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चुनाव आयोग का कड़ा रुख: मतदाता सूची में गड़बड़ी पर पश्चिम बंगाल के पांच अधिकारियों पर FIR

by Sanjay Kumar Srivastava
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चुनाव आयोग का कड़ा रुख: मतदाता सूची में गड़बड़ी पर पश्चिम बंगाल के पांच अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज

Election Commission: चुनाव आयोग के अल्टीमेटम के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने मतदाता सूची संशोधन में गंभीर लापरवाही और डेटा सुरक्षा उल्लंघन के आरोप में पांच अधिकारियों पर FIR दर्ज की है.

Election Commission: चुनाव आयोग के अल्टीमेटम के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने मतदाता सूची संशोधन में गंभीर लापरवाही और डेटा सुरक्षा उल्लंघन के आरोप में पांच अधिकारियों (दो ERO और दो AERO सहित) पर FIR दर्ज की है. आरोपी कर्मियों पर दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर पुरबा विधानसभा क्षेत्र और पुरबा मेदिनीपुर के मोयना विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूचियों में सौ से अधिक फर्जी नाम जोड़ने का आरोप है. पिछले साल अगस्त में आयोग ने लापरवाही का पता चलने के बाद राज्य सरकार को पांच अधिकारियों को निलंबित करने और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था. पांच अधिकारियों बारुईपुर पुरबा के ईआरओ देबोत्तम दत्ता चौधरी और तथागत मंडल; मोयना के ईआरओ बिप्लब सरकार और सुदीप्ता दास; और आकस्मिक डेटा एंट्री ऑपरेटर सुरोजित हल्दर पर अनधिकृत व्यक्तियों के साथ लॉगिन क्रेडेंशियल साझा करने, मतदाता सूचियों में नाम दर्ज करने की अनुमति देने और अनिवार्य कर्तव्यों का पालन न करने का आरोप है.

आयोग ने बंगाल की मुख्य सचिव को किया था तलब

हालांकि राज्य सरकार ने अधिकारियों को निलंबित कर दिया, लेकिन उसने शुरू में एफआईआर दर्ज नहीं की, यह कहते हुए कि ये कार्रवाई अनजाने में हुई गलतियां थीं. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 का हवाला देते हुए चुनाव आयोग ने राज्य के रुख को खारिज कर दिया, जनवरी में अनुस्मारक जारी किए और एफआईआर दर्ज करने के लिए 17 फरवरी की समय सीमा निर्धारित की. पिछले महीने चुनाव आयोग ने राज्य की अनुशासनात्मक कार्यवाही पर सवाल उठाया था, जिसमें तीन अधिकारियों को दोषमुक्त कर दिया गया था और एक पर मामूली जुर्माना लगाया गया था. पांचवें आरोपी डेटा एंट्री ऑपरेटर को चुनाव संबंधी सभी कार्यों से हटा दिया गया था. 13 फरवरी को चुनाव आयोग ने दिल्ली के निर्वाचन सदन में बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती से मुलाकात की और एसआईआर प्रक्रिया के दौरान लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए राज्य को एक नई समय सीमा दी. राज्य के शीर्ष अधिकारी को चुनाव आयोग द्वारा यह दूसरी बार तलब किया गया था. इससे पहले पिछले साल अगस्त में राज्य सरकार द्वारा आयोग के निर्देश पर पांच अधिकारियों को निलंबित करने से इनकार करने के बाद चक्रवर्ती के पूर्ववर्ती मनोज पंत को भी चुनाव आयोग ने तलब किया था.

चार जिलों के सात AERO भी निलंबित

मंगलवार को ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को तुगलकी आयोग बताते हुए कर्तव्य में लापरवाही के आरोपी सभी अधिकारियों के साथ सरकार के खड़े रहने के रुख को दोहराया. कहा कि असम में एनआरसी प्रक्रिया का विरोध करने पर मेरे खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गईं. यह कोई बड़ी समस्या नहीं है. हम राज्य के अधिकारियों के साथ खड़े रहेंगे. उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अपना बचाव करने का मौका नहीं दिया गया. मैं ऐसे अधिकारियों को जानती हूं जिन्होंने इस प्रक्रिया के लिए दिन-रात काम किया है. वे चुनाव से संबंधित भूमिकाओं के अलावा अन्य भूमिकाओं में काम करते रहेंगे, किसी की नौकरी नहीं जाएगी. कहा कि यदि चुनाव आयोग राज्य के किसी अधिकारी का पदावनति करता है, तो मैं उन्हें पदोन्नत कर दूंगी. एक अलग घटनाक्रम में, चुनाव आयोग ने रविवार को चल रही एसआईआर प्रक्रिया के संबंध में गंभीर दुर्व्यवहार, कर्तव्य में लापरवाही और वैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग के लिए बंगाल के चार जिलों के सात एईआरओ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. चुनाव प्राधिकरण ने चक्रवर्ती को निर्देश दिया कि वे इन अधिकारियों के खिलाफ बिना किसी देरी के अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करें और इस संबंध में आयोग को सूचित करें.

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News Source: Press Trust of India (PTI)

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