Dowry Deaths in India: भारत के समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों में हर दिन महिलाओं से जुड़े अपराध की नई खबरें सुनाई देती हैं, हालांकि उनमें केवल नाम और जगह बदलते हैं, लेकिन अपराध वहीं रहता है. महिलाओं के खिलाफ अपराध अब समाज और राजनीति के लिए इतना आम हो गया कि हम न इसके खिलाफ कुछ करने की मांग करते हैं और न ही नेताओं को महिला सुरक्षा एक जरूरी मुद्दा लगता है. ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के बैनरों और विज्ञापनों के पीछे छुप जाती हैं उन बेटियों की चीखें जिन्हें माता पिता ने बचाया भी, पढ़ाया भी, लेकिन दहेज नाम की कुप्रथा ने उनकी जिंदगी छीन ली.
बेटी की शादी किसी भी परिवार में सबसे खुशी का दिन माना जाता है. माता-पिता सालों तक इसके सपने देखते हैं. पिता पूरी जिंदगी की बचत खर्च कर देता है और माताएं अपनी बेटी की विदाई के लिए छोटी-छोटी खुशियां भी कुर्बान कर देती हैं. लेकिन आज के भारत में हजारों परिवारों के लिए, यही शादी एक बुरे सपने में बदल जाती है. एक ऐसा सपना जहां शादी के बाद बेटियों को “कम दहेज” लाने के लिए ताना मारा जा रहा है. जहां प्यार की जगह लालच ने ले ली है. जहां शादी रिश्तों से ज्यादा दहेज पर केंद्रित हो गई है और जहां औरते को पीटा जाता है, बेइज्जत किया जाता है और आखिर में मार दिया जाता है. हाल ही में ऐसा एक मामला भोपाल से आया है.
हर 92 मिनट पर एक बेटी की मौत
भोपाल की रहने वाली ट्विशा शर्मा का मामला अभी सुर्खियों में बना हुआ है. मॉडर और मिस पुणे रह चुकी ट्विशा शर्मा नें भोपाल के वकील समर्थ सिंह से शादी की थी, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि कुछ महीनों के बाद यह शादी उसे खत्म कर देगी. ट्विशा शार्मा की शादी पांच महीने पहले दिसंबर, 2025 में हुई थी. 12 मई 2026 को ट्विशा के मायके वालों को उसकी मौत की खबर मिली. ट्विशा के माता-पिता का आरोप है कि उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और दहेज के लिए उसकी जान ले ली. 8 दिनों से ट्विशा का शव मर्चूरी में रखा है और माता-पिता न्याय की गुहार लगा रहे हैं.
ट्वविशा की मौत के ठीक पांच दिन बाद, 17 मई 2026 को ग्रेटर नोएडा के जलपुरा गांव से एक और बेटी की मौत की खबर सामने आई. 24 साल की दीपिका नागर की शादी को एक साल से थोड़ा ज्यादा समय हुआ था. दीपिका के ससुराल वाले उसे लगातार दहेज के प्रताड़ित कर रहे थे. ससुराल वालों फॉर्च्यूनर कार और ₹50 लाख कैश की मांग कर रहे थे. दीपिका ने अपने ही घर में महीनों तक शारीरिक और मानसिक टॉर्चर सहा. घटना वाली रात, दीपिका ने रोते हुए अपने माता-पिता को फोन किया और बताया कि उसे बुरी तरह पीटा गया है. थोड़ी देर बाद, उसकी बॉडी तीसरी मंजिल से गिरी हुई मिली.
हम उन माता-पिता के दर्द का अंदाजा भी नहीं लगा सकते, जिन्होंन प्यार से अपनी बेटी को पालपोस कर बड़ा किया, उसे पढ़ाया और कुछ सपनों के साथ उसकी शादी की, लेकिन बदले में उन्हें जिंदगी भर के आंसू मिले. यह तो सिर्फ वे खबरे हैं, जो चर्चा में बनी हुई हैं. लेकिन NCRB के डेटा के मुताबिक, भारत में हर 92 मिनट में एक बेटी को दहेज के लिए मार दिया जाता है. यहां कुछ आंकड़े दिए गए हैं, जो दिखाते हैं 2024 में भारत में कहां कितनी बेटियों को दहेज के लिए मारा गया.
