27 February, 2026
Introduction
Holi Celebrations in India: भारत एक ऐसा देश है जहां त्योहारों का मतलब सिर्फ कैलेंडर की तारीखें नहीं, बल्कि जीने का एक अलग अंदाज है. वहीं, जब बात होली की हो, तो पूरा देश मानो एक सुर में ये कहने लगता है, बुरा ना मानो होली है. होली शायद भारत का सबसे डेमोक्रेटिक त्यौहार है. इसे सेलिब्रेट करने के लिए आपको किसी रिचुअल की चिंता नहीं होती, न ही किसी खास ड्रेस कोड को कैरी करना होता है।. आपको बस चाहिए, ढेर सारा गुलाल, कान फोड़ देने वाला म्यूज़िक, मुंह में घुल जाने वाली गुजिया और पूरी तरह से बेफिक्र हो जाने का जज्बा. लेकिन क्या आपको पता है कि हमारे देश में होली सिर्फ एक त्यौहार नहीं है? बल्कि ये दर्जनों अलग-अलग ट्रेडिशन्स का एक खूबसूरत गुलदस्ता है. यही वजह है कि आप भारत के जिस कोने में खड़े होंगे, वहां होली का रंग और ढंग बदल जाएगा. बरसाना की लठमार होली, शांतिनिकेतन का बसंत उत्सव और आनंदपुर साहिब का जोश, ये सब इतने अलग हैं कि इन्हें देखकर यकीन नहीं होता कि ये सब एक ही त्यौहार के हिस्से हैं. ऐसे में अगर आप इस साल अपनी होली को यादगार बनाना चाहते हैं, तो आपको भारत के उन 5 चुनिंदा ठिकानों पर ले चलते हैं, जहां की होली आपको जिंदगीभर याद रहेगी.
Table of Content
- वृंदावन की फूलों वाली होली
- शांतिनिकेतन-पश्चिम बंगाल
- शांतिनिकेतन-पश्चिम बंगाल
- आनंदपुर साहिब- पंजाब
- पुष्कर- राजस्थान
- पुडुचेरी

बरसाना और वृंदावन
अगर आप होली के असली वजूद और उसकी रूह को समझना चाहते हैं, तो आपको ब्रज की मिट्टी में कदम रखना होगा. उत्तर प्रदेश का ये इलाका, जिसमें मथुरा, बरसाना, नंदगांव और वृंदावन शामिल हैं, होली का असली घर माना जाता है. ये राधा और कृष्ण की भूमि है और यहां की हर एक परंपरा उन्हीं द्वापर युग की कहानियों से जुड़ी है. वृंदावन में होली सिर्फ एक पार्टी नहीं है, बल्कि ये एक भक्ति का ज़रिया भी है, जिसे लोग सदियों से फॉलो कर रहे हैं. इसके अलावा बरसाने की लठमार होली दुनिया भर में फेमस है. इसकी कहानी भी बड़ी दिलचस्प और प्यारी है. माना जाता है कि कृष्ण अपने दोस्तों के साथ नंदगांव से बरसाना राधा को रंग लगाने आते थे. वहीं, राधा रानी अपनी सखियां के साथ प्यार से उन्हें लाठियों से मारकर भगाती थीं. आज भी वही परंपरा जिंदा है. नंदगांव के पुरुष, जिन्हें होरियारे कहा जाता है, वो ढाल लेकर बरसाना आते हैं और वहां की महिलाएं उन पर लाठियां बरसाती हैं. लड़के ढाल से अपना बचाव करते हैं और इस दौरान पूरा माहौल ‘राधे-राधे’ के जयकारों से भर जाता है. राधा रानी मंदिर में सुबह 10:30 से दोपहर 2 बजे तक चलने वाला ये नज़ारा आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाता है.
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वृंदावन की फूलों वाली होली
लठमार होली के शोर और भीड़ के बिल्कुल अलग, वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की ‘फूलों वाली होली’ एक बहुत ही शांत, स्प्रिचुअल और खूबसूरत एक्सपीरियंस है. यहां रंगों के बजाय क्विंटल भर ताजे फूलों की पंखुड़ियां, जैसे गुलाब, गेंदा और कमल के फूलों को भक्तों पर बरसाया जाता है. मंदिर के पुजारी जब ऊपर से फूल बरसाते हैं, तो ऐसा लगता है मानो आसमान से खुशबू की बारिश हो रही हो. ये एक्सपीरियंस इतना इमोशनल कर देने वाला होता है कि कई लोग खुशी से रो पड़ते हैं.
कैसे पहुचें: अगर आप मथुरा की होली का मज़ा लेना चाहते हैं, तो ये भी जान लें कि यहां पहुंचना कैसे है. दरअसल, दिल्ली से मथुरा तक का ट्रेन का रास्ता सिर्फ 2 घंटे का ही है. बरसाना मथुरा से 42 किमी और वृंदावन 12 किमी दूर है. यहां जाने के लिए आपको कम से कम 3 महीने पहले होटल बुक करना चाहिए क्योंकि पूरी दुनिया से लोग यहां होली सेलिब्रेट करने के लिए खिंचे चले आते हैं.

