Banglamukhi Temple Donation Row: अयोध्या के राम मंदिर के बाद अब मध्य प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में चढ़ावा चोरी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया है. मंदिर सरकारी है, लेकिन अफसरों की नाक के नीचे यहां एक फर्जी प्राइवेट समिति बनाकर करोड़ों का चढ़ावा ठिकाने लगाया जा रहा था. जब इस महाघोटाले की जांच करने पहुंचे डिप्टी कलेक्टर और तहसीलदार से लाइव टाइम्स के संवाददाता नितिन ठाकुर ने ग्राउंड जीरो पर सवाल पूछे… तो जो हुआ, उसने प्रशासन की नीयत साफ कर दी.
कैमरा देखते ही भागे अधिकारी
कैमरे को देखते ही साहबों ने ऐसी दौड़ लगाई कि लगा मानो दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी की पूरी दाल ही काली है. ये तस्वीरें गवाह हैं कि जब पाप का घड़ा भरता है तो कानून के रखवाले ही कानून के कैमरे से मुंह छिपाकर भागने लगते हैं. प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां बगलामुखी मंदिर में करोड़ों रुपए के चढ़ावे की हेराफेरी की शिकायत के बाद, कलेक्टर प्रीति यादव ने एक जांच कमेटी बनाई, लेकिन जब जांच समिति के सदस्य, डिप्टी कलेक्टर और तहसीलदार नलखेड़ा पहुंचे तो वहां पहले से मौजूद लाइव टाइम्स के संवाददाता नितिन ठाकुर ने उनसे तीखे सवाल पूछ लिए. फिर क्या था, सवालों के जवाब देने के बजाय साहबों ने कैमरे को देखते ही उल्टे पैर दौड़ लगा दी.
दान के पैसों को निजी खातों में जमा किया
बता दें मां बगलामुखी का यह मंदिर देश के बड़े-बड़े दिग्गजों की आस्था का केंद्र है, लेकिन यहां आस्था के नाम पर जो खेल चल रहा था, उसका पर्दाफाश हो चुका है. नियमों के विरुद्ध नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति नाम की एक प्राइवेट संस्था बनाई गई, जिसने श्रद्धालुओं के दान के पैसे को सरकारी खजाने में डालने के बजाय अपने निजी बैंक खातों में जमा किया और जब आज हम इसी की हकीकत जानने जांच अधिकारियों के पास पहुंचे तो उनके पास हमारे सवालों का कोई जवाब नहीं था. कैमरे के सामने से अधिकारियों का इस तरह भागना साफ बयां करता है कि इस घोटाले की जड़ें बहुत गहरी हैं और इसमें कई बड़े चेहरे शामिल हैं.
3 साल से चल रही चोरी!
पड़ताल और कलेक्टर कार्यालय में हुई शिकायत में यह साफ हुआ है कि करीब 3 साल से अफसरों की मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा चल रहा था. सरकारी मंदिर की रसीद की जगह प्राइवेट लोग अपनी रसीदें थमाकर कैश और सोना-चांदी बटोर रहे थे. अब इस पूरे मामले में जांच के 4 मुख्य पॉइंट्स हैं.
- पहला: मंदिर के गर्भगृह में आखिर कितनी चांदी लगाई गई.
- दूसरा: फर्जी समिति ने अब तक कितने लोगों से चढ़ावा लिया और उसका रिकॉर्ड कहां है.
- तीसरा: कुल कितना चढ़ावा आया और उसे सरकारी खजाने में क्यों नहीं जमा कराया गया.
- चौथा: सरकारी समिति के होते हुए प्राइवेट लोगों की समिति को किसने और क्यों मंजूरी दी.
सच छुपाने की साजिश
आपको बता दें कि महाभारत कालीन इस मंदिर का गर्भगृह 3 करोड़ से अधिक के सोने और 65 लाख की चांदी से सुसज्जित है. जहां देश विदेश से लोग तंत्र साधना और मिर्च अनुष्ठान के लिए आते हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर लगे 28 कैमरों में से 4 कैमरे पहले से ही खराब हैं, जो इस मिलीभगत की तरफ इशारा करते हैं. कलेक्टर ने जांच दल को 7 दिन में रिपोर्ट सौंपने को कहा है, लेकिन लाइव टाइम्स के कैमरे से भागते अफसरों ने यह साबित कर दिया है कि सच को छुपाने की कोशिश की जा रही है. मां बगलामुखी के दरबार में हुई इस बड़ी धोखाधड़ी के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है. लाइव टाइम्स इसकी हर परत खोलता रहेगा.
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News Source: PTI
