Lebanon-Israel: इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच सीज़फ़ायर लागू होने के दो महीने बाद भी लेबनान के दक्षिण में स्थित अली ताहिर पहाड़ी पर भीषण लड़ाई जारी है. जून में हुए एक समझौते के तहत देश के बाकी हिस्सों में शांति है, लेकिन नबातियेह शहर के पास मौजूद यह रणनीतिक पहाड़ी दोनों पक्षों के बीच नए टकराव का केंद्र बन गई है. हाल के हफ्तों में, इस इलाके में इज़राइली सेना द्वारा रोज़ाना गोलाबारी और हवाई हमले किए जा रहे हैं. इसके जवाब में, ईरान समर्थित चरमपंथी गुट हिज़्बुल्लाह ने भी इज़राइली बलों पर कई ड्रोन हमले किए हैं.
पहाड़ी पर नियंत्रण को लेकर दोनों पक्षों में तनाव
इस संघर्ष की मुख्य वजह पहाड़ी पर नियंत्रण को लेकर जारी गतिरोध है. इस शांति समझौते में मध्यस्थता कर रहे अमेरिका की योजना थी कि हिज़्बुल्लाह इस रणनीतिक पहाड़ी को लेबनानी सेना के हवाले कर दे. यह कदम चरमपंथी गुट के हथियारों को ज़ब्त करने और उसके सैन्य ढांचे को खत्म करने की एक व्यापक योजना का हिस्सा था. समझौते के तहत यह तय हुआ था कि जैसे ही हिज़्बुल्लाह के हथियार ज़ब्त होंगे, इज़राइली सेना लेबनान से पूरी तरह हट जाएगी.
हिज्बुल्लाह ने अमेरिकी मांग को किया खारिज
हालांकि, हिज़्बुल्लाह इस बातचीत का सीधा हिस्सा नहीं था और उसने लिटानी नदी के उत्तर में स्थित इस क्षेत्र में अपने हथियार छोड़ने या पहाड़ी खाली करने की अमेरिकी मांग को सिरे से खारिज कर दिया है. अली ताहिर पहाड़ी पर जारी यह ज़बरदस्त लड़ाई बेहद संवेदनशील मोड़ पर है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस मोर्चे पर बढ़ता तनाव पूरे लेबनान में फिर से व्यापक संघर्ष को भड़का सकता है. इसके अलावा, लेबनान में बढ़ती अशांति के कारण ईरान और क्षेत्र में युद्ध को पूरी तरह सुलझाने के अंतरराष्ट्रीय प्रयास और अधिक जटिल हो सकते हैं.

नबातियेह शहर के पास स्थित है अली ताहिर पहाड़ी
जून में लेबनान और इज़राइल के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें कहा गया था कि जैसे ही हिज़्बुल्लाह के हथियार ज़ब्त कर लिए जाएंगे, इज़राइल लेबनान से हट जाएगा. यह चरमपंथी गुट बातचीत में शामिल नहीं था और उसने लिटानी नदी के उत्तर वाले इलाकों में हथियार छोड़ने की मांगों को ठुकरा दिया है. अली ताहिर पहाड़ी इसी इलाके में है. नबातियेह शहर के पास इस पहाड़ी को लेकर होने वाली ज़बरदस्त लड़ाई पूरे देश में संघर्ष को बढ़ा सकती है. लेबनान में अशांति के कारण ईरान में युद्ध को सुलझाने की कोशिशें और मुश्किल हो सकती हैं.
मध्य पूर्व में एक साथ कई मोर्चों पर घमासान! ईरान के पायलटों से लेकर होर्मुज और लेबनान तक बढ़ा तनाव
इजराइल का अली ताहिर पर नियंत्रण का दावा
गुरुवार रात इज़राइली सेना ने घोषणा की कि उसने अली ताहिर और उसके नीचे बने सुरंगों के नेटवर्क पर ऑपरेशनल कंट्रोल (सैन्य नियंत्रण) हासिल कर लिया है. हिज़्बुल्लाह इन सुरंगों का इस्तेमाल अपने लड़ाकों और हथियारों को छिपाने के लिए करता है. यह साफ़ नहीं है कि इज़राइल का नियंत्रण किस हद तक है. लेबनान के सरकारी मीडिया के अनुसार, इज़राइल की घोषणा से ठीक पहले भी उसकी वायु सेना पहाड़ी को निशाना बना रही थी.
