Income Tax Act 2025: भारत में 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम लागू हो जाएगा, जो 1961 के पुराने कानून का स्थान लेगा. नए कानून में कर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य जटिलताओं और मुकदमों को कम करना है.
Income Tax Act 2025: भारत में 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम लागू हो जाएगा, जो 1961 के पुराने कानून का स्थान लेगा. नए कानून में कर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य जटिलताओं और मुकदमों को कम करना है. नए कानून में धाराओं को करीब 50% कम कर सरल बनाया गया है. इसमें ‘मूल्यांकन वर्ष'(Assessment Year)और ‘पिछले वर्ष’ (Last Year) के अंतर को समाप्त कर एक एकल ‘कर वर्ष'(Tax Year) प्रारूप अपनाया गया है. साथ ही करदाता अब समय सीमा के बाद रिटर्न दाखिल करने पर भी बिना जुर्माने के TDS रिफंड का दावा कर सकेंगे. 1 फरवरी को 2026-27 के बजट में व्यक्तियों, निगमों और अन्य के TAX के संबंध में घोषित किए गए किसी भी बदलाव को नए आयकर अधिनियम, 2025 में शामिल किया जाएगा. वित्त वर्ष 2027 के बजट के प्रस्तुत होने के बाद इन्हें अधिसूचित किए जाने की संभावना है. नए आयकर कानून को संसदीय समिति द्वारा जांच के बाद 12 अगस्त, 2025 को संसद द्वारा अनुमोदित किया गया था. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सहमति प्राप्त होने के बाद यह 21 अगस्त, 2025 को अधिनियम बन गया.
क्या है Assessment Year और Last Year?
अब तक करदाताओं को यह समझने में दिक्कत होती थी कि जिस साल उन्होंने आय अर्जित की है वह Last Year कहलाता है. वहीं उसका आकलन अगले Assessment Year में होता है. इस दोहरे सिस्टम के कारण करदाता अक्सर भ्रम में रहते थे और दस्तावेज तैयार करने से लेकर रिटर्न फाइल करने तक की प्रक्रिया जटिल हो जाती थी. अब Tax Year (अप्रैल से मार्च) की एकल अवधारणा अपनाई जाएगी. जिससे टैक्स से जुड़ी समयावधि और स्पष्ट हो जाएगी. इस बदलाव से करदाताओं के लिए टैक्स भरना पहले से अधिक आसान और पारदर्शी हो जाएगा. सरकार का उद्देश्य भी यही है कि टैक्स व्यवस्था को अधिक सरल, सुलभ और नागरिकों के अनुकूल बनाया जाए.
आयकर अधिनियम 1961 की समीक्षा क्यों की गई?
आयकर कानून 64 वर्ष पूर्व 1961 में लागू हुआ था. तब से समाज में लोगों की आय और कंपनियों के व्यापार करने के तरीकों में बहुत सारे बदलाव आए हैं. 1961 का अधिनियम उस समय बनाया गया था जब भारतीय गणराज्य कई चुनौतियों का सामना कर रहा था. समय के साथ देश की प्रगति के अनुरूप अधिनियम में संशोधन किए गए. तकनीकी उन्नति और देश के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने में आए बदलावों को देखते हुए पुराने आयकर अधिनियम में पूर्ण संशोधन की अत्यधिक आवश्यकता थी, जो सैकड़ों संशोधनों के कारण बोझिल हो गया था. आम आदमी के लिए कानून को समझना और विभिन्न धाराओं, उपधाराओं और प्रावधानों के अनेक संदर्भों को समझना लगभग असंभव हो गया था.
नए आयकर अधिनियम का उद्देश्य क्या है?
नया कानून संक्षिप्त और अधिक सुगम है. सरकार का उद्देश्य पुराने कानून की तुलना में इसका आकार आधा करना और भाषा को सरल बनाना है ताकि करदाता आसानी से अपनी सारी प्रक्रिया समझ सके. इससे मुकदमों में कमी आएगी और विवाद भी कम होंगे.
नया कानून अधिक सरल कैसे होगा?
आयकर अधिनियम 1961 प्रत्यक्ष करों से संबंधित है – व्यक्तिगत आयकर, कॉर्पोरेट कर, प्रतिभूति लेनदेन कर, उपहार कर और संपत्ति कर. इस अधिनियम में लगभग 298 धाराएं और 23 अध्याय हैं. समय के साथ सरकार ने संपत्ति कर, उपहार कर, अतिरिक्त लाभ कर और बैंकिंग नकद लेनदेन कर सहित विभिन्न करों को समाप्त कर दिया है. पिछले 6 दशकों में कई धाराओं में संशोधन किए गए हैं. नया अधिनियम उन सभी संशोधनों और धाराओं से मुक्त होगा जो अब प्रासंगिक नहीं हैं. आयकर दरों में कोई भी बदलाव आमतौर पर वित्त अधिनियम के माध्यम से किया जाता है, जो प्रत्येक वर्ष 1 फरवरी को संसद में प्रस्तुत केंद्रीय बजट का हिस्सा होता है. आगामी बजट में घोषित सभी संशोधनों को नए विधेयक में शामिल किया जाएगा.
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