Sheikh Hasina: बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की मुश्किलें बढ़ गई हैं. उन पर अंतरिम सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश का आरोप है.
Sheikh Hasina: बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की मुश्किलें बढ़ गई हैं. उन पर अंतरिम सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश का आरोप है. तख्तापलट की साजिश के आरोप में 21 जनवरी को हसीना पर आरोप तय किए जाएंगे. शेख हसीना समेत 285 लोगों पर मुकदमा चलाया जा रहा है. बांग्लादेश की एक अदालत ने सोमवार को अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और 285 अन्य लोगों के खिलाफ राजद्रोह के मामले में आरोप तय करने की तारीख 21 जनवरी निर्धारित की है. समाचार पोर्टल tbsnews.net के अनुसार, यह मामला इस आरोप से संबंधित है कि हसीना और अवामी लीग के कई सौ सदस्यों ने दिसंबर 2024 में ‘जॉय बांग्ला ब्रिगेड’ नामक एक समूह की आभासी बैठक में भाग लिया था, जिसके दौरान उन्होंने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश रची थी. यह समूह अवामी लीग और हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान की विरासत का प्रबल समर्थक है.
भारत में रह रही हैं हसीना
सुनवाई के बाद ढाका विशेष न्यायाधीश न्यायालय-9 के न्यायाधीश अब्दस सलाम ने हसीना और 285 अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय करने की तारीख 21 जनवरी निर्धारित की. हसीना 5 अगस्त 2024 को देशव्यापी छात्र-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन के बाद बांग्लादेश से आकर भारत में रह रही हैं. उसी वर्ष 8 अगस्त को यूनुस ने अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला. यह मामला पिछले वर्ष मार्च में आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) द्वारा दर्ज किया गया था, जिसने 30 जुलाई को 286 आरोपियों के नाम पर आरोप पत्र प्रस्तुत किया. अदालत ने 14 अगस्त को आरोप पत्र स्वीकार कर लिया और आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए. 11 सितंबर को यात्रा प्रतिबंध लगाया गया, जबकि 14 अक्टूबर को अदालत ने समाचार पत्रों में नोटिस प्रकाशित करने का आदेश दिया, जिसमें हसीना सहित 261 फरार आरोपियों को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया.
सुनाई जा चुकी है मौत की सजा
पिछले वर्ष नवंबर में मामले को सुनवाई के लिए तैयार पाए जाने के बाद ढाका मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट से ढाका मेट्रोपॉलिटन सेशंस जज कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था. पिछले साल छात्र-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों पर उनकी सरकार की क्रूर कार्रवाई के लिए मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप में एक विशेष न्यायाधिकरण द्वारा नवंबर में हसीना को उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई गई थी. शेख हसीना पिछले साल 5 अगस्त को अपनी बहन शेख रेहाना के साथ बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं. भारत से उन्हें लंदन जाना था, पर ब्रिटिश सरकार ने उन्हें इसके लिए अनुमति नहीं दी. ऐसे में भारत सरकार ने ही उन्हें शरण दी और तब से वह अपनी बहन के साथ भारत में सरकार के संरक्षण में ही रह रही हैं.
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