Home Lifestyle सेहत का खजाना और किसानों के लिए वरदान, जानें भारत के किस राज्य को कहते हैं Amla का महाराज

सेहत का खजाना और किसानों के लिए वरदान, जानें भारत के किस राज्य को कहते हैं Amla का महाराज

by Preeti Pal
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सेहत का खजाना और किसानों के लिए वरदान, जानें भारत के किस राज्य को कहते हैं Amla का महाराज

Largest Producer of Amla: आयुर्वेद में आंवला के इतने फायदे लिखे हैं कि आप गिनते-गिनते थक जाएंगे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के किस राज्य में सबसे ज्यादा आवंला होता है?

25 April, 2026

जब बात सेहत, ग्लोइंग स्किन और स्ट्रॉन्ग हेयर की आती है, तो सबसे पहला नाम आंवला का ही जुबान पर आता है. छोटा सा दिखने वाला ये हरा फल असल में गुणों की खान है. विटामिन-सी से भरपूर होने की वजह से इसे इंडियन गूजबेरी भी कहा जाता है. आयुर्वेद में तो इसे अमृत फल का दर्जा मिला हुआ है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी थाली में च्यवनप्राश, अचार या मुरब्बे के फोर्म में पहुंचने वाला ये आंवला सबसे ज्यादा कहां पैदा होता है? अगर नहीं, तो आज आंवले की दुनिया की सैर करते हैं और जानते हैं भारत के उन राज्यों के बारे में जो देश को हेल्दी बना रहे हैं.

असली सुल्तान

अगर आप सोच रहे हैं कि आंवले का सबसे ज्यादा खेती कहां होती है, तो जवाब है उत्तर प्रदेश. यूपी न सिर्फ पॉपुलेशन में आगे है, बल्कि आंवला उत्पादन में भी पूरे भारत में नंबर वन है. उत्तर प्रदेश की मिट्टी और यहां का क्लाइमेट आंवले के पेड़ों के लिए एकदम परफेक्ट है. खासकर यूपी का प्रतापगढ़ जिला तो आंवला नगरी के नाम से मशहूर है. यहां के बागों से निकलने वाला आंवला पूरे देश की मंडियों और बड़ी-बड़ी मेडिकल कंपनियों तक पहुंचता है. उत्तर प्रदेश का बागवानी डिपार्टमेंट इस फल की खेती को बढ़ावा देने के लिए काफी मेहनत करता है, यही वजह है कि आज भारत के कुल उत्पादन का एक बहुत बड़ा हिस्सा अकेले इसी राज्य से आता है.

ये भी नहीं हैं पीछे

भले ही उत्तर प्रदेश टॉप पर हो, लेकिन कुछ और भी राज्य हैं जहां आंवले की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात इस लिस्ट में बड़े नाम हैं. मध्य प्रदेश और का ड्राई क्लाइमेट आंवले के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. इसके अलावा गुजरात में भी किसान ट्रेडिशनल फसलों के बजाय अब आंवले के बाग लगाने में इंटरेस्ट दिखा रहे हैं. इन राज्यों की खासियत ये है कि यहां के किसान कम पानी और कम उपजाऊ जमीन में भी आंवले की शानदार पैदावार ले लेते हैं. आंवले का पेड़ सूखे की मार भी सह लेता है. यही वजह है कि कम बारिश वाले इलाकों में भी ये लहलहाते रहते हैं.

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क्यों है भारत के लिए जरूरी?

भारत में आंवले की खेती सिर्फ एक फल उगाने तक लिमिटेड नहीं है, बल्कि ये एक बहुत बड़े बिजनेस की रीढ़ भी है. हर्बल और आयुर्वेदिक इंडस्ट्री में इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है. च्यवनप्राश हो, त्रिफला चूर्ण हो या बालों का तेल, बिना आंवले के ये सब अधूरे हैं. इसके अलावा आंवला नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट हैं. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट इसे लंबे टाइम तक खराब होने से बचाते हैं, इसलिए इससे बने जूस और कैंडी महीनों तक खराब नहीं होते. साथ ही आज पूरी दुनिया आयुर्वेद की तरफ मुड़ रही है. ऐसे में भारत से आंवले के प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट भी तेजी से बढ़ा है.

मजेदार फैक्ट्स

आंवले का पेड़ एक बार बड़ा हो जाए, तो ये 50 साल से भी ज्यादा टाइम तक फल दे सकता है. यानी एक बार की मेहनत और पीढ़ियों तक कमाई. इसके अलावा संतरे और नींबू के मुकाबले आंवले में विटामिन-सी की मात्रा कई गुना ज्यादा होती है. सबसे कमाल की बात ये है कि सुखाने या पकाने के बाद भी इसके मिनरल्स खत्म नहीं होते. वहीं, भारत दुनिया के सबसे बड़े आंवला उत्पादकों में से एक है. हमारा क्लाइमेट इस फल के लिए भगवान का दिया हुआ वरदान है. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि, रोज एक आंवला खाने से आपकी बीमारियों से लड़ने की ताकत यानी इम्युनिटी बढ़ती है. यही वजह है कि घर के बड़े-बुजुर्ग इसे खाने की सलाह देते हैं. यानी ये कहना गलत नहीं है कि, उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ और राजस्थान के रेतीले खेतों तक, आंवला की खेती लाखों किसानों का घर चला रही है. तो, अगली बार जब आप आंवले का मुरब्बा खाएं या इसका जूस पिएं, तो याद रखिएगा कि ये छोटा सा फल कितनी लंबी जर्नी करके आप तक पहुंची है.

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