Home Religious हर तीन साल में एक बार आती है विभुवन संकष्टी चतुर्थी, जान लें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

हर तीन साल में एक बार आती है विभुवन संकष्टी चतुर्थी, जान लें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

by Neha Singh 1 June 2026, 1:59 PM IST
1 June 2026, 1:59 PM IST
Vibhuvana Sankashti Chaturthi

Vibhuvana Sankashti Chaturthi: भगवान गणेश के भक्तों को गणेश चतुर्थी का बेसब्री से इंतजार रहता है, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि हर महीने एक संकष्टी चतुर्थी आती है, जो भगवान गणेश को समर्पित है. इसमें भी सबसे खास होती है विभुवन संकष्ठी चतुर्थी, जो हर तीन साल में एक बार आती है. यह चुतर्थी आम दिनों में नहीं, बल्कि अधिकमास में पड़ती है. इस दिन भगवान गणेश की विधि पूर्वक पूजा करने से सारे संकट दूर हो जाते हैं. यहां जानें विभुवन संकष्टी चतुर्थी कब है, इसका महत्व क्या है और हमें किस प्रकार पूजा करनी चाहिए.

कब है विभुवन संकष्टी चतुर्थी

विभुवन संकष्टी चतुर्थी अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ती है. पंचांग के अनुसार, यह तिथि 3 जून, बूधवार को है. विभुवन संकष्टी चतुर्थी 3 जून को 9 बजकर 22 मिनट पर शुरू होगी और 4 जून को रात 11 बजकर 31 मिनट पर खत्म होगी. संकष्टी चतुर्थी व्रत के दौरान रात में चांद देखना और जल चढ़ाना बहुत जरूरी है. क्योंकि चतुर्थी तिथि 3 जून की रात को होगी, इसलिए व्रत 3 जून, 2026 को रखा जाएगा. संकष्टी चतुर्थी व्रत में चांद को अर्घ्य देने का बहुत महत्व है. माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में चंद्र देव को जल और कच्चे दूध का अर्घ्य देना चाहिए. ऐसा करने से भगवान गणेश की कृपा होती है.

चंद्रोदय का समय: रात 10 बजकर 04 मिनट पर
अर्घ्य देने का शुभ समय: रात 10 बजकर 04 मिनट से 10 बजकर 43 मिनट तक

विभुवन संकष्टी चतुर्थी का महत्व

Ganesh Puja

मान्यता है कि अधिकमास में किए गए किसी भी व्रत का फल का कई गुना ज्यादा मिलता है. “विभुवन” का मतलब है वह जो तीनों लोकों में व्याप्त है और सबकी रक्षा करता है. वहीं “संकष्टी” शब्द का मतलब है “संकटों को दूर करना.” ऐसा माना जाता है कि जो कोई भी हर तीन साल में आने वाली इस चतुर्थी का व्रत पूरी श्रद्धा से करता है, उसके जीवन से सारे संकट दूर हो जाते हैं. इस दिन व्रत रखने और रात में चांद को अर्घ्य देने से कुंडली में चंद्र दोष, मानसिक तनाव और काम में आने वाली रुकावटें पूरी तरह खत्म हो जाती हैं.

पूजा विधि

विभुवन संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर गंगाजल से स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद भगवान गणेश का ध्यान करते हुए व्रत करने का संकल्प लें. इसके बाद पूजा घर को अच्छे से साफ कर लें और एक लकड़ी की चौकी लगाएं. उस पर पीला वस्त्र बिछाएं. इसके ऊपर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. प्रतिमा पर गंगाजल छिड़के. उन्हें दूर्वा अर्पित करें. इसके बाद पान, फल और फूल अर्पित करें. अब उन्हें मोदक का भोग लगाएं. दीपक जलाकर भगवान गणेश की पूजा करें. मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करें. शाम के समय दोबारा विधि-विधान से पूजा करें. चंद्रोदय के समय चंद्रमा का अर्घ्य दें.

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