USA Court And Trump: अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर से बड़ा झटका लगा है. इस साल फरवरी में कोर्ट ने उनकी टैरिफ नीति को असंवैधानिक ठहराते हुए सभी देशों पर 10 फीसदी तक का टैरिफ लगाने का आदेश दिया था. ट्रंप ने अपनी मनमानी से भारत समेत दुनिया के कई देशों पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाए थे. अब एक बार फिर से कोर्ट ने ट्रंप को झटका दिया है. यह निराशा उन्हें आव्रजन संबंधी गिरफ्तारियों को लेकर लगी है. आइए जानते हैं पूरी खबर.
आव्रजन अदालतों में गिरफ्तारियों पर रोक- कोर्ट
आव्रजन संबंधी गिरफ्तारियों की बात करें तो यह उन प्रवासियों के खिलाफ की जाती है, जो किसी देश में अवैध रूप से या वीजा नियमों का उल्लंघन करके रहते हैं. ट्रंप ऐसे लोगों के खिलाफ अपना अभियान चला रखे थे और उनकी गिरफ्तारियां भी करा रहे थे. इस बीच अब ट्रंप को कोर्ट से झटका लगा है.
न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के एक कोर्ट के जज ने संघीय सरकार को आव्रजन अदालतों में गिरफ्तारियां करने से रोक दिया है. इसके साथ ही उस प्रथा को समाप्त करने का आदेश दिया है जो पिछले साल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पदभार संभालने के तुरंत बाद शुरू हो गई थी.
कोर्ट ने क्या कहा?
सैन फ्रांसिस्को के अमेरिकी जिला न्यायाधीश केसी पिट्स ने मंगलवार को लिखा कि आव्रजन अदालत में गिरफ्तारी के खिलाफ लंबे समय से चली आ रही नीति को ट्रंप प्रशासन द्वारा पलटने का परिणाम “केवल तर्कहीन निर्णय लेने से नहीं, बल्कि निर्णय लेने की पूर्ण कमी से हुआ.” अधिकारियों ने अदालती सुनवाई में लोगों की उपस्थिति पर गिरफ्तारी के “भयभीत करने वाले प्रभाव” को दूर करने में विफल रहे.
जज पिट्स ने अपने फैसले में लिखा, “80 वर्षों से, कांग्रेस ने संघीय एजेंसियों को कार्रवाई करने से पहले सोचने का आदेश दिया है.” उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रिया अधिनियम का जिक्र करते हुए कहा, जो 1946 का एक कानून है जिसके तहत संघीय एजेंसियों को अपनी कार्रवाई को उचित ठहराना आवश्यक है.
उन्होंने लिखा कि वह कानून किसी एजेंसी को वह विकल्प चुनने के लिए बाध्य नहीं करता जिसे समीक्षा न्यायालय बेहतर समझे. लेकिन यह मांग करता है कि एजेंसी कम से कम अपने चुने हुए मार्ग का अनुसरण करने के लिए ठोस कारण प्रदान करे.
कोर्ट के फैसले की आलोचना
जानकारी के अनुसार, यह फैसला मई के बाद से अदालती गिरफ्तारी के लिए दूसरा झटका है, जब न्यूयॉर्क में एक संघीय न्यायाधीश ने आव्रजन अदालतों में इस पर रोक लगा दी थी. वह आदेश केवल न्यूयॉर्क में लागू था, जबकि लेटेस्ट फैसले ने इस नीति को राष्ट्रव्यापी स्तर पर अमान्य कर दिया है.
वहीं, अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के जनरल काउंसल जेम्स पर्सीवल ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे न्यायिक हस्तक्षेप का एक उदाहरण बताया. उन्होंने ऑनलाइन लिखा, “जब कोई जज किसी प्रतिवादी को सजा सुनाता है, तो प्रतिवादी को हिरासत में ले लिया जाता है. यदि किसी आव्रजन न्यायाधीश द्वारा किसी विदेशी को निष्कासित करने का आदेश दिया जाता है, तो भी यही होना चाहिए.”
जेम्स पर्सीवल ने आगे कहा, “यदि कोई जिला न्यायाधीश इसके विपरीत आदेश देता है, तो यह अमेरिका विरोधी और खुली सीमाओं के एजेंडे के समर्थन में किया गया स्पष्ट न्यायिक सक्रियतावाद है.”
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News Source: PTI
