PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 और 31 अक्टूबर को गुजरात के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे. इस दौरान 30 अक्टूबर को प्रधानमंत्री बनासकांठा जिले के भीलड़ी से बनास डेयरी की कुल 407.56 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे. इसके साथ ही थराद और राधनपुर में बनने वाले दो नए बायो-CNG प्लांट्स का ई-शिलान्यास भी करेंगे. इन परियोजनाओं से पशुपालन, डेयरी उद्योग, कृषि आधारित खाद्य प्रसंस्करण और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को नई गति मिलने की उम्मीद है.
पीएम मोदी इन परियोजनाओं का करेंगे लोकार्पण
प्रधानमंत्री जिन परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे, उनमें 324.77 करोड़ रुपये की लागत से भीलड़ी में निर्मित भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर (BBBRC), वाव-थराद जिले के सणादर में 51.65 करोड़ रुपये की लागत से तैयार फ्रेंच फ्राइज प्रोसेसिंग प्लांट और पालनपुर में 31.14 करोड़ रुपये की लागत से विकसित ऑटोमेटेड स्टोरेज एंड रिट्रीवल सिस्टम (ASRS) शामिल हैं. कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, विधानसभा अध्यक्ष और बनास डेयरी के चेयरमैन शंकरभाई चौधरी, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी समेत राज्य सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे.
डेयरी सहकारी क्षेत्र से नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह, गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) के प्रतिनिधि, विभिन्न दुग्ध संघों के पदाधिकारी और बनास डेयरी के प्रबंध निदेशक संग्राम चौधरी भी कार्यक्रम में शामिल होंगे. बनासकांठा जिले के दूध उत्पादक भी इस कार्यक्रम में भाग लेंगे.
324.77 करोड़ की लागत से बना पशु प्रजनन एवं अनुसंधान केंद्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भीलड़ी में 127 एकड़ क्षेत्र में निर्मित भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर (BBBRC) पशुपालकों को समर्पित करेंगे. 324.77 करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह केंद्र पशु प्रजनन के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) के रूप में कार्य करेगा. इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य पशुओं की आनुवंशिक गुणवत्ता में सुधार करना, उन्नत पशु प्रजनन तकनीकों को बढ़ावा देना और देश में पशुपालन क्षेत्र को वैज्ञानिक आधार पर मजबूत करना है. परियोजना को केंद्र सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत 38.83 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है. इसमें दो करोड़ रुपये के डोनर एनिमल्स भी शामिल हैं. केंद्र को नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) का तकनीकी सहयोग प्राप्त है. इसके अलावा, परियोजना को केंद्र सरकार की एनिमल हसबेंड्री इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (AHIDF) योजना के तहत मंजूरी दी गई है और नाबार्ड (NABARD) ने वित्तीय सहायता प्रदान की है. इस केंद्र के माध्यम से पशु प्रजनन और आनुवंशिक सुधार से संबंधित आधुनिक तकनीकों को प्रोत्साहन मिलेगा. इससे बेहतर नस्ल के पशुओं के विकास, पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने और पशुपालकों की आय में सुधार के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है.
सणादर में फ्रेंच फ्राइज प्रोसेसिंग प्लांट का लोकार्पण
बनास डेयरी ने वाव-थराद जिले के दियादर तालुका के सणादर में 51.65 करोड़ रुपये की लागत से फ्रेंच फ्राइज प्रोसेसिंग प्लांट विकसित किया है. प्रधानमंत्री इस परियोजना का ई-लोकार्पण करेंगे. यह प्लांट आलू के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. अप्रैल 2026 में इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता को दो टन प्रति घंटे से बढ़ाकर पांच टन प्रति घंटे करने का काम शुरू किया गया था. बनास डेयरी ने इस परियोजना के माध्यम से आलू उत्पादन से लेकर तैयार खाद्य उत्पादों तक की एकीकृत व्यवस्था विकसित की है. इसमें टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार होने वाले छोटे पौधों, खेतों में बीज उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज में आलू के भंडारण और अंत में फ्रेंच फ्राइज के उत्पादन तक की पूरी प्रक्रिया शामिल है. इस तरह की व्यवस्था किसानों को केवल कच्चे कृषि उत्पादों के उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उन्हें मूल्य संवर्धन की प्रक्रिया से जोड़ने में मदद करती है. आलू के प्रसंस्करण से किसानों को बाजार के नए अवसर मिल सकते हैं और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिल सकता है. बनास डेयरी का यह मॉडल सहकारी क्षेत्र में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण के एकीकरण का उदाहरण है. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और कृषि उत्पादों के व्यावसायिक उपयोग की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं.
