Home Religious नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता से करें बच्चों के लिए प्रार्थना, जानें आरती, प्रिय भोग और मंत्र

नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता से करें बच्चों के लिए प्रार्थना, जानें आरती, प्रिय भोग और मंत्र

by Neha Singh
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Skandmata

Navratri Day 5: नवरात्रि का पांचवा दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है. मां स्कंदमाता बच्चों के जीवन से जुड़ी परेशानियां दूर करती हैं. चलिए जानते हैं मां स्कंदमाता कौन हैं, माता का मंत्र और आरती क्या है.

23 March, 2026

नवरात्रि के नौ दिनों में हर घर में माता की पूजा होती है और माहौल में एक सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है. चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि में नौ दिन मां के अलग-अलग रूपों को समर्पित हैं. हर रूप के अपने गुण हैं, जो आपको शक्ति और शांति देते हैं. पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है. तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है. चौथा दिन मां कूष्मांडा को समर्पित होता है. वहीं पांचवा दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है, जो आज यानी 23 मार्च को है. चलिए जानते हैं मां स्कंदमाता कौन हैं, माता का मंत्र और आरती क्या है .

संतान का सुख देती हैं मां

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी स्कंदमाता देवी पार्वती का एक दिव्य रूप हैं, जिन्हें मातृत्व, करुणा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस दिन देवी स्कंदमाता की पूजा सही तरीके से करने से संतान सुख, ज्ञान और बुद्धि मिलती है। इससे जीवन की रुकावटें भी दूर होती हैं, जिससे सुख और समृद्धि का रास्ता बनता है। उनकी चार भुजाएं हैं और वे शेर की सवारी करती हैं। देवताओं के सेनापति कहे जाने वाले बाल कार्तिकेय उनकी गोद में बैठते हैं। उनके एक हाथ में कमल का फूल, दूसरे में बाल स्कंद (कार्तिकेय), तीसरे में कमल और उनका चौथा हाथ वर मुद्रा में है। उनका यह रूप अपने भक्तों को स्नेह और सुरक्षा का आशीर्वाद देता है।

मां स्कंदमाता का प्रिय रंग और भोग

नवरात्रि के पांचवे दिन पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए, यह रंग मां को प्रिय है. पूजा के दौरान मां को पीले रंग का भोजन जैसे बेसन के लड्डु और केले का भोग लगाया जाता है. पूजा के दौरान मंत्रों का जाप किया जाता है. साथ ही, पूजा का समापन आरती के साथ किया जाता है, इसलिए मां की पूजा करते समय मंत्र का जाप करें और आरती पढ़ें.

स्कंदमाता की आरती

जय हो तेरी स्कंद माता। पांचवां नाम तुम्हारा आता ॥
सबके मन की जानन हारी। जग जननी सबकी महतारी ॥
तेरी जोत जलाता रहू मैं। हरदम तुझे ध्याता रहू मैं ॥
कई नामों से तुझे पुकारा। मुझे एक है तेरा सहारा ॥
कही पहाडों पर है डेरा। कई शहरों में तेरा बसेरा ॥
हर मंदिर में तेरे नजारे। गुण गाएं तेरे भक्त प्यारे ॥
भक्ति अपनी मुझे दिला दो। शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो ॥
इंद्र आदि देवता मिल सारे। करें पुकार तुम्हारे द्वारे ॥
दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए। तू ही खंडा हाथ उठाए ॥
दासों को सदा बचाने आयी। भक्त की आस भुजाने आयी ॥
जय तेरी हो स्कंद माता। पांचवां नाम तुम्हारा आता ॥
सबके मन की जानन हारी। जग जननी सबकी महतारी ॥

मां स्कंदमाता का प्रार्थना मंत्र: सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया. शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी.

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