2024 में रजिस्टर हुए कुल मामलों का राज्य-वार ब्यौरा
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के मुताबिक, भारत में 2024 में दहेज के कारण होने वाली मौतों की कुल 5,737 घटनाएं दर्ज की गईं, जिसका मतलब है कि हर एक लाख महिलाओं की आबादी पर कुल राष्ट्रीय दहेज मौत दर 0.8 है. यह डेटा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दिए गए आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है और NCRB द्वारा इकट्ठा किया गया है, इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304B दोनों के तहत रजिस्टर हुए मामले शामिल हैं. जहां ज़्यादा आबादी वाले राज्यों में स्वाभाविक रूप से कुल आंकड़े ज्यादा थे. उत्तर प्रदेश (2,038) और बिहार (1,078) मामलों के साथ, दहेज के बेटियों की जान लेने वाले राज्यों में सबसे आगे रहे. यहां दहेज से होने वाली मौतों की दर भी सबसे ज़्यादा दर्ज की गई, जो क्रमशः 1.8 और 1.7 प्रति एक लाख महिलाओं की आबादी में थी. यहां देश भर में मामलों के राज्य-वार बंटवारे और हर एक लाख महिलाओं की आबादी पर रिपोर्ट की गई दहेज से होने वाली मौतों की दर पर एक डिटेल्ड नजर डाली गई है.

इन आंकड़ों से पता चलता है कि हर साल 2024 में हर दिन 15 से 16 महिलाओं को दहेज के कारण मारा गया. यानी हर 94 मिनट में एक बेटी की मौत हुई. ईसी तरह अगर आप NCRB के “क्राइम इन इंडिया 2023” की रिपोर्ट पर नजर डालेंगे तो, पूरे भारत में दहेज से जुड़े 15,489 मामले दर्ज किए गए, जबकि दहेज हिंसा के कारण 6,156 महिलाओं की मौत हो गई. इसका मतलब है कि 2023 में हर दिन लगभग 17 से 18 महिलाओं की दहेज के कारण हत्या कर दी गई और लगभग हर 84 मिनट में एक महिला दहेज के कारण अपनी जान गंवा दी.
2024 दहेज से होने वाली मौतें और घरेलू क्रूरता
2024 के NCRB डेटा के एनालिसिस से पता चलता है कि दहेज से होने वाली मौतों और पतियों या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के राज्य-वार ट्रेंड में बहुत बड़ा अंतर है. जहां दहेज से होने वाली मौतों का नेशनल एवरेज हर लाख महिलाओं की आबादी पर 0.8 था, वहीं घरेलू क्रूरता की दर काफी ज्यादा 17.6 थी. डेटा से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली जैसे राज्यों में दोनों अपराधों के लिए नेशनल एवरेज से ज्यादा क्राइम रेट रिपोर्ट किए गए. इसके उलट, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में दहेज से होने वाली मौतों की दर ठीक-ठाक रही, लेकिन पतियों या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता की दर बहुत ज़्यादा रही, जिसमें तेलंगाना में देश में सबसे ज़्यादा क्रूरता दर 52.8 प्रति लाख महिलाओं की आबादी रही. इस बीच, बिहार में दहेज से होने वाली मौतों की दर (1.7) दूसरी सबसे ज़्यादा रही, लेकिन घरेलू क्रूरता की दर (3.0) तुलनात्मक रूप से कम रही. उत्तराखंड, असम और पंजाब समेत कई राज्य दोनों कैटेगरी में नेशनल एवरेज से नीचे रहे.

किसे मिला न्याय?
अब एक नजर डालते हैं कि भारत में दहेज हत्या के कितने मामलों में सजा सुनाई जाती है. इस डेटा को पढ़कर आपको पता चलेगा कि जिन माता-पिता ने अपनी बेटी गंवाई, उनमें से आधे को भी न्याय मिला. 2021 के NCRB डेटा के मुताबिक, 6,753 दहेज हत्या मामले दर्ज किए गए, जिसमें दोषसिद्धि (सजा सुनाने) की दर और संख्या बेहद कम रही है. 2021 में कुल मामलों में से केवल 34.7% में ही सजा सुनाई गई. इसमें सबसे आगे बिहार रहा. बिहार में 71.5 प्रतिशत के साथ सजा सुनाने की दर सबसे ज्यादा रही. उसके बाद झारखंड में सजा सुनाने की दर 58.30 प्रतिशत रही. पश्चिम बंगाल (4.6%) और असम (5.0%) जैसे राज्यों में, कोर्ट ट्रायल पूरा होने के बावजूद, बहुत कम मामलों में सजा हुई. केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों में, 2021 में किसी भी आरोपी को सजा नहीं हुई, सजा मिलने की दर 0% थी. उस साल सिर्फ 2,241 मामलों लगभग 34% का ट्रायल पूरा हुआ, जबकि देश भर में 6,589 मामले रजिस्टर हुए, जो साफ तौर पर न्याय मिलने में देरी को दिखाता है.