शांतिनिकेतन-पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल का शांतिनिकेतन हर चीज़ को बाकी दुनिया से थोड़ा अलग ढंग से करने के लिए जाना जाता है और होली का भी यही हाल है. महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने रंगों के इस त्योहार को ‘बसंत उत्सव’ का नाम दिया था. उनके लिए होली सिर्फ हुड़दंग नहीं, बल्कि नेचर के लिए नए जन्म, वसंत की हरियाली और क्रिएटिविटी का सेलिब्रेशन था. शांतिनिकेतन में होली का नजारा किसी कैनवस पर बनाई गई पेंटिंग जैसा होता है. यहां विश्व भारती विश्वविद्यालय के स्टूडेंट्स और लोकल लोग ट्रेडिशनल पीले रंग के कपड़े पहनते हैं. लड़के पीले कुर्ते और लड़कियां बसंती रंग की साड़ियां पहनती हैं. साथ ही वो अपने बालों में ताजे पलाश के फूल भी सजाती हैं. होली सेलिब्रेशन की शुरुआत ‘रवींद्र म्यूजिक’ के साथ होती है, ये गीत टैगोर ने खास तौर पर वसंत के लिए लिखे थे. यहां का डांस बॉलीवुड के शोर-शराबे वाला नहीं, बल्कि बहुत सिंपल होता है.
खास बात ये है कि पश्चिम बंगाल की इस होली में रंगों का इस्तेमाल बहुत ही सलीके से किया जाता है. लोग एक-दूसरे को सूखा गुलाल लगाकर बधाई देते हैं. शांतिनिकेतन की होली उन लोगों के लिए बेस्ट है जो शोर-शराबे से दूर क्लासिक म्यूज़िक, आर्ट और कल्चर के बीच त्योहार मनाना चाहते हैं.
कैसे पहुंचेंः कोलकाता से शांतिनिकेतन की दूरी लगभग 160 किमी है. ‘शांतिनिकेतन एक्सप्रेस’ इसके लिए सबसे कंफर्टेबल ऑप्शन है. बोलपुर रेलवे स्टेशन यहां का मेन सेंटर है.

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आनंदपुर साहिब- पंजाब
अगर आप होली को एक बिल्कुल नए अंदाज़ में देखना चाहते हैं, तो आपको पंजाब के आनंदपुर साहिब जरूर जाना चाहिए. पंजाब में इसे ‘होला मोहल्ला’ कहा जाता है, जिसकी शुरुआत सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी ने की थी. यहां होली में रंगों के साथ-साथ आपको शानदार सैन्य कौशल भी देखने को मिलेगा. ब्लू कलर के लिबास और बड़ी-बड़ी पगड़ियों में सजे ‘निहंग सिख’ जब अपने घोड़ों पर सवार होकर निकलते हैं, तो जमीन हिलने लगती है. आप यहां ‘गतका’ यानी एक तरह की सिख युद्ध कला का प्रदर्शन भी देखेंगे. आनंदपुर साहिब में तलवारों और चक्रों के घूमने की आवाज हवा में म्यूज़िक की तरह सुनाई देती है. घुड़सवारी के ऐसे हैरतअंगेज करतब यहां देखने को मिलते हैं जो आपने शायद ही कहीं और देखे हों. इन सबके अलावा होला मोहल्ला की सबसे बड़ी खूबसूरती इसका ‘लंगर’ है. 3 दिनों तक चलने वाले इस सेलिब्रेशन में हजारों वालंटियर्स दिन-रात सेवा करते हैं और आने वाले हर इंसान बड़े प्यार से खाना खिलाते हैं. ये त्योहार जितना शक्ति का प्रदर्शन है, उतना ही सॉफ्ट और सेवा का भी उदाहरण है. यहां की एनर्जी इतनी पॉजिटिव होती है कि आप खुद को एक नई पावर से भरा हुआ फील करते हैं.
कैसे पहुंचें: आनंदपुर साहिब चंडीगढ़ से लगभग 85 किमी दूर है. आप दिल्ली से सीधी ट्रेन या बस के जरिए यहां आसानी से पहुंच सकते हैं. यहां रुकने के लिए गुरुद्वारों के पास सराय और टेंट सिटी का अरेंजमेंट भी रहता है.

