Ankita Bhandari Murder: अंकिता भंडारी का केस क्लोज होने के बाद एक बार फिर सुर्खियों में कैसे आया और वीआईपी का एंगल क्या है, यहां पूरे मर्डर केस की टाइमलाइन दी गई है.
11 January, 2026
Ankita Bhandari Murder: अंकिता भंडारी हत्याकांड का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है. मई, 2025 में अंकिता के हत्यारों को उम्रकैद की सजा सुना दी गई थी, जिसके बाद अंकिता के माता-पिता को लगा कि उनकी बेटी को इंसाफ मिल गया है. लेकिन एक बार फिर अंकिता के लिए इंसाफ मांगते हुए प्रदर्शन, राजनीति और जांच चल रही है. क्लोज हो चुके केस के दोबारा खुलने के पीछे कारण है एक VIP का ऑडियो कॉल. अब ये वीआईपी कौन है, ऑडियो कॉल कैसे बाहर आया है और सीबीआई तक जांच कैसे पहुंची, आज हम आपको इसकी पूरी टाइमलाइन के बारे में बताएंगे.
एक्स्ट्रा सर्विस की डिमांड और हत्या
19 साल की अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी में वनंतारा रिजॉर्ट में काम करती थी, यह रिजॉर्ट बीजेपी नेता विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य का था. जांच में सामने आया कि अंकिता से एक्स्ट्रा सर्विस देने की डिमांड की गई थी. अंकिता ने इससे मना कर दिया, जिसके बाद 18 सितंबर 2022 को पुलकित आर्य, उसके सहयोगी अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर ने चीला नहर में धक्का देकर अंकिता की हत्या कर दी. माता-पिता ने गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई. 24 सितंबर 2022 को जब उसकी लाश मिली तो उत्तराखंड में प्रदर्शन होने लगे. करीब तीन साल तक चली जांच के बाद मई, 2025 में कोर्ट ने पुलकित आर्य, उसके सहयोगी अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को उम्रकैद की सजा सुनाई.
वायरल VIP ऑडियो
दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलने के 8 महीने के बाद एक बार फिर सड़कों पर अंकिता के लिए इंसाफ की मांग होने लगी. कोर्ट के फैसले और जांच पर सवाल उठने लगे और इसका कारण था एक वीआईपी का ऑडियो. 29 दिसंबर 2025 को बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी उर्मीला सनावर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया. इस वीडियो में वो कथित तौर पर एक ‘वीआईपी’ का ऑडियो सुनाती है और आरोप लगाती हैं कि यह वहीं ‘वीआईपी’ है, जिसे एक्स्ट्रा सर्विस देने के लिए अंकिता भंडारी पर दबाव बनाया जा रहा था. उन्होंने एक नेता पर ‘वीआईपी’ होने का आरोप लगाया और उन्हें असली दोषी बताया. उस कथित ऑडियो में उर्मीला अपने पति से अंकिता केस के बारे में पूछती हैं और सुरेश राठौर उन्हें बताते हैं कि वह वीआईपी कौन है.
फिर उठी इंसाफ की मांग
उर्मीला सनावर की वीडियो और ऑडियो जब मीडिया और सोशल मीडिया पर आया तो उत्तराखंड के लोगों में आक्रोश फैल गया. उर्मीला ने जिस नेता पर वीआईपी होने का आरोप लगाया गया था, वह दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे और मानहानि की याचिका दायर की, जिसके बाद कोर्ट ने वीआईपी के तौर पर उनका नाम लेने पर रोक लगा दी. इसलिए हम उनका नाम नहीं लिख सकते. यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर #JusticeForAnkita ट्रेंड करने लगा. अंकिता के माता-पिता और उत्तराखंड के लोग उस ‘वीआईपी’ की गिरफ्तारी और सीबीआई जांच की मांग करने लगे. खुद बीजेपी के नेताओं ने सीएम पुष्कर सिंह धामी से सीबीआई जांच की मांग की. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने बीजेपी पर हमला बोला.
सीबीआई तक पहुंचा मामला
लोगों के दबाव और ट्रांसपेरेंसी की मांग की वजह से यह मामला केंद्र सरकार तक पहुंचा और आखिरकार CBI जांच की मांग जोर पकड़ने लगी। इस बीच सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जिस नेता पर वीआईपी होने का आरोप लगाया जा रहा है, वह 10 से 20 सितंबर 2022 को उत्तराखंड में था ही नहीं. बुधवार 9 जनवरी, 2025 को सीएम धामी ने लोगों को आश्वासन दिया कि इस मामले की जांच अब सीबीआई शुरू से निष्पक्ष जांच केरगी. इसी कड़ी में उत्तराखंड के लोगों द्वारा 11 जनवरी, 2025 को उत्तराखंड बंद का आह्वान किया गया है। लोगों की मांग है कि वीआईपी की कथित भूमिका की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में CBI जांच की जाए. अब देखना होगा कि सीबीआई जांच में क्या कुछ सामने आता है और यह वीआईपी की सुई किस पर आकर रुकती है.
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