Diamond Capital of India: क्या आप जानते हैं कि भारत के किस शहर को डायमंड कैपिटल कहा जाता है? यहां पढ़ें डायमंड कैपिटल की खासियत.
29 December, 2025
Diamond Capital of India: भारत में कई ऐसे शहर हैं, जिन्हें उनकी खासियत के लिए एक अलग पहचान और नाम दिया गया है, जैसे- पिंक सिटी, ड्रीम सिटी, गोल्डन सिटी. इसी तरह हमारे एक शहर को ‘डायमंड कैपिटल’ या डायमंड सिटी’ भी कहा जाता है. इसे डायमंड कैपिटल इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यहां दुनियाभर के हीरों को तराशने का काम किया जाता है. इस शहर के नाम की कहानी भी बहुत रोचक है. चलिए जानते हैं भारत के डायमंड कैपिटल के बारे में.
किसे कहते हैं डायमंड कैपिटल
हम बात कर रहे हैं गुजरात राज्य के सूरत शहर की. सूरत को भारत का डायमंड कैपिटल कहा जाता है, क्योंकि यहां दशकों से हीरों की कटिंग और पॉलिशिंग का काम किया जा रहा है. यहां दुनिया के 90 प्रतिशत कच्चे हीरों को तराशकर उन्हें बाजार के लिए तैयार किया जाता है. सूरत सिर्फ हीरों के लिए नहीं, बल्कि कपड़ा मार्केट के लिए भी जाना जाता है, इस वजह से इसे ‘सिल्क सिटी’ भी कहा जाता है. सूरत भारत के सबसे तेजी से विकसित होने वाले शहरों में एक है. यहां तापी नदी अरब सागर में जाकर मिलती है. सूरत शहर को बसाने की कहानी भी बहुत दिलचस्प है.

कैसे बसा सूरत शहर
दरअसल, लगभग 1500 ईस्वी में एक धनी कारोबारी गोपीचंद ने इस शहर को बसाया था. उस समय इसका कोई पक्का नाम नहीं था, तब ज्योतिषाचार्यों ने कारोबारी को इस शहर का नाम ‘सूर्यपुर’ रखने का सुझाव दिया. तब इसका नाम ‘सूर्यपुर’ पड़ा, जिसका मतलब होता है- सूरज का शहर. बाद में मुगल शासक ने इसका नाम बदलकर सूरत रख दिया. हिंदी या ऊर्दू में सूरत का मतलब चेहरा होता है. समय के साथ यह शहर भारत का व्यापारिक केंद्र बन गया.
सूरत की खासियत
सूरत अपने हीरों और कपड़े के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. जैसा हमने पहले बताया कि दुनिया के 90 प्रतिशत हीरों को यहीं तराशा जाता है. इसी के साथ यह साड़ियों और सिंथेटिक कपडों का एक बड़ा बाजार है. सूरत सबसे तेजी से विकसित होने वाले शहरों में से एक हैं और यहां काफी साफ-सफाई देखने को मिलती है. उद्योगों का केंद्र होने की वजह से यहां बेरोजगारी दर काफी कम है. यहां युवाओं के लिए नौकरियों के बहुत अवसर हैं. इतिहास की बात करें तो यह एक महत्वपूर्ण बंदरगाह रहा है, जहां से मुगल और ब्रिटिश काल में मसाले, कपड़े और हीरों का निर्यात किया जाता था.