पालनपुर में आधुनिक ऑटोमेटेड वेयरहाउसिंग सिस्टम
प्रधानमंत्री पालनपुर में 31.14 करोड़ रुपये की लागत से विकसित ऑटोमेटेड स्टोरेज एंड रिट्रीवल सिस्टम (ASRS) का भी ई-लोकार्पण करेंगे. यह एक आधुनिक, पूरी तरह स्वचालित भंडारण और सामग्री निकासी प्रणाली है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से अल्ट्रा हाई टेम्परेचर (UHT) दूध उत्पादों के भंडारण और उनकी आपूर्ति के प्रबंधन के लिए किया जाएगा. इस सुविधा में नौ मंजिल तक ऊंचे स्टील रैक बनाए गए हैं. इनमें एक साथ 11,000 पैलेट रखने की क्षमता है. स्वचालित तकनीक की मदद से उत्पादों को व्यवस्थित तरीके से स्टोर करने और जरूरत के अनुसार निकालने में मदद मिलेगी. इस परियोजना की एक प्रमुख विशेषता यह है कि बनास डेयरी ने इसे अपनी आंतरिक तकनीकी क्षमता के आधार पर विकसित किया है. इससे बाहरी तकनीक पर निर्भरता कम करने और लागत बचाने में मदद मिली है. इस व्यवस्था के माध्यम से दूध उत्पादों के भंडारण, ट्रैकिंग और डिस्पैच की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा. साथ ही इस मॉडल का उपयोग भविष्य में अन्य डेयरी उत्पादों के भंडारण के लिए भी किया जा सकता है. बनास डेयरी से जुड़े लगभग 4.18 लाख दूध उत्पादकों के सहकारी नेटवर्क को मजबूत करने और परिचालन दक्षता बढ़ाने की दिशा में भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर गुजरात में जलाए जाएंगे 88 लाख दीए, देशभर में होंगे खास कार्यक्रम
थराद और राधनपुर में दो नए बायो-CNG प्लांट्स का शिलान्यास
डेयरी क्षेत्र के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बनास डेयरी थराद और राधनपुर में दो नए बायो-CNG प्लांट स्थापित करेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 अक्टूबर को भीलड़ी से इन दोनों परियोजनाओं का ई-शिलान्यास करेंगे. इसमें प्रस्तावित प्लांट्स की क्षमता इस प्रकार है.
- थराद प्लांट: प्रतिदिन 75 मीट्रिक टन गोबर के प्रसंस्करण की क्षमता.
- राधनपुर प्लांट: प्रतिदिन 100 मीट्रिक टन गोबर के प्रसंस्करण की क्षमता.
इन प्लांट्स में पशुओं के गोबर का प्रसंस्करण करके बायो-CNG और जैविक खाद तैयार की जाएगी. इससे गोबर का उपयोग केवल अपशिष्ट के रूप में नहीं, बल्कि ऊर्जा और कृषि उपयोग के लिए मूल्यवान संसाधन के रूप में किया जा सकेगा. बनास डेयरी पहले से ही इस दिशा में काम कर रही है और उसके चार बायो-CNG प्लांट संचालित हैं. दो नए प्लांट्स के जुड़ने से गोबर आधारित स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खाद के उत्पादन का दायरा बढ़ेगा. इस व्यवस्था से पशुपालकों को गोबर के उपयोग के माध्यम से अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकते हैं. साथ ही जैविक खाद के उत्पादन से कृषि क्षेत्र को भी लाभ पहुंचने की संभावना है. बायो-CNG जैसे वैकल्पिक ईंधन का उत्पादन स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने के प्रयासों में योगदान दे सकता है.
स्वचालित वेयरहाउसिंग सिस्टम
बनास डेयरी की इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल दूध उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि पशुपालन, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स और स्वच्छ ऊर्जा को एक साथ जोड़ना है. पशु प्रजनन एवं अनुसंधान केंद्र के माध्यम से पशुधन की आनुवंशिक गुणवत्ता सुधारने, फ्रेंच फ्राइज प्लांट के जरिए कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन करने, स्वचालित वेयरहाउसिंग सिस्टम से भंडारण और आपूर्ति को आधुनिक बनाने तथा बायो-CNG प्लांट्स के माध्यम से गोबर का उपयोग ऊर्जा उत्पादन में करने की योजना है. इन परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर रोजगार, कृषि आधारित उद्योगों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के नए अवसर विकसित हो सकते हैं. हालांकि, इनका वास्तविक आर्थिक प्रभाव उत्पादन, बाजार की मांग, परिचालन लागत और किसानों तक होने वाले लाभ के वितरण पर निर्भर करेगा. कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात दौरे के दौरान बनास डेयरी की इन परियोजनाओं का लोकार्पण और नए बायो-CNG प्लांट्स का शिलान्यास उत्तर गुजरात के डेयरी और कृषि आधारित अर्थतंत्र के लिए महत्वपूर्ण कार्यक्रम होगा. इन पहलों के जरिए आधुनिक तकनीक, सहकारी व्यवस्था और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन को एक साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
गुजरात में दिल दहला देने वाली घटना: घर के बाहर खेल रहे मासूम को उठा ले गया तेंदुआ, मौत
