Kharmas Date: खरमास में कोई भी शुभ काम करना वर्जित माना जाता है. इस दिन सूर्य की दशा बदलती है. यहां जानें खरमास कब से शुरू हो रहा है और इस दौरान क्या नहीं करना चाहिए.
10 March, 2026
सनातन धर्म में ग्रहों की शुभ कार्यों को करने के लिए समय बताया गया है. इसी प्रकार खरमास समय में कोई भी शुभ काम करना वर्जित माना जाता है. खरमास लगने के बाद सभी को इसके खत्म होने का इंतजार रहता है, ताकि वे शादी, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों को कर सकें. हर साल जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो खरमास शुरू हो जाता है और जब मेष राशि में प्रवेश करते हैं तो खरमास खत्म हो जाता है. इसके बाद लोगों को 30 दिन का लंबा इंतजार करना पड़ता है. यहां जानें इस साल खरमास कब से शुरू हो रहा है और इस दौरान क्या नहीं करना चाहिए.

कब लगेगा खरमास
खरमास में कोई भी शुभ काम करने से उसका प्रभाव उल्टा पड़ता है, इसलिए जान लें कि खरमास कब लग रहा है और इस दौरान क्या नहीं करना चाहिए. साल 2026 में खरमास 15 मार्च को शुरु होगा और 14 अप्रैल, 2026 को खरमास खत्म हो जाएगा. लेकिन अभी भी आपको शुभ काम के लिए इंतजार करना होगा. चलिए जानते हैं क्यों आपको इंतजार करना होगा. बता दें, साल में दो बार खरमास लगता है, एक बार जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं (मार्च -अप्रैल के बीच) और दूसरी बार जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं (दिसंबर-जनवरी के बीच)
खरमास में क्या न करें
माना जाता है कि खरमास के दौरान कोई भी शुभ काम करने से उसका गलत प्रभाव पड़ता है. इस दौरान कोई भी शुभ काम नहीं किया जाते, जैसे शादी, उपनयन, द्विरागमन, गृह प्रवेश. लोग इस दौरान कोई भी शुभ काम करने से बचते हैं और इन दिनों के खत्म होने का इंतजार करते हैं. इसके बाद फिर से शादी, मुंडन जैसे मांगलिक काम शुरू हो जाएंगे.

शुभ काम क्यों नहीं किए जाते?
शास्त्रों के अनुसार, खरमास के दौरान सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं. इस दौरान सूर्य की ऊर्जा और चमक कम हो जाती है, जिससे शुभ कामों का असर कम हो जाता है. इसी वजह से शास्त्रों में इस समय को अशुभ बताया गया है. खरमास के दौरान देवी-देवताओं की पूजा, जप, धार्मिक अनुष्ठान और दान-पुण्य का खास महत्व होता है, इसलिए लोगों को यह करना चाहिए, लेकिन शादी, गृहप्रवेश, व्यापार शुरू करना और गाड़ी या प्रॉपर्टी खरीदना जैसे काम वर्जित होते हैं.
यह भी पढ़ें- शीतला अष्टमी के दिन घर में नहीं जलता चूल्हा, माता को पसंद है बासी भोजन, जानें कैसे करनी है पूजा और महत्व