पुष्कर- राजस्थान
राजस्थान का पुष्कर एक ऐसा खूबसूरत और जादुई शहर है जहां स्प्रिचुएलिटी और मॉर्डन लाइफस्टाइल का बेहतरीन कॉम्बिनेशन देखने को मिलता है. यहां की होली दुनिया भर के ट्रेवलर्स के लिए एक बकेट लिस्ट इवेंट बन चुकी है. पुष्कर की होली 3 दिनों तक चलती है और इसका सबसे बड़ा अट्रै्क्शन है ‘कपड़ा फाड़ होली’. इसका मज़ा लेने के लिए ब्रह्मा मंदिर के पास और मेन मार्केट की तंग गलियों में हजारों की तादात में लोकल लोग और विदेशी टूरिस्ट जमा होते हैं. सड़कों पर बड़े-बड़े डीजे और रेन डांस के स्टेज लगाए जाते हैं. जैसे ही म्यूज़िक बजना शुरू होता है, पूरा शहर एक बड़े से डांस फ्लोर में बदल जाता है. लोगों का जोश और एक्साइटमेंट इतनी ज्यादा होती है कि लोग मस्ती में अपने कुर्ते तक फाड़ देते हैं और उन्हें ऊपर टंगे तारों पर फेंक देते हैं. वहां का आसमान गुलाल के खूबसूरत रंगों से ढक जाता है. लेकिन पुष्कर की होली सिर्फ नाच-गाना ही नहीं है. सुबह-सुबह ब्रह्मा मंदिर में होने वाली खास पूजा और घाटों पर उमड़ने जमा होने वाली भीड़, इसे काफी अलग बनाती है. शाम को जब सब थक-हारकर रंगों को धो लेते हैं, तो घाटों पर जलते दीये और आरती की गूंज एक अलग ही सुकून देती है. पुष्कर की होली उन लोगों के लिए है जो दिल खोलकर नाचना चाहते हैं और नए लोगों से दोस्ती करना चाहते हैं.
कैसे पहुंचें: अजमेर यहां का नजदीकी मेन रेलवे स्टेशन है. अजमेर से पुष्कर जाने के लिए सिर्फ 20 मिनट लगते हैं. याद रखें, यहां की होटल होली के टाइम पर मनमाना किराया लेते हैं, इसलिए पहले से बुकिंग करना अच्छा रहता है.
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पुडुचेरी
ज़रा सोचिए कि फ्रेंच कोलोनिअल बिल्डिंग्स, साफ-सुथरी सड़कों और नीले समंदर के किनारे होली कैसी लगेगी? सोचकर ही अच्छी वाली फीलिंग आ रही है ना? दरअसल, पुडुचेरी में होली का एक्सपीरियंस बिल्कुल किसी हॉलीवुड फिल्म जैसा होता है. यहां की ‘व्हाइट टाउन’ की गलियां, जो अपनी पीली और सफेद दीवारों के लिए जानी जाती हैं, रंगों से सराबोर होकर और भी खूबसूरत लगने लगती हैं. पुडुचेरी की होली काफी शांत और सलीके वाली होती है. यहां प्रोमेनेड बीच पर लोग इकट्ठा होते हैं और रंगों के साथ खेलते हुए समंदर की लहरों का मज़ा लेते हैं. यहां कई कैफे और रिसॉर्ट्स खास होली पार्टियों यानी इवेंट्स होस्ट करते हैं. यहां ऑर्गेनिक कलर्स और पूल डांस भी होता है. यहां की होली की सबसे बड़ी खासियत है, खाना. आप होली खेलने के बाद किसी बेहतरीन फ्रेंच कैफे में जाकर क्रोइसैन्ट और कॉफी का लुत्फ उठा सकते हैं. ये उन लोगों के लिए सबसे अच्छी जगह है जो होली को एक लग्जरी और रिलैक्सिंग वेकेशन की तरह मनाना चाहते हैं. यहां की हवा में एक अलग ही शांति है जो रंगों के त्योहार को और भी खास बना देती है.
कैसे पहुंचें: चेन्नई से पुडुचेरी की दूरी करीब 150 किमी है. ECR रोड से कार चलाकर यहां आना सबसे अच्छा एक्सपीरियंस हो सकता है. पुडुचेरी का अपना रेलवे स्टेशन भी है.

Conclusion
- अगर आप खुलकर होली का त्योहार मनाना चाहते है तो, स्किन और बालों का ख्याल रखना बहुत जरूर है. होली खेलने से पहले पूरी बॉडी पर नारियल तेल या लोशन जरूर लगाएं. इससे रंग छुड़ाना आसान हो जाएगा.
- ऑर्गेनिक रंगों का यूज़ करना बेहतर रहेगा. कोशिश करें कि नेचुरल और हर्बल कलर्स का ही इस्तेमाल करें, ताकि नेचर और आपकी स्किन दोनों, सेफ रहें. इसके अलावा होली का असली मज़ा सफेद कपड़ों में ही है.
- अगर आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो अपने फोन और कैमरे के लिए वॉटरप्रूफ और डस्ट-प्रूफ कवर साथ रखें. गुलाल कैमरे के लेंस को खराब करने में ज़रा भी नहीं हिचकिचाएगा.
- भारत के ये पांचों ठिकाने हमें सिखाते हैं कि खुशी के कितने अलग-अलग शेड्स हो सकते हैं. चाहे वो ब्रज की भक्ति हो, शांतिनिकेतन की कला, आनंदपुर का साहस, पुष्कर की एनर्जी या पुडुचेरी की शांति, हर जगह आपको एक नई कहानी मिलेगी. तो बस इस बार अपना बैग पैक करें, घर से बाहर निकलें और भारत के इन रंगों में खुद को भिगो दें.
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