Maa Chandraghanta Puja Vidhi: नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है, जो 21 मार्च को है. यहां जानें मां चंद्रघंटा कौन हैं, इनकी पूजा की विधि क्या है और इन्हें किसका भोग लगाया जाता है.
20 March, 2026
नवरात्रि के नौ दिनों में हर घर में माता की पूजा होती है और माहौल में एक सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है. चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि में नौ दिन मां के अलग-अलग रूपों को समर्पित हैं. हर रूप के अपने गुण हैं, जो आपको शक्ति और शांति देते हैं. पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है. वहीं तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है, जो 21 मार्च को है. आज हम आपको मां चंद्रघंटा कौन हैं, इनकी पूजा की विधि क्या है और इन्हें किसका भोग लगाया जाता है.

शक्ति और वीरता की देवी हैं मां चंद्रघंटा
मां दुर्गा का तीसरा अवतार देवी चंद्रघंटा हैं, जो शक्ति और वीरता का आशीर्वाद देती हैं. मां चंद्रघंटा को बाघ पर सवार दिखाया गया है और उनकी दस भुजाओं में दिव्य शस्त्र हैं. ऐसा माना जाता है कि उनकी घंटी बुरी ताकतों को दूर भगाने में मदद करती है. मां चंद्रघंटा की पूजा करने से डर और चिंता कम होती है. मां हिम्मत और निडरता देती हैं, साथ ही नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती हैं. नवरात्रि का तीसरा दिन उन लोगों के लिए खास तौर पर खास है जो स्ट्रेस, डर, वहम या बाहरी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. मां चंद्रघंटा की पूजा करने से मुश्किलों से लड़ने की शक्ति मिलती है और आत्मविश्वास जगता है.
मां चंद्रघंटा का प्रिय रंग और भोग
मां चंद्रघंटा को लाल रंग बहुत पसंद है. इस दिन लाल रंग के कपड़े पहनने से पवित्रता, शांति और मन को स्पष्टता मिलती है. मां चंद्रघंटा को दूध की मिठाई बहुत पसंद है. देवी मां को प्रसन्न करने के लिए खीर, दूध, मावे की मिठाई और फलों का भोग लगाना चाहिए. उन्हें गुड़हल या कोई भी लाल फूल चढ़ाएं.

मां चंद्रघंटा की पूजा विधि
मां चंद्रघंटा की पूजा श्रद्धा और भक्ति- भाव से करनी चाहिए. सुबह नहाने के बाद साफ कपड़े पहनें. पूजा की जगह को गंगाजल से शुद्ध करें. मां चंद्रघंटा की मूर्ति या तस्वीर को एक चौकी पर स्थापित करें. रोली, चावल, धूप, दीया, फूल, मिठाई और गंगाजल रखें. “ॐ देवी चंद्रघंटाये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें. पूजा के बाद देवी की आरती करें.
मां चंद्रघंटा की आरती
जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे सभी काम॥
चंद्र समान तुम शीतल दाती।
चंद्र तेज किरणों में समाती॥
क्रोध को शांत करने वाली।
मीठे बोल सिखाने वाली॥
मन की मालक मन भाती हो।
चंद्रघंटा तुम वरदाती हो॥
सुंदर भाव को लाने वाली।
हर संकट मे बचाने वाली॥
हर बुधवार जो तुझे ध्याये।
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं॥
मूर्ति चंद्र आकार बनाएं।
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं॥
शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगदाता॥
कांची पुर स्थान तुम्हारा।
करनाटिका में मान तुम्हारा॥
नाम तेरा रटू महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी॥
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