Chandra Grahan Sutak Kaal: साल का पहला चंद्र ग्रहण भी होलिका दहन के दिन ही लग रहा है. यहां जानें होली के त्योहार पर चंद्र ग्रहण का कितना असर पड़ेगा.
4 February, 2026
होली का त्योहार आने में अब कुछ ही दिन बचे हैं. फाल्गुन महीने में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को होली मनाई जाती है. इस साल होली का त्योहार और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि साल का पहला चंद्र ग्रहण भी होलिका दहन के दिन ही लग रहा है. चंद्र ग्रहण के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है. इस कारण लोगों में डर है कि क्या होली के दिन पूजा-पाठ और कोई शुभ कार्य कर सकते हैं या नहीं. चलिए जानते हैं होली पर चंद्र ग्रहण का कितना असर पड़ेगा और होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या है.

चंद्र ग्रहण का कितना असर पड़ेगा
बता दें, रंगो की होली 4 मार्च को खेली जाएगी और होलिका दहन 3 मार्च को किया जाएगा. होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6:46 से 8:50 तक रहेगा. वहीं साल का पहला चंद्र ग्रहण भी 3 मार्च को होलिका दहन वाले दिन लगेगा. भारतीय समय के अनुसार, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. यानी चंद्र ग्रहण 3 घंटे 26 मिनट तक रहेगा. चंद्र ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, दान, भोजन और कोई भी शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं, लेकिन होलिका दहन शुरू होने के ठीक पहले चंद्र ग्रहण खत्म हो जाएगा, इसलिए होलिका दहन और होली पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. इसलिए आप बिना डर के होलिका दहन की पूजा कर सकते हैं और होली खेल सकते हैं.
चंद्र ग्रहण का सूतक काल
वहीं सूतक काल की बात करें तो सूतक काल चंद्र ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है. इसलिए 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक सूतक काल रहेगा. यह चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा यानी इसका सूतक काल भारत में माना जाएगा. हिंदू मान्यता में सूतक काल को अशुभ माना जाता है, इसलिए इस समय कुछ कामों को करना वर्जित है.

सूतक काल में बरते सावधानियां
- सूतक लगने के बाद खाना बनाना, भोजन करना, पूजा पाठ करना और कोई शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है.
- सूतक लगने से पहले मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं.
- सूतक के दौरान चाकू का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और यात्रा नहीं करनी चाहिए.
- इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को चांद नहीं देखना चाहिए और घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए.
- तुलसी के पौधे में दैवी लक्ष्मी का वास होता है, इसलिए इसे भी नहीं छूना चाहिए.
- इस समय मानसिक और शारीरिक शुद्धता बनाए रखने के लिए लोग मन में भगवान का नाम लेते हैं.
- हालांकि बच्चों और बुजुर्गो को सूतक नियमों में छूट दी जाती है.
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