Eid Seviyan History : सेवइयां और ईद का कनेक्शन हम सभी जानते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये डिश शाही दस्तरखान से आपकी थाली में कैसे आई? आज हम आपके लिए इसी की कहानी लाए हैं.
12 March, 2026
ईद का नाम आते ही जेहन में जो सबसे पहली तस्वीर उभरती है, वो है मेवों से सजी, दूध में डूबी गरमा-गरम सेवइयों की कटोरी. आज भी हमारे दिलों में बचपन की वो यादें ताजा हैं. खासतौर से जब रमजान के रोजे खत्म होने के बाद ईद की दावत का इंतजार बेसब्री से होता था. इफ्तार की मेज खजूर, ताजे फ्रूट्स और चटपटे स्नैक्स से भरी होती थी, लेकिन सबकी नजरें उस एक खास डिश पर टिकी होती थीं जिसे हम सेवइयां कहते हैं.
सेवइयां और शीर खुरमा
अक्सर लोग सेवइयां और शीर खुरमा को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन इनमें एक बारीक और शाही फर्क है. सिंपल सेवइयां दूध, चीनी और घी में बनती हैं, जबकि इसका रॉयल वर्जन ‘शीर खुरमा’ है. इसमें खोया और सूखे मेवों की भरमार होती है, जो इसे और भी गाढ़ा और शाही बना देती है. पुराने जमाने में ये डिश राजा-महाराजाओं के लिए खास तौर पर तैयार की जाती थी.

इल्लियों से सुपरस्टार का सफर
क्या आप जानते हैं कि ‘वर्मीसेली’ शब्द का लैटिन में मतलब होता है ‘नन्हीं इल्लियां’? सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन इनका इतिहास बहुत पुराना और कलरफुल है. 1660 के दशक से ही ये अलग-अलग अंदाज़ में दुनिया भर की थालियों का हिस्सा रही हैं. इटली में इसे टमाटर और लहसुन के साथ स्पैगेटी की तरह खाया जाता है. वहीं चीन में ‘किन राजवंश’ के टाइम से ही चावल और मूंग की दाल से बनी सेवइयां फेमस हैं.
मुगलों ने परोसी सेवइयां
भारत में सेवइयां की एंट्री मिडिल ईस्ट के ट्रेड रूट्स से हुई. कहा जाता है कि मुगल बादशाह हुमायूं ने फारसी ‘खुरमा’ को ‘दम की सेवइयां’ के रूप में पेश करके दरबार में सबको इसका दीवाना बना दिया था. लेकिन इसे आज वाला शाही अंदाज दिया शाहजहां ने. एक फेमस किस्सा है कि शाहजहां ने सेवइयां को सजाने के लिए खास तौर पर ‘ढलते सूरज के रंग’ वाला चांदी का वर्क मंगवाया था. आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर तो खुद अपने हाथों से सेवइयां बांटने के शौकीन थे.
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एक नया अवतार
भारत की खूबसूरती यही है कि यहां हर चीज का अपना एक लोकल टच है. संस्कृत में इसे ‘सेविका’ कहा गया, जो शायद ‘सिव’ धातु से आया है. दक्षिण भारत में इसके बिना नाश्ता अधूरा है, जहां इसे ‘सेमिया उपमा’ या ‘शाविगे’ के नाम से जाना जाता है. वहीं, उत्तर भारत में जहां ‘नमकीन सेवइयां’ शाम के नाश्ते की जान हैं, वहीं पश्चिम बंगाल और ओडिशा में इसमें गुलाब जल डालकर एक अलग ही खुशबू दी जाती है. गर्मियों का सबसे फेवरेट ‘फालूदा’ भी तो सेवइयों का ही एक रूप है, जिसे कॉर्नस्टार्च से बनाया जाता है. चाहे वो दूध वाली पतली खीर हो या घी में भुनी हुई सूखी सेवइयां, हर किसी की अपनी पसंद है.
सिंपल सी रेसिपी
इस बार आप भी अपने घर पर ये शाही मिठास घोल सकते हैं. इसके लिए सिंपल सी रेसिपी नोट करें.
इंग्रेडिएंट्सः
- 100 ग्राम सेवइयां (वर्मीसेली)
- 3 बड़े चम्मच शुद्ध देसी घी
- 1 छोटा चम्मच हरी इलायची पाउडर
- आधा कप चीनी

बनाने का तरीका
- एक कड़ाही में घी गर्म करें और सेवइयों को तोड़कर सुनहरा होने तक भूनें.
- अब इसमें डेढ़ कप पानी और इलायची पाउडर डालें. इसे तब तक धीमी आंच पर पकाएं जब तक पानी सूख न जाए.
- लास्ट में चीनी डालें और अच्छी तरह मिलाएं. जब चीनी पूरी तरह घुल जाए, तो समझ लीजिए आपकी सेवइयां तैयार हैं.
- इसे गरमा-गरम परोसें और पुरानी यादों में खो जाएं.
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