इज़राइल की घोषणा के बाद से हिज़्बुल्लाह की तरफ़ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
हिज्बुल्लाह ने लेबनान सरकार का ठुकराया प्रस्ताव
हिज़्बुल्लाह ने लेबनान सरकार के उस प्रस्ताव को सख्ती से ठुकरा दिया जिसमें अली ताहिर को देश की सेना को सौंपने की बात कही गई थी. उसे डर है कि अगर ऐसा हुआ तो इज़राइल लेबनान की सेना से उस पहाड़ी का कंट्रोल छीन लेगा और फिर और ज़्यादा इलाका सौंपने की मांग करेगा. यह पहाड़ी रणनीतिक रूप से बहुत अहम है क्योंकि यहां से कई गांवों और नबातिह जाने वाली मुख्य सड़कों पर नज़र रखी जा सकती है. इस पर से पूरा कंट्रोल खोने से उस इलाके में हिज़्बुल्लाह की मौजूदगी और सप्लाई लाइन पर असर पड़ेगा. इज़राइली सेना का कहना है कि यह जगह हिज़्बुल्लाह के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि उसने ईरान से मिले फंड से वहां सुरंगें बनाई थीं.
इजराइल के दावे को हिज्बुल्लाह ने बताया गलत
इज़राइल ने गुरुवार को अपने बयान में कहा कि पहाड़ी के नीचे कमांड सेंटर, हथियार रखने के कमरे, जनरेटर, रहने की जगह, शॉवर और किचन बने हुए थे. इज़राइल ने कहा कि उसने अली ताहिर को हिज़्बुल्लाह लड़ाकों से खाली करा लिया है और ज़मीन के नीचे बने इंफ्रास्ट्रक्चर साइट्स को खत्म करने का काम कर रहा है. रूस के सरकारी न्यूज़ आउटलेट ‘स्पुतनिक’ की अरबी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, हिज़्बुल्लाह के सांसद इहाब हमदेह ने सवाल उठाया कि अगर इज़राइली सेना का उस इलाके पर सच में कंट्रोल है, तो वह अभी भी पहाड़ी पर हमला क्यों कर रही है. शुक्रवार को पास के गांव ‘कफ़र रुम्मान’ गए एसोसिएटेड प्रेस के एक फ़ोटोग्राफ़र को पहाड़ी पर इज़राइली सेना की मौजूदगी का कोई निशान नहीं दिखा. यह पहाड़ी, जिसके ऊपर एक मुस्लिम विद्वान का मज़ार है, लिटानी नदी के उत्तर में स्थित है. यह नदी उस इलाके की असल सीमा बन गई है जिस पर इज़राइल ने मार्च की शुरुआत में हिज़्बुल्लाह के साथ अपनी हालिया लड़ाई शुरू होने के बाद कब्ज़ा किया है.

हाल के हफ्तों में लड़ाई हुई तेज
दुनिया भर में संघर्षों पर नजर रखने वाले अमेरिकी ग्रुप ‘आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा प्रोजेक्ट’ (ACLED) के मिडिल ईस्ट रिसर्चर नासेर खदौर ने बताया कि इज़राइल जुलाई से अली ताहिर के आसपास मिलिट्री ऑपरेशन चला रहा है. हिज़्बुल्लाह के अधिकारी महमूद क़माती ने अगस्त के आखिर में एक लेबनानी पॉडकास्टर को बताया कि ग्रुप के लड़ाके अली ताहिर पर कब्ज़ा करने की इज़राइली सेना की कोशिशों को नाकाम कर रहे थे. लेकिन उन्होंने और दूसरों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अगर इज़राइल इस जगह पर कब्ज़ा कर भी लेता है, तो भी इसका बहुत ज़्यादा महत्व नहीं होगा. क़माती ने कहा कि अली ताहिर अहम है, लेकिन अगर यह हाथ से निकल भी जाए, तो इसका मतलब हिज़्बुल्लाह का अंत नहीं है. अगस्त के बीच में, इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान में कई हवाई हमले किए.
