Home धर्म एक ही दिन हुए थे 3 महाचमत्कार, बौद्ध धर्म के लिए बेहद खास है वैशाख पूर्णिमा, जानिए महत्व

एक ही दिन हुए थे 3 महाचमत्कार, बौद्ध धर्म के लिए बेहद खास है वैशाख पूर्णिमा, जानिए महत्व

by Neha Singh 25 April 2026, 2:09 PM IST (Updated 27 April 2026, 11:52 AM IST)
25 April 2026, 2:09 PM IST (Updated 27 April 2026, 11:52 AM IST)
Buddha Purnima Significance

Buddha Purnima Significance: वैशाख पूर्णिमा को बौद्ध धर्म में बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. यह दिन बौद्ध धर्म के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन भगवान बुद्ध के जीवन में 1 नहीं, बल्कि 3 महाचमत्कार हुए थे.

25 April, 2026

सनातन धर्म में एकादशी, अमावस्या और पूर्णिमा का बहुत महत्व है. इसी तरह बौद्ध धर्म भी सनातन धर्म से जुड़ा है. वैशाख पूर्णिमा को बौद्ध धर्म में बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है. यह दिन बौद्ध लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन एक नहीं, बल्कि तीन महाचमत्कार हुए थे. इस साल बुद्ध पूर्णिमा 1 मई को मनाई जाएगी. बौद्ध धर्म के अनुयायी इस दिन भगवान गौतम बुद्ध के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं और उनके उपदेशों को याद करते हैं. वहीं सनातन धर्म के लोग भी वैशाख पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और दान-पुण्य करते हैं. चलिए जानते हैं इस दिन कौन से महाचमत्कार हुए थे.

वैशाख पूर्णिमा का महत्व

महात्मा बुद्ध का जन्म: वैशाख पूर्णिमा के दिन भगवान गौतम बुद्ध के जीवन की तीन बड़ी घटनाएं हुई थीं. बौद्ध धर्म के अनुसार वैशाख महीने की पूर्णिमा को ही नेपाल में राजा शुद्धोधन और रानी महामाया के पुत्र के रूप में सिद्धार्थ का जन्म हुआ था. राजकुमार सिद्धार्थ आगे चलकर महात्मा बुद्ध कहलाए.

ज्ञान की प्राप्ति: वैशाख पूर्णिमा का दिन इसलिए भी खास हो जाता है, क्योंकि इस दिन महात्मा बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी. वैशाख पूर्णिमा के दिन बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे राजकुमार सिद्धार्थ को परम ज्ञान प्राप्त हुआ, जिसके बाद वे ‘महात्मा बुद्ध’ कहलाए. उस समय बुद्ध केवल 35 वर्ष के थे और उन्होंने अपनी शिक्षा से दुनिया को सही रास्ता दिखाना शुरू किया.

महापरिनिर्वाण: वैशाख पूर्णिमा के दिन ही महात्मा बुद्ध के जीवन का तीसरा महाचमत्कार महापरिनिर्वाण भी हुआ था. महापरिनिर्वाण का मतलब है “अंतिम निर्वाण”, यानी जन्म और मृत्यु के चक्र से पूरी तरह मुक्ति. वैशाख पूर्णिमा के दिन ही महात्मा बुद्ध ने दुनिया के बंधनों को त्यागा था और कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) में महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था.

बोधगया में खास पूजा

बौद्ध धर्म के अनुयायी बुद्ध पूर्णिमा के दिन “धम्मपद” और “त्रिपिटक” जैसे पवित्र ग्रंथों का पाठ करते हैं. बिहार में बोधगया जैसी जगहों पर लोग बोधि वृक्ष की पूजा करते हैं, जिसे ज्ञान और मोक्ष का प्रतीक माना जाता है. घरों और मंदिरों को दीयों और लाइटों से सजाया जाता है. लोग दीये जलाते हैं, मंत्र पढ़ते हैं और गौतम बुद्ध की शिक्षाओं को याद करते हैं. हिंदू परंपरा में, इस दिन सत्यनारायण पूजा, लक्ष्मी पूजा और चांद को जल चढ़ाने की रस्म भी निभाई जाती है.

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