Home राज्यDelhi प्रॉपर्टी के नाम पर 12 करोड़ की ठगी: दिल्ली पुलिस ने फर्जी नीलामी गिरोह के 5 सदस्यों को दबोचा

प्रॉपर्टी के नाम पर 12 करोड़ की ठगी: दिल्ली पुलिस ने फर्जी नीलामी गिरोह के 5 सदस्यों को दबोचा

by Sanjay Kumar Srivastava
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Delhi Police: दिल्ली पुलिस ने बड़े धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ कर पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरोह ने गुरुग्राम के डीएलएफ कैमेलियाज में पीड़ित को फर्जी संपत्ति बेचकर उससे 12 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की थी.

Delhi Police: दिल्ली पुलिस ने बड़े धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ कर पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरोह ने गुरुग्राम के डीएलएफ कैमेलियाज़ में पीड़ित को फर्जी संपत्ति बेचकर उससे 12 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की थी. गिरोह पीड़ितों को ठगने के लिए जाली बैंक नीलामी दस्तावेजों का इस्तेमाल करता था. पुलिस उपायुक्त (क्राइम ब्रांच) आदित्य गौतम ने कहा कि इस गिरोह पर कई राज्यों में पीड़ितों से 200 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने का संदेह है. वे जाली बिक्री प्रमाण पत्र, फर्जी नीलामी दस्तावेज और बैंकों द्वारा नीलाम की गई संपत्तियों सहित प्रीमियम संपत्तियों पर तत्काल कब्जा दिलाने के तरीके का इस्तेमाल करते थे. पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में मास्टरमाइंड मोहित गोगिया और उसके चार साथी शामिल हैं. अन्य साजिशकर्ताओं को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान जारी है, जिनमें राम सिंह उर्फ ​​’बाबाजी’ भी शामिल है. पुलिस ने यह कार्रवाई 13 जून को मिली एक शिकायत के बाद की, जिसमें एमजी लीजिंग एंड फाइनेंस के मालिक मोहित गोगिया और उसके सहयोगियों पर धोखाधड़ी और जालसाजी का आरोप लगाया गया था.

गुरुग्राम के डीएलएफ कैमेलियाज का मामला

पीड़ित ने कहा कि आरोपियों ने गुरुग्राम के डीएलएफ कैमेलियाज स्थित एक संपत्ति से संबंधित जाली दस्तावेज दिखाए और दावा किया कि उनकी फर्म ने बैंक नीलामी में संपत्ति खरीदी है और उसे उनके नाम हस्तांतरित कर सकती है. इस पर पीड़ित ने अगस्त और अक्टूबर 2024 के बीच आरटीजीएस और डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से आरोपियों को 12.04 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए. हालांकि, बैंक ने बाद में पुष्टि की कि बिक्री प्रमाण पत्र और नीलामी रसीदों सहित सभी दस्तावेज जाली थे. अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान बैंक स्टेटमेंट से पता चला कि 12.04 करोड़ रुपये की पूरी राशि आरोपी स्वामित्व वाली फर्म के नाम पर एक बैंक खाते में जमा की गई थी. विशाल मल्होत्रा, जो एक प्रॉपर्टी डीलर हैं, को बाबा जी के निर्देश पर एक निजी बैंक में चालू खाता खोलने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. उन्होंने गोगिया की फर्म से धोखाधड़ी से कमाए गए पैसे का एक हिस्सा प्राप्त किया, उसे आगे ट्रांसफर किया और बड़ी मात्रा में नकदी निकालकर बाबा जी को सौंप दी.

गिरोह में दवा वितरक भी था शामिल

एक अन्य आरोपी सचिन गुलाटी को अपने निजी बैंक खाते का उपयोग करने की अनुमति देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. धोखाधड़ी से कमाए गए धन को उसके खाते के माध्यम से ट्रांसफर किया गया था. गुलाटी ने बाबा जी के निर्देशों के अनुसार निकासी और आगे ट्रांसफर करने की बात स्वीकार की. पुलिस ने बताया कि गुलाटी के खिलाफ दिल्ली में पहले से ही एक आपराधिक मामला दर्ज है. दवा वितरक अभिनव पाठक को शिकायतकर्ता को मुख्य आरोपी से मिलवाने और धोखाधड़ी के सौदे में मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने बताया कि उसे भी धोखाधड़ी से कमाए गए धन का एक हिस्सा मिला था. पुलिस ने बताया कि दिल्ली के ईस्ट पटेल नगर निवासी मोहित गोगिया (38) ने विवादित या फर्जी संपत्तियों की पहचान करने, फर्जी मालिकाना दस्तावेज तैयार करने, पीड़ितों को समझाने और पैसे इकट्ठा करने में मुख्य भूमिका निभाई. पुलिस ने बताया कि वह मुनाफे का 40 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखता था, जबकि बाबा जी 60 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखते थे.

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