Coconut Island of India: अगर आप भी घूमने-फिरने के शौकीन है तो आपको भारत के कोकोनेट आइलैंड के बारे में जरूर पता होगा. वहां कैसे जाएं और जाकर क्या करें, आज इसकी पूरी डिटेल्स लाए हैं.
14 January, 2026
Coconut Island of India: घूमने के शौकीन लोगों, क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसी जगह भी है जिसे ‘कोकोनट आइलैंड’ कहा जाता है? दरअसल, लक्षद्वीप, जो 36 द्वीपों का एक छोटा सा, खूबसूरत स्टेट है, उसे भारत का कोकोनट आइलैंड भी कहा जाता है. अगर आपको लगता है कि बीच वेकेशन के लिए सिर्फ गोवा या अंडमान ही ऑप्शन हैं, तो तैयार हो जाइए अपनी ट्रैवल लिस्ट में एक नया नाम एड करने के लिए.

क्यों हैं कोकोनट आइलैंड?
लक्षद्वीप का दूसरा नाम कोकोनट आइलैंड यूं ही नहीं पड़ा. यहां आप जिधर भी नजर दौड़ाएंगे, ऊंचे-ऊंचे नारियल के पेड़ नजर आएंगे. ये पेड़ सिर्फ खूबसूरती नहीं बढ़ाते, बल्कि यहां के लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा हैं. लक्षद्वीप के हर काम में नारियल का इस्तेमाल होता है. जैसे खाने में तेल और दूध से लेकर घर की छत बनाने तक के लिए. यहां का मौसम, मिट्टी और समंदर की हवा, सब कुछ नारियल की खेती के लिए एकदम परफेक्ट है. इसलिए, नारियल यहां की पहचान, इकोनॉमी और खूबसूरती का बेस है.

नेचर का तोहफा
लक्षद्वीप रीयल में समुद्र के अंदर मौजूद मूंगा (coral) चट्टानों से बना द्वीप हैं. ये आइलैंड काफी नीचे हैं. यहां साल भर गर्म और नम मौसम रहता है, जो नारियल के पेड़ों के लिए वरदान है. ये हरे-भरे पेड़ न सिर्फ आंखों को सुकून देते हैं, बल्कि समंदर की लहरों से आइलैंड को बचाते भी हैं. वैसे भी लक्षद्वीप में नारियल सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि एक कल्चरल सिंबल भी है. यहां की ट्रेडिशनल डिसेज़ में नारियल तेल और दूध का जमकर इस्तेमाल होता है. नारियल के पत्तों से चटाइयां और डेली यूज़ की चीजें बनाई जाती हैं. यहां तक कि नारियल के खोल से भी बर्तन और सजावटी सामान बनते हैं. तीज-त्योहारों और पार्टियों में भी नारियल से बने खाने ही खासतौर से बनाए जाते हैं.
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कब जाएं लक्षद्वीप?
लक्षद्वीप घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का टाइम सबसे अच्छा है. इस टाइम यहां का मौसम सुहाना रहता है और समंदर भी शांत रहता है. इसके अलावा अगर आपको स्नॉर्कलिंग और डाइविंग जैसे वॉटर स्पोर्ट्स पसंद हैं, तो अप्रैल से मई का टाइम भी लक्षद्वीप जाने के लिए सही है. हालांकि, बारिश की वजह से जून से सितंबर के बीच यहां लोग कम आते हैं.

कैसे पहुंचें?
लक्षद्वीप पहुंचने के दो ही रास्ते हैं और दोनों ही केरल के कोच्चि से होकर जाते हैं. अगर आप फ्लाइट से जा रहे हैं, तो कोच्चि से अगाती एयरपोर्ट के लिए फ्लाइट्स मिल जाएंगी. आप सिर्फ 2 घंटे में लक्षद्वीप पहुंच जाएंगे. दूसरा है समुद्री मार्ग, इसके लिए आप कोच्चि से लक्षद्वीप के लिए पैसेंजर शिप ले सकते हैं. इसमें 14-20 घंटे लगते हैं. हालांकि, इस सफर का भी अपना अलग ही मज़ा है.

जरूरी बात
लक्षद्वीप जाने के लिए एक स्पेशल परमिट लेना होता है, जो आमतौर पर आपकी ट्रैवल बुकिंग के साथ ही अरेंज हो जाता है. आप लक्षद्वीप जाकर वहां के लोकल फूड का मज़ा लेना ना भूलें. वहां का नारियल फ्लेवर सब पर भारी है. लक्षद्वीप आने वाले टूरिस्ट नारियल के स्वाद से भरे पकवानों का खूब मजा लेते हैं. नारियल फिश करी, नारियल चावल और नारियल के दूध से बनी मिठाइयां काफी पॉपुलर हैं. यहां के ताजे नारियल से बने खाने का स्वाद आपको असली आइलैंड लाइफ का अहसास कराएगा.

नीले पानी का नज़ारा
अगर आप शांति और सुकून की तलाश में हैं, तो लक्षद्वीप आपके लिए ही बना है. यहां के शांत बीच, नारियल के पेड़ों की छांव और साफ नीला पानी आपको अलग ही सुकून से भर देगा. अगाती, बंगाराम और कवरत्ती जैसे द्वीप टूरिस्ट्स के बीच खूब पॉपुलर हो चुके हैं. यहां के कई रिसॉर्ट्स भी नारियल के बागानों के बीच बने हैं, जहां रुककर आपको असली आइलैंड लाइफ का मजा मिलेगा.
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