NCRB 2021: दहेज हत्या मामलों में सजा की दर
| क्र. | राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | कुल दर्ज मामले | अदालती सुनवाई पूरी हुई | सजा सुनाए गए मामले | दोषसिद्धि दर (%) |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | उत्तर प्रदेश | 2,222 | 753 | 439 | 58.3% |
| 2 | बिहार | 1,000 | 179 | 128 | 71.5% |
| 3 | मध्य प्रदेश | 522 | 380 | 136 | 35.8% |
| 4 | झारखंड | 281 | 81 | 47 | 58.0% |
| 5 | हरियाणा | 275 | 67 | 16 | 23.9% |
| 6 | राजस्थान | 265 | 78 | 37 | 47.4% |
| 7 | कर्नाटक | 158 | 56 | 14 | 25.0% |
| 8 | छत्तीसगढ़ | 65 | 32 | 11 | 34.4% |
| 9 | आंध्र प्रदेश | 108 | 65 | 9 | 13.8% |
| 10 | महाराष्ट्र | 172 | 71 | 8 | 11.3% |
| 11 | उत्तराखंड | 57 | 17 | 6 | 35.3% |
| 12 | ओडिशा | 293 | 28 | 5 | 17.9% |
| 13 | पश्चिम बंगाल | 350 | 108 | 5 | 4.6% |
| 14 | असम | 198 | 20 | 1 | 5.0% |
| 15 | गुजरात | 11 | 18 | 1 | 5.6% |
| 16 | पंजाब | 63 | 11 | 1 | 9.1% |
| 17 | केरल | 9 | 2 | 0 | 0.0% |
| 18 | तमिलनाडु | 24 | 14 | 0 | 0.0% |
| 19 | तेलंगाना | 175 | 39 | 0 | 0.0% |
| 20 | गोवा | 0 | 1 | 0 | 0.0% |
| 21 | हिमाचल प्रदेश | 2 | 1 | 0 | 0.0% |
| 22 | मणिपुर | 2 | 0 | 0 | — |
| 23 | त्रिपुरा | 1 | 0 | 0 | — |
| 24 | अरुणाचल प्रदेश | 0 | 0 | 0 | — |
| 25 | मेघालय | 0 | 0 | 0 | — |
| 26 | मिजोरम | 0 | 0 | 0 | — |
| 27 | नागालैंड | 0 | 0 | 0 | — |
| 28 | सिक्किम | 0 | 0 | 0 | — |
| 29 | दिल्ली (UT) | 111 | 9 | 6 | 66.7% |
| 30 | चंडीगढ़ (UT) | 4 | 2 | 1 | 50.0% |
| 31 | जम्मू और कश्मीर (UT) | 6 | 0 | 0 | — |
| 32 | अन्य केंद्र शासित प्रदेश | 4 | 0 | 0 | — |
| कुल (All India) | 6,589 | 2,241 | 957 | 42.7% |
जरूरी जानकारी: कानूनी कार्रवाई में, सजा की दर सिर्फ उन केस के आधार पर कैलकुलेट की जाती है जिनकी कोर्ट हियरिंग (Trials Completed) उस साल पूरी हो चुकी हो, न कि उस साल रजिस्टर हुए केस की कुल संख्या के आधार पर. यानी जिन राज्यों में कोर्ट हियरिंग की संख्या दर्ज मामलों से ज्यादा है. वहां पुराने रजिस्टर्ड केस में सुनवाई हुई और सजा सुनाई गई.
NCRB की रिपोर्ट हर साल बदलती रहेगी. आंकड़े थोड़े कम या ज्यादा होते रहेंगे, लेकिन देश में महिलाओं की सुरक्षा, पीड़ित परिवार को न्याय और दहेज के लालचियों के मन में कानून का डर, कब होगा यह सबसे बड़ा सवाल है. जब तक शादी के बाद पैसों के लिए बेटियों को मारा जाता रहेगा, तब तक भारत खुद को विकसित और यह समाज खुद को प्रगतिशील नहीं कह सकता.
यह भी पढ़ें- दहेज के लालचियों ने लील ली एक हंसती हुई बिटिया की जान! पति-ससुर गिरफ्तार; जानें पूरा मामला
