक्ति केवल ईश्वर की आराधना नहीं है, यह वह मार्ग है जहां आत्म साक्षात्कार प्राप्त किया जा सकता है. राधाकृष्णन ने कहा कि भक्ति एक भक्ति है. भक्ति एक समर्पण है. हमें अपने प्रति समर्पित होना है, हमें अपने परिवार के प्रति समर्पित होना है, हमें अपने समाज, राष्ट्र और मानव जाति के प्रति समर्पित होना है.
उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि आर्ट ऑफ लिविंग के केंद्र 181 देशों में कार्यरत हैं. उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने महाद्वीपों, संस्कृतियों, भाषाओं और पीढ़ियों में लाखों लोगों के जीवन को प्रेरित किया है. उन्होंने कहा कि 45 साल पहले एक आंदोलन इस सरल लेकिन गहन विचार के साथ शुरू हुआ था कि आंतरिक शांति बाहरी सद्भाव की नींव है. संगठन के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने ध्यान, सेवा, शिक्षा, ग्रामीण विकास, पर्यावरण पहल और अंतरधार्मिक संवाद के माध्यम से योगदान दिया है.
समाज के उत्थान में आध्यात्म का बड़ा योगदान
उन्होंने कहा कि जीवन जीने की कला ने दिखाया है कि समाज के उत्थान में आध्यात्मिकता की बहुत बड़ी भूमिका है. उनके अनुसार, भारत आज इतिहास में एक अद्वितीय क्षण में खड़ा है, जो आत्मविश्वासपूर्ण आकांक्षाओं और वैश्विक मंच पर बढ़ती प्रमुख भूमिका से चिह्नित है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सभ्यतागत ज्ञान, योग, कल्याण और स्थिरता पर ध्यान इस दिशा को दर्शाता है. भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का जिक्र करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि देश की आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक नेतृत्व मिलकर अधिक दयालु दुनिया को प्रेरित कर रहे हैं.
News Source: PTI
