Arnab Cyclone in Odisha: बंगाल की खाड़ी में बने ‘अर्नब’ चक्रवात ने बीते बुधवार को आंध्र प्रदेश में तबाही मचाई. अब यह तूफान कमजोर होकर उत्तर की ओर बढ़ रहा है, जिसका व्यापक असर ओडिशा के गजपति जिले में देखने को मिला है. बुधवार से हो रही लगातार बारिश के कारण महेंद्रतनया नदी बेसिन में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है. गोशानी ब्लॉक के बाघासाला, भिननाला और बापूजी पेइंथ सहित कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे जिले में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है.
नदी-नालों का जलस्तर बढ़ा, खेत डूबे
लगातार बारिश के चलते नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे कई जगहों पर खेत जलमग्न हो गए हैं और पानी गांवों में भी घुस गया है. गोशानी ब्लॉक के कुछ हिस्सों में जलभराव की स्थिति काफी गंभीर है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है. इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को चक्रवात ‘अरनाब’ से प्रभावित राज्यों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) बचाव और राहत कार्यों में जुटे हुए हैं.
इन राज्यों में चक्रवात का असर
एक्स पर एक पोस्ट में, शाह ने कहा कि उन्होंने आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से बात की है. उन्होंने उन्हें भरोसा दिलाया कि आपदा से प्रभावित लोगों की कठिनाइयों को कम करने के लिए हर संभव मदद दी जाएगी. शाह ने कहा, “चक्रवात ‘अर्नब’ के मद्देनजर, मैंने आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से बात की है. मैंने उन्हें आश्वासन दिया है कि आपदा का सामना कर रहे लोगों की परेशानियों को कम करने के लिए हर तरह की मदद उपलब्ध कराई जाएगी.” उन्होंने आगे कहा, “NDRF और SDRF की टीमें सक्रिय हो गई हैं और युद्धस्तर पर बचाव व राहत कार्य चला रही हैं. आपदा के असर का आकलन करने और आगे की आवश्यक सहायता तय करने के लिए जल्द ही IMCT (अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीमें) भेजी जाएंगी. भारत सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ लोगों के साथ खड़ी है.”
ओडिशा और छत्तीसगढ़ के ऊपर चक्रवात का केंद्र
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा मौसम अपडेट के अनुसार, ‘बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान’ अरनाब के कमजोर पड़ने से बना ‘डीप डिप्रेशन’ (गहरा दबाव क्षेत्र), पिछले छह घंटों के दौरान लगभग उत्तर दिशा की ओर 22 किमी प्रति घंटे की गति से आगे बढ़ा और अब कमजोर होकर एक ‘डिप्रेशन’ (सामान्य दबाव क्षेत्र) में बदल गया है. गुरुवार सुबह 5:30 बजे यह सिस्टम दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे सटे दक्षिण ओडिशा के ऊपर, 19.0°N अक्षांश और 81.9°E देशांतर के पास केंद्रित था. यह छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से लगभग 20 किमी पश्चिम, ओडिशा के भवानीपटना से 170 किमी दक्षिण-पश्चिम, ओडिशा के तितलागढ़ से 210 किमी दक्षिण-पश्चिम, रायपुर से 250 किमी दक्षिण और ओडिशा के संबलपुर से 350 किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित था.
24 घंटे में और कमजोर होगा ‘अर्नब’
इस सिस्टम के लगभग उत्तर की ओर आगे बढ़ने और गुरुवार शाम, 29 अक्टूबर 2026 तक कमजोर होकर एक ‘वेल-मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया’ (स्पष्ट कम दबाव वाले क्षेत्र) में बदलने की संभावना है. रायपुर और संबलपुर में लगे डॉप्लर वेदर रडार के जरिए इस पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसके अलावा, बुधवार को इस क्षेत्र में ऊपरी वायुमंडल में बने चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) के प्रभाव से, दक्षिण अंडमान सागर और उसके आसपास के इलाकों में एक कम दबाव का क्षेत्र (लो-प्रेशर एरिया) बना है। इस सिस्टम के पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और अगले 24 घंटों के दौरान दक्षिण अंडमान सागर तथा उससे सटे अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ऊपर एक ‘वेल-मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया’ में तब्दील होने की संभावना है.
News Source: ANI
