Thamma Movie Review: आयुष्मान खुराना, रश्मिका मंदाना और नवाजुद्दीन सिद्दीकी की फिल्म थाम्मा 21 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है. आप भी फिल्म देखने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो मूवी रिव्यू पढ़ लें.
17 October, 2025
Thamma Movie Review: आयुष्मान खुराना की थाम्मा (Thamma) जो 21 अक्टूबर को देश और दुनिया के सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है, वो दीवाली वाले वीक में आपका मनोरंजन करेगी. मैडॉक फ्लिम्स के हॉरर कॉमेडी यूनिवर्स में स्त्री,भेडिया और मुंज्या के बाद अब एक वेंपायर की एंट्री हो रही है. फैन्स काफी ज्यादा एक्साइटेड भी हैं और मेकर्स खूब खर्चा करके फिल्म के प्रमोशन में लगे हुए हैं. हालांकि, सवाल ये उठता है कि आखिर थाम्मा में ऐसा क्या है कि लोगों को पैसा खर्च करके ये फिल्म देखनी चाहिए. ऐसे में आज जानेंगे वो रीज़न जिनकी वजह से आपको थाम्मा देखनी चाहिए. इसके अलावा इस हॉरर कॉमेडी की क्यों ना देखें, ये भी जानिए.

हॉरर यूनिवर्स
पहला रीजन है, मैडॉक का यूनिवर्स. जैसे मार्वल्स का एवेंजर्स यूनिवर्स है, वैसे मैडॉक का हॉरर यूनिवर्स है. वो अब स्त्री, भेड़िया और मुंज्या के बाद अब थाम्मा लेकर आ रहे हैं. हर फिल्म में अलग भूत, पर एक ही मज़ा जिससे लोग डरते भी हैं और हंसते भी हैं. यानी डर और हंसी का ये कॉम्बिनेशन अब मैडॉक्स फिल्म्स का कॉपीराइट हो गया है. आदित्य सरपोतदार के डायरेक्शन में बनी ये ढाई घंटे की फिल्म मैडॉक हॉरर कॉमेडी यूनिवर्स की नई पेशकश है, जिसमें भूत-प्रेतों के साथ खूब हंसी मजाक होगा. एक वैंपायर, एक लव स्टोरी, फैमिली ड्रामा, भूतों का स्ट्रगल और सस्पेंस यहां एक साथ मिलेगा. मैडॉक की सभी फिल्मों की तरह थाम्मा भी लोगों को एंटरटेन करने के फॉर्मूले को आगे ले जाने का वादा करती है.

मजबूत स्टारकास्ट
जब आयुष्मान खुराना, राश्मिका मंडाना, नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और परेश रावल जैसे स्टार्स एक साथ हों, तो वादे बड़े होते ही हैं. हर एक में खास तरह की स्क्रिन प्रेजेंस है. हम सभी जानते हैं कि ये लोग अपने-अपने रोल में जान डाल देते हैं. रश्मिका मंदाना जहां ताड़का बनकर लोगों को एंटरटेन करेंगी, तो वहीं, आयुष्मान खुराना का वेंपायर वाला अंदाज भी फैन्स को पसंद आने वाला है. फिर नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे स्टार का होना अपने आपमें फैन्स के लिए किसी ट्रीट से कम नहीं है. इसके अलावा सबके चहेते बाबू राव उर्फ परेश रावल भी एक शक्की पापा के रोल में ऑडियन्स का मज़ा दोगुना करने के लिए काफी हैं. परेश रावल की टाइमिंग और नवाजुद्दीन का ह्यूमर कमाल करेगा. ये दोनों जब-जब स्क्रीन पर आएंगे आपकी हंसी निकलनी तय है

इंडियन टच
बेताल, वैंपायर्स, पुराने जमाने के विलेन, पीपल के पेड़ की कहानियां, ये सब इंडियन लोक कथाओं की खुशबू लाते हैं. वेस्टर्न या हॉलीवुड वाली हॉरर फिल्मों की तरह दिखने की बजाय, मैडॉक की थाम्मा अपनी मिट्टी से जुड़ी हुई कहानी है. ये सिर्फ कॉपी-पेस्ट हॉरर नहीं है बल्कि पौराणिक और लोककथाओं को हॉरर-कॉमेडी की चाशनी में डुबोया हुआ कंटेंट है. अच्छी बात ये है कि आप मैडॉक की बाकी हॉरर कॉमेडी की ही तरह थाम्मा को भी अपने पूरे परिवार के साथ देखने जा सकते हैं.

