Home Religious माघ पूर्णिमा पर देवता भी करते हैं संगम में स्नान, जान लें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

माघ पूर्णिमा पर देवता भी करते हैं संगम में स्नान, जान लें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

by Neha Singh
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Magh Purnima 2026

Magh Purnima 2026: माघ पूर्णिमा पर भगवान खुद धरती पर आकर संगम में स्नान करते हैं, इसलिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है.

26 January, 2026

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लगा माघ मेला अब समाप्त होने वाला है. माघ पूर्णिमा पर पवित्र स्नान के साथ माघ मेला खत्म हो जाता है, इसलिए माघ पूर्णिमा का बहुत महत्व है. माना जाता है कि इस दिन खुद देवता धरती पर आकर संगम में स्नान करते हैं. इस दिन सभी लोग स्नान करते हैं और दान-पुण्य करते हैं. कई लोग माघ पूर्णिमा की तारीख को लेकर भ्रम में रहते हैं. चलिए जानते हैं माघ पूर्णिमा कब है, इसका शुभ मुहूर्त कब है और पूजा विधि क्या है.

माघ पूर्णिमा का महत्व

माना जाता है कि माघ पूर्णिमा के दिन देवता मनुष्य का रूप लेकर धरती पर आते हैं और गंगा, यमुना, सरस्वती के संगम में स्नान करते हैं. इसलिए सभी भक्त भी संगम में डुबकी लगाते हैं. माघ पूर्णिमा पर किया गया स्नान, दान और पूजा से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष मिलता है. यह भी मान्यता है कि माघ मास में भगवान विष्णु सभी पवित्र नदियों में वास करते हैं, इसलिए केवल स्नान करने से ही पापों से मुक्ति मिलती है.

माघ पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त

माघ पूर्णिमा की तिथि 1 जनवरी को सुबह 5:52 बजे से लेकर 2 जनवरी को 03:38 तक रहेगी, इसलिए माघ पूर्णिमा का स्नान-दान 1 जनवरी को किया जाएगा. माघ पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय का समय 05:26 का है. वहीं ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:24 से 06:17 तक होगा और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:13 से 12:57 तक होगा.

माघ पूर्णिमा पर पूजा विधि

  • माघ पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर नदी में स्नान करें या फिर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर उससे स्नान करें. इसके बाद सूर्य को अर्घ्य दें.
  • पूजा स्थल की सफाई करने के बाद हाथ में जल लेकर भगवान विष्णु की अराधना करें और व्रत करने का संकल्प लें.
  • भगवान विष्णु को पीले फूल, फल चंदन, रोली और अक्षत अर्पित करें. इसके बाद दीया जलाएं.
  • भगवान को पीले रंग की मिठाई और तुलसी जरूर अर्पित करें.
  • इस दिन सत्यनारायण व्रत कथा, विष्णु सहस्रनाम या महालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें.
  • अंत में भगवान विष्णु की आरती करें. इसके बाद ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अनाज या पैसे दान दें.
  • शाम को चंद्रोदय के समय कच्चे दूध में जल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें. इसके बाद व्रत का पारण कर लें.

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