Hydrogen Buses: सरकार ने डीजल और सीएनजी को टक्कर देने के लिए हाइड्रोजन से बसें चलाने के लिए प्रोजेक्ट शुरू किया है. केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को गांधीनगर में प्रवास 5.0 और भारत प्रवास अवॉर्ड्स इवेंट में एक सभा को संबोधित किया. उन्होंने कहा हाइड्रोजन ट्रांसपोर्टेशन इंडस्ट्री का भविष्य है और सरकार देश भर में 10 रूट पर इसके फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल के ट्रायल कर रही है. उन्होंने कहा, “हमारी मिनिस्ट्री हाइड्रोजन ट्रायल के लिए दस रूट पर एक पायलट प्रोजेक्ट कर रही है. मुझे यकीन है कि हाइड्रोजन भविष्य का फ्यूल है और हम इस पर काम कर रहे हैं.”
अल्टरनेटिव फ्यूल पर फोकस
गडकरी ने कहा कि इंडस्ट्री अल्टरनेटिव फ्यूल और बायोफ्यूल के एरिया में बहुत अच्छा काम कर रही है. भारत अपनी टेक्नोलॉजी और कॉस्ट के साथ ग्लोबल लेवल पर लीड करेगा. उन्होंने ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम को सुरक्षित, मॉडर्न और एनवायरनमेंट फ्रेंडली बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने आगे कहा, “बसों को डेवलप करने में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की पहल बहुत जरूरी है और मैन्युफैक्चरर्स और ट्रांसपोर्टर्स को वर्ल्ड-स्टैंडर्ड टेक्नोलॉजी के साथ टेक्नोलॉजिकल नजरिए से अच्छे और आरामदायक ट्रांसपोर्ट के बारे में सोचना चाहिए. हमारे मैन्युफैक्चरर्स का फर्ज है कि वे सही इकोनॉमिक वैल्यू के साथ ज्यादा आराम दें.”
इन रास्तों पर चल रहे ट्रायल
मंत्री ने कहा कि ग्रेटर नोएडा-दिल्ली-आगरा, भुवनेश्वर-कोणार्क-पुरी, अहमदाबाद-वडोदरा-सूरत, साहिबाबाद-फरीदाबाद-दिल्ली, पुणे-मुंबई, जमशेदपुर-कलिंग नगर, तिरुवनंतपुरम-कोच्चि, कोच्चि-एडापल्ली, जामनगर-अहमदाबाद और NH-16 विशाखापत्तनम-बय्यावरम रूट पर ट्रायल चल रहे हैं.
बस प्रोडक्शन बढ़ाने की जरूरत
केंद्रीय मंत्री ने भारत के ट्रांसपोर्ट सेक्टर को बेहतर बनाने के लिए कई जरूरी बातें कही हैं. सबसे बड़ी समस्या यह है कि देश को 300,000 बसों की जरूरत है, लेकिन कंपनियां हर साल सिर्फ 70,000 से 80,000 बसें ही बना पाती हैं. इस कमी को दूर करने के लिए, कंपनियों को अपने बस प्रोडक्शन को तीन गुना करना होगा. क्योंकि इलेक्ट्रिक गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरी सस्ती हो रही हैं, इसलिए बनाने वालों को इलेक्ट्रिक बसों की कीमत कम करनी चाहिए और इसका फायदा सीधे ग्राहकों को देना चाहिए. इसके अलावा, सरकार इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए ₹20 प्रति यूनिट की ऊंची बिजली दर को कम करने पर काम कर रही है, जिससे चार्जिंग और सफर दोनों सस्ते हो जाएंगे.
1.8 लाख लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत
सड़क हादसों का मुद्दा उठाते हुए गडकरी ने कहा कि देश में हर साल लगभग 500,000 सड़क हादसे होते हैं. उन्होंने कहा कि इन हादसों में लगभग 180,000 लोग मारे जाते हैं और मरने वालों में से 66 प्रतिशत 18-36 साल के होते हैं. उन्होंने कहा कि एक सुरक्षित ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम बनाना उतना ही जरूरी है जितना नई टेक्नोलॉजी और दूसरे फ्यूल को बढ़ावा देना.
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News Source: PTI
