Nithari Case: हाई प्रोफाइल और सनसनीखेज निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में आत्महत्या कर ली. उसकी लाश एक चाय की दुकान में रस्सी से लटकी हुई मिली. पुलिस ने बताया कि निठारी केस का आरोपी सुरेंद्र कोली शुक्रवार को हरिद्वार में अपनी चाय की दुकान में मृत पाया गया. कोली को बाद में निठारी के कई मामलों में बरी कर दिया गया था. वह बिजनेसमैन मोनिंदर सिंह पंढेर के नोएडा स्थित घर पर घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था.
सुप्रीम कोर्ट ने कोली को कर दिया बरी
निठारी मामला 2006 में तब सामने आया जब नोएडा के सेक्टर 31 में पंढेर के बंगले (D-5) के पीछे के आंगन और नालियों से कंकाल, खोपड़ियां और हड्डियां मिलीं. कई बच्चों और महिलाओं के लापता होने और उनकी हत्याओं का पता चलने पर देश भर में आक्रोश पैदा हो गया था. घटना ने स्थानीय लोगों में दहशत फैला दी थी. इस मामले में सह आरोपी पंढेर भी कई सालों तक जेल में रहा, लेकिन मामले में बरी होने के बाद 20 अक्टूबर 2023 को उसे रिहा कर दिया गया. कोली पिछले कुछ दिनों से हरिद्वार में चाय बेचने का काम कर रहा था. सुप्रीम कोर्ट ने कोली को निठारी मामले में बरी कर दिया था. शुक्रवार को भूपतवाला इलाके में एक चाय की दुकान के अंदर एक व्यक्ति का शव लटका हुआ मिला.
चाय की दुकान चलाकर कर रहा था गुजारा
सूचना मिलने पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. मृतक की पहचान सुरेंद्र कोली के तौर पर हुई, जो निठारी मामले का आरोपी था. बताया जा रहा है कि सुरेंद्र कुछ समय से भूपतवाला इलाके में एक झुग्गी में रह रहा था और पास ही चाय की दुकान चलाकर अपना गुजारा कर रहा था. शुक्रवार सुबह स्थानीय लोगों को दुकान के अंदर कुछ संदिग्ध लगा और उन्होंने पुलिस को सूचना दी. जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो कोली का शव अंदर लटका हुआ मिला. कोतवाली स्टेशन हाउस ऑफ़िसर कुंदन सिंह राणा ने बताया कि शव को कब्ज़े में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. मामले की जांच चल रही है.
क्या था निठारी कांड?
निठारी कांड भारत के इतिहास के सबसे वीभत्स और जघन्य अपराधों में से एक था. यह घटना दिसंबर 2006 में तब सामने आई जब उत्तर प्रदेश के नोएडा (सेक्टर-31) स्थित निठारी गांव में व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी के पीछे एक नाले से 19 बच्चों और महिलाओं के नरकंकाल और अवशेष बरामद हुए. इस मामले में कोठी के मालिक पंढेर और उसके घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली को मुख्य आरोपी बनाया गया. जांच में सामने आया कि कोली बच्चों को टॉफी और चॉकलेट का लालच देकर घर के अंदर बुलाता था, जहां उनके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म, हत्या और शवों के टुकड़े करने जैसी अमानवीय क्रूरता की जाती थी.
सीबीआई ने इस मामले में दोनों के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज किए और निचली अदालतों ने उन्हें मौत की सजा भी सुनाई. हालांकि, पुख्ता सबूतों के अभाव और जांच की कमियों के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया था. इसके बाद, नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सुरेंद्र कोली को सभी मामलों से बरी करते हुए उसकी रिहाई के आदेश जारी किए. जेल से छूटने के बाद कोली हरिद्वार में चाय की दुकान चलाने लगा था, जहां उसने 18 सितंबर को संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली.
News Source: PTI
