Student Hostel: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को महिला छात्रों के लिए हॉस्टल की कमी का मुद्दा उठाया और मोदी से इस समस्या के बारे में जवाब मांगा. सरकार को घेरने के लिए गांधी ने शनिवार को इंदौर में अपने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान एक छात्रा की बात का ज़िक्र किया. गांधी ने उस बातचीत को याद करते हुए कहा कि सरकार के पास दीये जलाने के लिए तो पैसे हैं लेकिन हमारे हॉस्टल के लिए क्यों नहीं? कल इंदौर में एक छात्रा ने मुझसे यह सवाल पूछा. वह पढ़ाई करने के लिए गांव से शहर आई थी.
मोदी सरकार पर सीधा वार
गांधी ने कहा कि कोई हॉस्टल नहीं है, इसलिए उसे PG में रहना पड़ता है. सिर्फ़ सुरक्षित रहने के लिए लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं. हर महीने किराए की चिंता और बेघर होने का डर, इन सबके बीच उसे पढ़ाई करनी पड़ती है. लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि इसी वजह से कई लड़कियां अपनी पढ़ाई छोड़ देती हैं क्योंकि उनके पास रहने की जगह नहीं होती. कहा कि नरेंद्र मोदी जी – क्या आपके पास उस छोटी बच्ची के सवाल का कोई जवाब है? कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि PR इवेंट्स, डिज़ाइनर कपड़े, लग्ज़री कारें, हवाई जहाज़, स्किनकेयर. मोदी के पास हर चीज़ के लिए पैसा है, सिवाय भारत के युवाओं की शिक्षा के.
कांग्रेस ने व्यवस्था पर उठाए सवाल
कहा कि कोई सही इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं. कोई अच्छे टीचर नहीं. कोई ट्रेनिंग नहीं. कोई हॉस्टल नहीं. कोई नौकरी नहीं. इस समय, उनकी डिग्री की असलियत लगभग बेमानी है. शिक्षा के प्रति उनकी बेरुखी बताती है कि वे कितने पढ़े-लिखे हैं. गांधी ने शनिवार को आरोप लगाया था कि एक सड़े-गले सिस्टम ने, खासकर शिक्षा के क्षेत्र में, देश पर कब्ज़ा कर लिया है और वह नहीं चाहता कि छात्र सवाल पूछें. इसके बजाय वह चाहता है कि अंधभक्त उसके नैरेटिव और नफ़रत को फैलाएं. ये बातें इंदौर में गांधी के युवाओं से जुड़ने के कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ के पांचवें एडिशन में कहीं गईं.
सवाल पूछने वाले छात्र सिस्टम के लिए चुनौती
इंदौर बीजेपी का गढ़ है. यहां उन्होंने ‘सिस्टम बनाम छात्र’ विषय पर बात की और ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) और दूसरे युवा प्रतिभागियों के साथ शिक्षा, भर्ती और रोज़गार के मुद्दों पर चर्चा की. गांधी ने इंदौर में कहा कि सिस्टम छात्रों से डरता है क्योंकि छात्र सवाल पूछते हैं. सिस्टम को छात्र नहीं चाहिए, उसे ‘अंधभक्त’ चाहिए. उन्होंने कहा कि छात्र जिज्ञासु होते हैं, वे अथॉरिटी से सवाल करते हैं और संस्थानों के कामकाज, भर्ती, परीक्षाओं और अवसरों के बारे में जवाब मांगते हैं, जबकि अंधभक्तों में इन गुणों की कमी होती है और वे इसके बजाय नफ़रत फैलाते हैं. गांधी ने कहा कि छात्र इस सिस्टम के लिए चुनौती पेश करते हैं क्योंकि वे जिज्ञासु बने रहते हैं और अपने आस-पास हो रही घटनाओं पर सवाल उठाते हैं.
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News Source: PTI
