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भारत ने ईरानी जहाज को शरण देकर दिया बड़ा संदेश? ‘IRIS लावन’ की एंट्री पर बोले जयशंकर

by Sachin Kumar
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Iranian Ship EAM S Jaishankar

Iranian Ship : EAM एस जयशंकर ने कहा कि मैं भी UNCLOS और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन करता हूं. उन्होंने कहा कि ईरानी साइड से मैसेज मिला कि एक शिप ‘आईरिस लावन’ बॉर्डर के पास फंस गया है.

Iranian Ship : ईरान के युद्धपोत ‘IRIS Dena’ पर हुए अमेरिकी हमले के बाद ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खातिबजादेह ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी. उन्होंने कहा कि ईरान और भारत के बीच सभ्यागत संबंध रहे हैं. हिंद महासागर में अमेरिकी हमले में तबाह हुए युद्धपोत को लेकर खातिबजादेह ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में भाग लेने के लिए गया था और उसके पास कोई हथियार भी मौजूद नहीं था. उन्होंने यह भी कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय युद्ध अपराध है. अब ईरान अपने आखिरी सैनिक तक इस लड़ाई को लड़ेगा. इसी कड़ी में भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि ईरानी जहाज ‘आईरिस लावन’ फ्लीट रिव्यू पर था लेकिन वह गलत साइड में आ गए. हमने मानवीय चिंता की वजह से ईरानी जहाज को अंदर आने दिया और हमने यह सही भी किया.

अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन किया

EAM एस जयशंकर ने कहा कि मैं भी UNCLOS और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन करता हूं. उन्होंने कहा कि ईरानी साइड से मैसेज मिला कि एक शिप ‘आईरिस लावन’ बॉर्डर के पास फंस गया है और वह हमारे पोर्ट में आना चाहता था. वे बता रहे थे कि उन्हें दिक्कत हो रही है और एक मार्च को हमने कहा कि आप आ सकते हैं और उन्हें आने में कुछ दिन लगे और फिर कोच्चि में डॉक हो गए. विदेश मंत्री ने कहा कि जब शिप निकला तो सिचुएशन बिल्कुल अलग थी. वे यहां पर फ्लीट रिव्यू के लिए आ रहे थे और फिर वे एक तरह से गलत साइड में फंस गए. श्रीलंका में भी एक शिप के साथ ऐसी ही सिचुएशन थी, उन्होंने जो फैसला लिया वह उन्होंने किया. साथ ही उनमें से एक बदकिस्मती से ऐसा नहीं कर पाया और हमने सिचुएशन को इंसानियत के नजरिए से देखा. लीगल इशू के अलावा और मुझे लगता है कि हमने सही काम किया.

विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर भी बहुत बहस चल रही है. प्लीज इंडियन ओशियन की असलियत को हमें समझना होगा. डिएगो गार्सिया इंडियन ओशियन में रहा है. बीते पांच दशकों से महासागर में जिबूती जैसे स्थानों पर विदेशी सेनाएं की मौजूदगी दशकों से है.

भारतीयों की सुरक्षा महत्वपूर्ण

जयशंकर का कहना है कि भारत बीते एक दशक से इस क्षेत्र में व्यापार, कनेक्टिविटी और समुद्री सहयोग को मजबूत करने के लिए निवेश करने का भी काम कर रहा है. विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि दुनिया भर के शिप्स पर बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं. ऐसे में जब समुद्री जहाजों पर हमले होते हैं तो यह भारतीयों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है. उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में करीब 90 लाख भारतीय रहते हैं और उनकी सुरक्षा भी भारतीय विदेश नीति का हिस्सा है.

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