Home Top News UP मिशन 2027: अखिलेश यादव का ‘महिला कार्ड’, ‘आधी आबादी’ के भरोसे सत्ता वापसी की तैयारी

UP मिशन 2027: अखिलेश यादव का ‘महिला कार्ड’, ‘आधी आबादी’ के भरोसे सत्ता वापसी की तैयारी

by Sanjay Kumar Srivastava
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UP मिशन 2027: अखिलेश यादव का 'महिला कार्ड', 'आधी आबादी' के भरोसे सत्ता वापसी की तैयारी

Akhilesh Yadav: यूपी में मिशन 2027 के लिए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने आधी आबादी को लुभाना शुरू कर दिया है.

Akhilesh Yadav: यूपी में मिशन 2027 के लिए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने आधी आबादी को लुभाना शुरू कर दिया है. उनका मानना है कि बगैर महिलाओं के सत्ता हासिल करना मुश्किल है. अखिलेश यादव ने रविवार को कहा कि अगर उनकी पार्टी 2027 में सत्ता में आती है, तो वह बेटियों की शिक्षा, माताओं और बहनों के कल्याण के लिए और काम करेंगे. लखनऊ में समाजवादी पार्टी कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि पार्टी भविष्य में महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, सम्मान और समृद्धि से संबंधित योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करेगी. मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि ‘आधी आबादी’ यानी महिलाओं की भागीदारी के बिना वास्तविक प्रगति असंभव है. जबकि पीपुल्स डेमोक्रेटिक अलायंस (पीडीए) की ताकत पिछड़े वर्गों, दलितों, अल्पसंख्यकों और हमारे मुस्लिम भाइयों में निहित है.

महिलाओं को साधने में जुटे एसपी चीफ

कहा कि हम ‘आधी आबादी’ के समर्थन के बिना समाज और राष्ट्र को आगे नहीं बढ़ा सकते. पीडीए के माध्यम से सरकार बनाकर हम महिलाओं का सम्मान करने और उन्हें समृद्ध जीवन की ओर ले जाने के उद्देश्य से विशेष योजनाएं लागू करेंगे, जिससे उनके सशक्तिकरण और उत्थान को बढ़ावा मिलेगा. मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान स्थापित 1090 हेल्पलाइन पर उन्होंने कहा कि शुरुआत में कई लोग ‘1090’ हेल्पलाइन के बारे में संदेह कर रहे थे. हालांकि, मुझे यह जानकर खुशी हुई कि एक बार जब लड़कियों और महिलाओं की सहायता व सुरक्षा सुनिश्चित करने की यह पहल शुरू हुई तो सुप्रीम कोर्ट ने इसकी सराहना की. सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि अन्य राज्यों को इस मॉडल से सीखना चाहिए. सपा प्रमुख ने कहा कि उस समय देश में महिलाओं की शिक्षा और उन्नति की सुविधा के उद्देश्य से कोई विशेष योजना नहीं थी, नेताजी (मुलायम सिंह यादव) ने इस कार्यक्रम की शुरुआत की.

अपने कार्यकाल का किया बखान

कहा कि 2012 और 2017 में जब वह मुख्यमंत्री थे, तब महिलाओं के उत्थान के लिए कई योजनाएं शुरू की गईं. उन्होंने कहा कि उस अवधि के दौरान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) का एक समर्पित पद बनाया, जिसे एक महिला अधिकारी ने संभाला था. उनकी देखरेख में पूरा संगठनात्मक ढांचा महिलाओं के खिलाफ अपराधों की लगातार निगरानी करने के लिए जिम्मेदार था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उचित कार्रवाई की गई. कहा कि महिलाएं ईमेल के माध्यम से भी एफआईआर दर्ज करा सकती थीं. तर्क यह था कि अगर महिलाओं को व्यक्तिगत रूप से पुलिस स्टेशन जाने में कठिनाई होती थी या उन्हें डर लगता था तो वे बस अपनी शिकायतें इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज करा सकती थीं. ऐसी हर एफआईआर को बाद में ट्रैक और मॉनिटर किया जाता था. उन्होंने 26 जिलों में आशा ज्योति केंद्रों की स्थापना का भी उल्लेख किया, जो “वन-स्टॉप” के रूप में काम कर रहे थे. इन केंद्रों को समर्पित संस्थाओं के रूप में स्थापित किया गया, जो पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित हैं.

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News Source: PTI

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