आइटम नंबर्स की भरमार
दिनेश विजान का नाम वैसे दिनेश विजन होना चाहिए, क्योंकि उन्हें पता है कि उन्हें कब तमन्ना भाटिया से आज की रात करवाना है, कब नोरा से डांस और कब मलाइका अरोड़ा को मैदान में उतारना है. थाम्मा में भी वो अपने इस विजन को पूरी तरह से फॉलो करते दिखे. एक तरफ रश्मिका मंदाना ने अपने किलर डांस मूव्स से ‘तुम मेरे ना हुए ना सही’ गाने को सिजलिंग बना दिया. उतने से मन नहीं भरा तो नोरा को बुलाकर ‘दिलबर’ करवा दिया, वैसे भी नोरा और दिलबर का पुराना नाता है. खैर, इन दोनों से भी ऊपर दिनेश विजान ने मलाइका अरोड़ा से थाम्मा में ‘पोइज़न बेबी’ पर ठुमके भी लगवा दिए. अब इतने सारे आइटम नंबर देखने के लिए आप थिएटर जाना चाहें, तो जा सकते हैं.
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फिल्म की वीकनेस
अब ये भी जान लें कि थाम्मा को क्यों ना देखें. सबसे बड़ा रीजन है कमज़ोर VFX. दरअसल, किसी भी हॉरर सीन्स में CGI या विजुअल इफेक्ट्स पर सबसे ज्यादा फोकस किया जाना चाहिए. लेकिन थाम्मा के कुछ सीन्स में VFX बड़े सस्ते वाले लगते हैं. ऐसा लगता है कि दिनेश विजान ने सारा बजट स्त्री 3 के लिए बचा लिया है. हॉरर-कॉमेडी फिल्म में हंसी तो ठीक, लेकिन डर की फीलिंग न हो, तो मजा आधा हो जाता है. फिर आती है कॉमेडी की बात, वैसे अगर कॉमेडी ज्यादा मीम्स और चुटकुलों पर बेस्ड हो, तो वो फोर्सड कॉमेडी लगती है. कॉमेडी ऐसी होनी चाहिए कि वह नेचुरल लगे, न कि उधार ली हुई लाइनें.

देखी हुई कहानी
हम कई ऑप्शनल कहानियों में वैंपायर्स, भूत-प्रेत और चुडैलों को दिखे चुके हैं. यानी थाम्मा में ऐसा कुछ नहीं है, जिसके लिए टाइम और पैसा दिया जाए. फिर एक के बाद एक इतने सारे आइटम सॉन्ग्स का होना ऐसा लग रहा है जैसे मेकर्स के पास अच्छी कहानी नहीं थी, इसलिए ऑडियन्स का ध्यान भटकाने के लिए उन्होंने रश्मिका, नोरा और मलाइका से डांस करवा लिया. सवाल ये उठता है कि क्या मैडॉक की ये फिल्म सिर्फ गानों पर निर्भर होगी, या इसके कंटेंट में दम है. हालांकि, इतना कहा जा सकता है कि लगभग 100 करोड़ रुपये के बजट में बनी थाम्मा एक दिलचस्प प्रोजेक्ट है. इसने हॉरर-कॉमेडी यूनिवर्स में नए ट्विस्ट और रोमांस को एड करने की हिम्मत दिखाई है. अगर आप हंसी, डर और थोड़ा सा थ्रिल चाहते हैं, तो इस फिल्म को 21 अक्टूबर से अपने आस-पास के थिएटर्स में जाकर देख सकते हैं. हां, आप चार-पांच मिनट के गानों और कमजोर VFX से परेशान हो जाते हैं या कहानी में बहुत ताजगी ढूंढते हैं, तो हो सकता है कि इसे देखना आपके लिए सिर दर्द बन जाए. फिर भी दीवाली वीक में फैमिली के साथ कोई फिल्म देखनी है तो थिएटर में जाकर थाम्मा देखें.
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