West Asia: पायलटों के बंधक पर कतर-ईरान में तल्खी, लेबनान में इजरायली हमले में मारे गए 11 लोग
हिज्बुल्लाह के ड्रोन हमले के जवाब में हमला
इज़राइल ने कहा कि ये हमले अली ताहिर पर हिज़्बुल्लाह के ड्रोन हमले के जवाब में किए गए थे, जिसमें तीन सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गए थे. इन इज़राइली हमलों में 11 लोग मारे गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे. जून के आखिर में अमेरिका की मध्यस्थता से हुए सीज़फायर (युद्धविराम) के लागू होने के बाद से ये सबसे घातक हमले थे. 27 अगस्त को इज़राइल ने कई हवाई हमले किए, जिनमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और छह घायल हो गए. सेना ने बताया कि हिज़्बुल्लाह ने इलाके में इज़राइली सैनिकों पर दो विस्फोटक ड्रोन दागे थे. हिज़्बुल्लाह ने इनमें से किसी भी हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली.
रोम में मिलेंगे लेबनान और इजराइल के अधिकारी
लेबनान के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर तारेक मित्री ने अगस्त के आखिर में एक अरब टीवी चैनल को बताया कि लेबनानी सेना अली ताहिर का कंट्रोल लेने के लिए तैयार थी. उन्होंने आरोप लगाया कि 27 अक्टूबर को होने वाले इज़राइली नेशनल इलेक्शन से पहले, इज़राइल ने अपने राजनीतिक कारणों से सेना को रोक दिया. उन्होंने कहा कि समस्या लेबनानी सेना की तैयारी में नहीं, बल्कि इज़राइल के रुख में है. लेबनान और इज़राइल के अधिकारी इस महीने के आखिर में रोम में बातचीत के लिए मिलने वाले हैं. इस बीच, हिज़्बुल्लाह, जिसने हमेशा अमेरिका से सीधे बात करने से इनकार किया है, 2024 से इज़राइल के साथ युद्ध में हुए बड़े नुकसान के बाद अपनी पॉलिसी बदलता हुआ दिख रहा है.
अमेरिका बातचीत के लिए तैयार
लेबनान के एक अधिकारी ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि अमेरिका और हिज़्बुल्लाह के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क चल रहा है, लेकिन उन्होंने कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया. नियमों के मुताबिक, उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर यह बात कही. लेबनान में अमेरिकी राजदूत मिशेल इस्सा ने हाल ही में कहा कि अगर हिज़्बुल्लाह हथियार छोड़ने को तैयार हो, तो वॉशिंगटन उससे बात करने को तैयार है. फिर भी, इस बात की संभावना कम है कि हिज़्बुल्लाह अपने मुख्य समर्थक ईरान की मंज़ूरी के बिना अमेरिका के साथ बातचीत की दिशा में कोई कदम उठाएगा. हालांकि युद्ध को लेकर अमेरिका के साथ बातचीत रुकी हुई है, लेकिन ईरान ने गारंटी मांगी है कि किसी भी स्थायी समझौते के तहत इज़राइल हिज़्बुल्लाह पर हमले बंद कर देगा.

कब्जा होने से इजराइली सेना की पहुंच होगी आसान
इज़राइली सेना का अली ताहिर पर कब्ज़ा होने से नबातिह का रास्ता खुल जाएगा और पास के ‘एप्पल प्रोविंस’ और रिहान पहाड़ तक भी पहुंच आसान हो जाएगी, जहां हिज़्बुल्लाह 1990 के दशक के आखिर से अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है. इज़राइली नेताओं ने बार-बार कहा है कि वे लेबनान में अपनी सेना बनाए रखेंगे और हिज़्बुल्लाह के हथियार छोड़ने तक उस पर सैन्य दबाव बढ़ाते रहेंगे. ACLED के खदौर ने कहा कि इस इलाके पर इज़राइल का कब्ज़ा हिज़्बुल्लाह के लिए एक ऑपरेशनल और सैन्य झटका है. उन्होंने कहा कि इन जगहों को खाली कराने से इज़राइल को अपने देश के उत्तरी हिस्से में बसे कस्बों की सुरक्षा करने में मदद मिलेगी और हिज़्बुल्लाह पर दबाव भी बढ़ेगा. खदौर ने कहा कि इससे सेना की वापसी को लेकर भविष्य में होने वाली किसी भी बातचीत में इज़राइल की स्थिति मज़बूत होगी.
PM मोदी और पेजेशकियन की मीटिंग से भड़का US, रूबियो बोले- ईरान संग डील की तो बैन…
