Home Latest News & Updates पंजाब की सियासत में एक मुलाकात और गठबंधन की अटकलें तेजः तीन दशक पुराना याराना होगा बहाल?

पंजाब की सियासत में एक मुलाकात और गठबंधन की अटकलें तेजः तीन दशक पुराना याराना होगा बहाल?

by Kamlesh Kumar Singh 8 August 2026, 4:58 PM IST
8 August 2026, 4:58 PM IST
पंजाब की सियासत में एक मुलाकात और गठबंधन की अटकलें तेजः बढ़ी हलचल, तीन दशक पुराना याराना होगा बहाल?

Punjab Politics: पंजाब में बीजेपी और अकाली दल के रिश्तों पर एक बार फिर से सियासी हलचल तेज हो गई है. इन अटकलों को शिरोमणि आकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल और पीएम मोदी के बीच हुई मुलाक़ात से और बल मिला है. गठबंधन की अटकलों के बीच सवाल है कि क्या पुराने साथी फिर साथ आने की तैयारी में हैं. SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शुक्रवार को मुलाक़ात की. सूत्रों के मुताबिक, बैठक में बीजेपी और अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन पर चर्चा हुई.

2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर हुए थे अलग

तीन दशक से ज्यादा पुराने ये साथी 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर अलग हुए थे. इसके बाद दोनों दलों ने 2022 का विधानसभा और 2024 का लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा. लेकिन अब चुनाव से पहले पुराने रिश्ते फिर चर्चा में हैं. बादल की पत्नी एवं सांसद हरसिमरत कौर ने इससे अनभिज्ञता जताई है. मुलाक़ात की टाइमिंग भी बड़ा सियासी संकेत दे रही है. सूत्रों के मुताबिक, सुखबीर बादल ने कुछ दिन पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री और पंजाब बीजेपी प्रभारी नायब सिंह सैनी से मुलाक़ात की थी. इसके बाद ही पीएम मोदी से मुलाक़ात का रास्ता बना यानी पहले पंजाब के प्रभारी से बातचीत फिर सीधे प्रधानमंत्री से मुलाक़ात. लेकिन कुछ समय पहले बीजेपी का रुख बिल्कुल अलग था.

केजरीवाल ने संभावित गठबंधन पर उठाए सवाल

अमित शाह के बयान से साफ था कि बीजेपी पंजाब में अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है. सिर्फ केंद्रीय नेतृत्व ही नहीं पंजाब बीजेपी अभी भी अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटी है यानी केंद्रीय नेतृत्व से लेकर प्रदेश संगठन तक. संदेश साफ था कि बीजेपी अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी. हालिया जालंधर रैली में पीएम मोदी ने भी अकाली दल पर निशाना साधा था. इन बयानों के बाद गठबंधन की संभावना लगभग खत्म मानी जा रही थी लेकिन सुखबीर बादल की पीएम से मुलाक़ात ने सियासी तस्वीर फिर बदल दी. आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने तंज कसते हुए लिखा कि ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे’. केजरीवाल ने बीजेपी और अकाली दल के संभावित गठबंधन पर सवाल भी उठाए.

एक-दूसरे की मजबूरी बने अकाली दल और बीजेपी

दरअसल, दोनों दलों के लिए गठबंधन का अपना-अपना गणित है. 2022 में अकाली दल को सिर्फ 3 और बीजेपी को 2 विधानसभा सीटें मिली थीं. 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी पंजाब में खाता नहीं खोल सकी, जबकि अकाली दल सिर्फ एक सीट जीत पाया यानी अलग-अलग लड़कर दोनों को बड़ा फायदा नहीं मिला. अब असली पेच है सीट शेयरिंग. पुराने फॉर्मूले में विधानसभा की 117 सीटों में अकाली दल 94 और बीजेपी 23 सीटों पर लड़ती थी. लेकिन अब बीजेपी पहले जैसी जूनियर पार्टनर बनने के मूड में नहीं है.

सीटों का गणित सबसे बड़ी चुनौती

सूत्रों के मुताबिक, अकाली दल करीब 35 सीटें बीजेपी को देने को तैयार है यानी अगर गठबंधन हुआ तो सीटों का गणित सबसे बड़ी चुनौती होगा. तो क्या बीजेपी और अकाली दल फिर साथ आएंगे? अभी गठबंधन तय नहीं है लेकिन बातचीत का दरवाजा जरूर खुल गया है. एक तरफ अमित शाह का अकेले चुनाव लड़ने का बयान. पंजाब बीजेपी का 117 सीटों पर अकेले लड़ने का दावा. पीएम मोदी का अकाली दल पर हमला और दूसरी तरफ सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री से मुलाक़ात यानी पंजाब में सियासी समीकरण बदलने की आहट है. अब देखना होगा ये मुलाक़ात सिर्फ मुलाक़ात रहती है या तीन दशक पुराने गठबंधन की कहानी एक बार फिर नए सियासी अध्याय के साथ शुरू होती है.

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