भारत में इन जगहों पर होती है रावण की पूजा
अक्टूबर 20, 2026
20 Feb 2026
'हया नहीं है ज़माने की आंख में बाक़ी...' पढ़ें अल्लामा इक़बाल लाजवाब शेर.
दहक़ाँ को मयस्सर
जिस खेत से दहक़ाँ को मयस्सर नहीं रोज़ी,
उस खेत के हर ख़ोशा-ए-गंदुम को जला दो.
शमशीरें न तदबीरें
ग़ुलामी में न काम आती हैं शमशीरें न तदबीरें,
जो हो ज़ौक़-ए-यक़ीं पैदा तो कट जाती हैं ज़ंजीरें.
मुसलमान भी एक
हरम-ए-पाक भी अल्लाह भी क़ुरआन भी एक,
कुछ बड़ी बात थी होते जो मुसलमान भी एक.
वतन की फ़िक्र
बुतों से तुझ को उमीदें ख़ुदा से नौमीदी,
मुझे बता तो सही और काफ़िरी क्या है.
तर्ज़-ए-हुकूमत
जम्हूरियत इक तर्ज़-ए-हुकूमत है कि जिस में,
बंदों को गिना करते हैं तौला नहीं करते.
बे-दाग़
हया नहीं है ज़माने की आंख में बाक़ी,
ख़ुदा करे कि जवानी तिरी रहे बे-दाग़.
गोया मुसाफ़िर
ढूंडता फिरता हूं मैं 'इक़बाल' अपने आप को,
आप ही गोया मुसाफ़िर आप ही मंज़िल हूँ मैं.
अंदाज़-ए-बयाँ
अंदाज़-ए-बयाँ गरचे बहुत शोख़ नहीं है,
शायद कि उतर जाए तिरे दिल में मिरी बात.
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