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टेंडर नीति के खिलाफ मानवाधिकार आयोग ने मांगा स्पष्टीकरण, रेलवे बोर्ड अध्यक्ष को भेजा नोटिस

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National Human Rights Commission

National Human Rights Commission: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) की 2010 की एक विवादास्पद नीति के खिलाफ रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष को नोटिस जारी किया है.

National Human Rights Commission: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) की 2010 की एक विवादास्पद नीति के खिलाफ रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष को नोटिस जारी किया है. महाराष्ट्र के विनय जोशी द्वारा दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि खानपान और सेवा निविदाओं (Tenders) की आरक्षण श्रेणी में किए गए बदलाव संवैधानिक समानता और गैर-भेदभाव के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं. शिकायतकर्ता ने इस नीति को भेदभावपूर्ण बताते हुए इसे तत्काल समाप्त करने और आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है. आयोग ने रेलवे से इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है, क्योंकि यह मुद्दा सीधे तौर पर नागरिकों के मौलिक अधिकारों और सरकारी प्रक्रियाओं में निष्पक्षता से जुड़ा है.

मौलिक अधिकारों के हनन का आरोप

राष्ट्रीय राजस्व आयोग (NHRC) की एक पीठ, जिसके अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो हैं, ने 5 जनवरी को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करने के निर्देश जारी किए हैं. उन्होंने रेलवे अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 2010 में तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी द्वारा भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (IRCTC) में एक निविदा नीति लागू की गई थी, जिसके तहत खानपान और सेवा निविदाओं की आरक्षण संरचना में बदलाव किए गए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यक वरीयता के नाम पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित वैधानिक आरक्षण को कम कर दिया गया और मुस्लिम समुदाय को एक अलग आरक्षण लाभ दिया गया, जो भारत के संविधान में निहित नहीं है.

दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करें रिपोर्ट

शिकायतकर्ता ने आगे आरोप लगाया कि यह नीति भारत के संविधान में निहित समानता और गैर-भेदभाव के सिद्धांतों का उल्लंघन करती है और निविदा आवंटन प्रक्रिया में समान अवसर से वंचित करके अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग के दबे-कुचले नागरिकों के अधिकारों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती है. आयोग से हस्तक्षेप की मांग करते हुए जोशी ने मुस्लिम समुदाय के लिए कथित तौर पर राजनीतिक रूप से प्रेरित आरक्षण, जो संवैधानिक मानदंडों के विरुद्ध है, के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया. उन्होंने संबंधित अधिकारी के खिलाफ आवश्यक निर्देश जारी करने और ऐसी नीति को तत्काल समाप्त करने का आग्रह किया. आयोग ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया पीड़ितों के मानवाधिकारों का उल्लंघन प्रतीत होते हैं. इसका संज्ञान लेते हुए आयोग के रजिस्ट्रार ने रेलवे बोर्ड नई दिल्ली के अध्यक्ष को नोटिस जारी किया. साथ ही शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कराने और दो सप्ताह के भीतर आयोग के सामने कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया.

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