H-1B Visa Fee: अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को कोर्ट से एक और बड़ा झटका लगा है. कुछ समय पहले अमेरिका की एक अदालत ने ट्रंप के द्वारा दुनिया के तमाम देशों पर लगाए गए भारी टैरिफ को कम करके केवल 10 फीसदी कर दिया गया था. तब ट्रंप को इन दिनों में पहला झटका लगा था. अब कोर्ट से उन्हें एक और झटका लगा है. यह झटका H-1B वीजा को लेकर है.
जी हां, H-1B वीजा पर ट्रंप के द्वारा लगाई गई 1 लाख डॉलर (करीब 95 लाख 47 हजार 670 रुपये) की फीस को रद्द कर दिया गया है. सोमवार को एक संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन द्वारा उच्च कुशल श्रमिकों (highly skilled workers) के लिए एच-1बी वीजा पर लगाए गए एक लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को रद्द कर दिया. ट्रंप के इस फैसले को कोर्ट में कैलिफोर्निया और 19 अन्य राज्यों ने चुनौती दी थी. कोर्ट के फैसले से जहां अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को झटका लगा है, वहीं दुनिया के कई देशों के साथ भारतीयों को बड़ी राहत मिली है.
गैरकानूनी था एच-1बी पर लगाया गया शुल्क- कोर्ट
सोमवार को मैसाचुसेट्स के अमेरिकी जिला न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने फैसला सुनाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच-1बी आवेदनों के लिए लगाया गया 100000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क गैरकानूनी था क्योंकि इसे कांग्रेस (अमेरिकी संसद)की मंजूरी नहीं मिली थी.
अपने फैसले में न्यायाधीश सोरोकिन ने माना कि एक लाख अमेरिकी डॉलर का यह भुगतान एक अनधिकृत टैक्स की तरह था. प्रशासन ने इसे इमिग्रेशन एंड नेशनालिटी एक्ट के तहत एक “जुर्माना” कहा था. अदालत ने साफ किया कि टैक्स लगाने का अधिकार सिर्फ संसद (कांग्रेस) के पास है.
कैलिफोर्निया सहित 20 राज्यों ने दी थी चुनौती
बता दें कि ट्रंप के द्वारा एच-1बी आवेदनों के लिए 100000 अमेरिकी डॉलर के शुल्क को कोर्ट में चुनौती दी गई थी. वादी पक्ष की ओर से कैलिफोर्निया समेत कुल 20 डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने इस नीति को चुनौती दी थी. उन्होंने अस्पतालों और राज्य विश्वविद्यालयों जैसे सार्वजनिक क्षेत्रों को होने वाले भारी नुकसान का हवाला दिया था.
क्या है H-1B वीजा?
अमेरिकी सरकार H-1B वीजा के जरिए विदेशी प्रोफेशनल्स को अपने यहां नौकरी देती है. मतलब कि अगर आपको अमेरिका में नियम के तहत तय क्षेत्र में काम करना है तो आपको इसके लिए सबसे पहले H-1B वीजा लेना होगा. इसके लिए आपके पास संबंधित क्षेत्र में ग्रेजुएशन या जरूरी हाई डिग्री की योग्यता होनी चाहिए. आसान शब्दों में कहें तो H-1B वीजा उन विदेशी लोगों के लिए है जो अमेरिका में नौकरी करना चाहते हैं या कर रहे हैं.
फीस लागू कर व्हाइट हाउस ने क्या कहा था?
बता दें कि सितंबर 2025 में अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा के लिए आवेदन शुल्क को बढ़ाकर 1 लाख अमेरिकी डॉलर कर दिया था. इसे लागू होने के बाद व्हाइट हाउस के स्टाफ सचिव विल शार्फ ने कहा था, “सबसे अधिक दुरुपयोग की जाने वाली वीजा सिस्टम में से एक H-1B वीजा गैर-अप्रवासी वीजा प्रोग्राम है. इसका उद्देश्य उन हाई स्कील्ड प्रोफेशनल्स को अमेरिका आने का अनुमति देता है जो उन क्षेत्रों में काम करते हैं जहां अमेरिकी काम नहीं करते.”
उन्होंने आगे कहा था, “इस घोषणा से कंपनियों द्वारा H-1B वीजा के आवेदकों को प्रायोजित करने के लिए दी जाने वाली फीस बढ़कर 1 लाख डॉलर हो जाएगी. इससे यह सुनिश्चित होगा कि वे जिन लोगों को ला रहे हैं वे वास्तव में अत्यधिक कुशल हैं और उनकी जगह अमेरिकी कर्मचारी नहीं ले सकते. “
वीजा पर भारतीयों प्रोफेशनल्स को बड़ी राहत
बता दें कि H-1B वीजा के जरिए हजारों की संख्या में भारतीय अमेरिका में काम करते हैं और आगे भी करते जाएंगे. आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में H-1B वीजा के जरिए काम करने वालों में करीब 70 फीसदी से अधिक भारतीय हैं. मतलब कि H-1B वीजा को हासिल करने वाले सबसे अधिक भारतीय ही हैं, जो कंप्यूटिंग या आईटी क्षेत्र में काम करते हैं.
बीते सितंबर में ट्रंप के द्वारा H-1B वीजा के लिए एक लाख डॉलर की फीस लगाने से भारत सहित कई देशों के भी नागरिकों को झटका लगा था, जो इस वीजा के जरिए अमेरिका जाने और वहां काम करने की सोच रहे थे. अब कोर्ट ने ट्रंप की इस फीस नीति को गैरकानूनी बताकर रद्द कर दिया है.
एक्सपर्ट बताते हैं कि कोर्ट के इस फैसले से भारतीयों को बड़ी राहत मिली है. यह उन भारतीयों के लिए अच्छी खबर है, जो अमेरिका में H-1B वीजा के जरिए काम करने की सोच रहे थे. बता दें कि इस वीजा का सबसे अधिक इस्तेमाल टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और अमेजन जैसी दिग्गज टेक कंपनियां करती हैं. इसके जरिए वे भारतीयों को अमेरिका में अपने यहां नौकरी देती रही हैं. कोर्ट के इस फैसले से टेक क्षेत्र में अमेरिका में काम करने वाले भारतीयों को काफी बड़ी राहत मिली है.
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News Source: PTI
