Rupee Vs Dollar: भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील के बाद शेयर बाज़ार में तो रौनक लौट आई, लेकिन हमारा रुपया सुस्त पड़ता नज़र आ रहा है. आप भी जानें इस गिरावट के पीछे की वजह.
10 February, 2026
आज यानी मंगलवार की सुबह-सुबह जब दुनिया अपनी चाय की चुस्कियों के साथ अखबार खंगाल रही थी, तब फॉरेन एक्सचेंज मार्केट से एक ऐसी खबर आई जिसने इन्वेस्टर्स के माथे पर थोड़ी चिंता की लकीरें खींच दीं. दरअसल, मंगलवार की शुरुआती ट्रेडिंग में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 11 पैसे कमजोर होकर 90.77 के लेवल पर पहुंच गया. अब आप सोच रहे होंगे कि सिर्फ 11 पैसे की ही तो बात है, लेकिन इकोनॉमी में ये छोटी सी हलचल भी बड़े हिंट दे जाती है.
इस चीज़ का असर
बाजार के एक्सपर्ट्स का कहना है कि रुपये में ये गिरावट भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील का नतीजा है. शुरुआत में तो लगा कि सब कुछ ठीक है, लेकिन जैसे-जैसे इस समझौते की परतों को खोला गया, एक्साइटमेंट की जगह सावधानी ने ले ली. इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 90.63 पर खुला था, लेकिन जल्द ही ये फिसलकर 90.77 पर आ गया. कल यानी सोमवार को भी इसमें उतार-चढ़ाव देखा गया था और ये 90.66 पर बंद हुआ था.
ये है असली वजह
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत-अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील पहली नजर में तो काफी अच्छी लगी क्योंकि इसने एक्सपोर्टर्स को भरोसे में ले लिया. लेकिन असली पेच वहां फंसा जहां भारत को अमेरिकी निगरानी के दायरे में रखा गया है. खासकर रूस से एनर्जी इम्पोर्ट यानी तेल का खरीदना एक ऐसा सेंसिटिव मुद्दा है, जिस पर अमेरिका कभी भी पेनल्टी लगा सकता है.
सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित पाबरी का कहना है कि ये डील भारत को एक ऐसी स्थिति में खड़ा करती है जहां अमेरिका की नजरें हम पर बनी रहेंगी. फिलहाल 90.00 से 90.20 का लेवल रुपए के लिए एक मजबूत सपोर्ट का काम कर रहा है. जब तक ये लेवल बना हुआ है, तब तक डॉलर-रुपये की जोड़ी आने वाले दिनों में 91.00 से 91.20 की तरफ बढ़ सकती है.
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फॉरेन इन्वेस्टर्स का रुख
ऐसे समय में सबकी नजरें भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई पर टिकी हैं, जहां आरबीआई एक एंकर की तरह काम कर रहा है. जब भी रुपया गिरता है, आरबीआई डॉलर की खरीदारी शुरू कर देता है ताकि रुपए में बहुत ज्यादा गिरावट न आए. अच्छी बात ये है कि फॉरेन इन्वेस्टर्स का भरोसा इंडियन शेयर मार्केट पर बढ़ा है. इस महीने अब तक लगभग 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का इन्वेस्टमेंट भारत आया है. सोमवार को भी फॉरेन इन्वेस्टर्स ने करीब 2,254.64 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. हालांकि, बाजार अभी भी इस बात को लेकर पूरी कन्फ्यूज़न में है कि ये निवेश आगे भी इसी तरह जारी रहेगा या नहीं. वैसे भी ग्लोबल लेवल पर नीतियां हर रोज बदल रही हैं, इसलिए बाजार में फिलहाल जश्न मनाने से ज्यादा सावधानी बरतने का टाइम है.
शेयर बाजार का हाल
अगर ग्लोबल मार्केट की बात करें, तो डॉलर इंडेक्स 0.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 97.79 पर कारोबार कर रहा है. वहीं, कच्चे तेल यानी ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी थोड़ी राहत मिली है, जो 0.28 प्रतिशत गिरकर 68.85 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. कच्चे तेल का सस्ता होना भारत जैसे देश के लिए अच्छी खबर है क्योंकि हम अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इम्पोर्ट करते हैं. बात करें शेयर बाजार की, तो यहां रौनक बरकरार है. आज सुबह सेंसेक्स 149 अंक चढ़कर 84,214.75 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी 44.45 अंकों की बढ़त के साथ 25,911.75 पर ट्रेड कर रहा था. यानी एक तरफ जहां रुपया डॉलर के सामने कमजोर पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ शेयर बाजार अपनी रफ्तार बनाए हुए है.
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