E20 Petrol : E20 पेट्रोल में नमी और क्लोराइड के बारे में हालिया मीडिया रिपोर्टों के बीच OMC ने पूरी EBMS सप्लाई चेन में गहन जांच की. इसके नतीजों में पाया गया कि ईंधन की गुणवत्ता तय सीमाओं के भीतर ही बनी हुई है. कुछ दावों के विपरीत, वैज्ञानिक रूप से डिजाइन किए गए टेस्ट के जरिए की गई व्यापक रैंडम टेस्टिंग से पता चलता है कि ईंधन में मिलावट को लेकर चिंता करने की कोई बात नहीं है.
तुरंत किया जाता है समाधान
OMCs अपने सभी सम्मानित ग्राहकों को भरोसा दिलाना चाहते हैं कि हम ईंधन की गुणवत्ता को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता देते हैं. गाड़ी की परफॉर्मेंस या ग्राहकों के भरोसे पर असर डालने वाली किसी भी समस्या का वैज्ञानिक जांच और सुधारात्मक कार्रवाई के जरिए तुरंत समाधान किया जाता है.
भारत सरकार ने पेट्रोल में मिलाने के लिए इस्तेमाल होने वाले इथेनॉल के लिए क्लोराइड की सख्त सीमा तय की है और पूरी सप्लाई चेन में इसके पालन को सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी का सिस्टम बनाया है. सप्लाई चेन के कई पॉइंट्स पर क्लोराइड की निगरानी की जा रही है, जिसमें रिफाइनरी, डिस्टिलरी, डिपो/टर्मिनल और देश भर के रिटेल आउटलेट शामिल हैं. इससे पुष्टि होती है कि पूरी सप्लाई चेन में गुणवत्ता लगातार बनाए रखी जा रही है.
कई स्तरों पर की गई जांच
पहले से मौजूद क्वालिटी एश्योरेंस प्रोटोकॉल के अलावा, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने हर रिटेल आउटलेट पर दिन में 8-12 बार पानी के प्रवेश और घनत्व (डेंसिटी) की जांच करके निगरानी को और मजबूत किया है. अलग-अलग जगहों पर मोबाइल फ्यूल क्वालिटी टेस्टिंग लैब भी तैनात की गई हैं और क्वालिटी एश्योरेंस के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के लिए फ्यूल लैब के जरिए टेस्ट के नतीजों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा रही है. पूरी सप्लाई चेन में टेस्टिंग के इन कई स्तरों वाले और मज़बूत प्रोटोकॉल ने हमारे ईंधन की गुणवत्ता के उच्चतम मानकों की पुष्टि की है.
पेट्रोल में क्लोराइड का असल स्तर 1 ppm से काफी कम है
विभिन्न रिफाइनरियों से रैंडम तरीके से चुने गए 100 से ज्यादा पेट्रोल सैंपल की जांच से पुष्टि होती है कि क्लोराइड की मात्रा लगातार कम बनी हुई है. सभी सैंपल में यह मात्रा 1 ppm या उससे कम पाई गई. यह भारत की मजबूत रिफाइनिंग और डिस्पैच प्रक्रिया में शामिल क्वालिटी चेक की लगातार प्रभावशीलता को दर्शाता है.
डिस्टिलरी से शुद्ध इथेनॉल
डिस्टिलरी से सप्लाई किए जाने वाले इथेनॉल, जो ब्लेंडिंग का मुख्य हिस्सा है. वह क्लोराइड का स्तर तय सीमा से काफी कम पाया गया है, जो उत्पादन के चरण में मजबूत क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम को दर्शाता है. OMC और CHT के सदस्यों वाली एक खास टास्क फोर्स ने पिछले 10 दिनों में देश भर की 80 डिस्टिलरी से इथेनॉल के सैंपल की जांच की है और सभी सैंपल में क्लोराइड की मात्रा 3 ppm से कम पाई गई है.
E20 सैंपल तय क्लोराइड लिमिट के अंदर पाए गए
डिपो और टर्मिनल पर टेस्ट किए गए इथेनॉल और E20 सैंपल तय क्लोराइड लिमिट के अंदर पाए गए हैं. इस स्टेज पर रेगुलर मॉनिटरिंग से यह पक्का किया जाता है कि स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से गुजरते समय फ्यूल की क्वालिटी बनी रहे. देश भर में अलग-अलग OMC टर्मिनल से लिए गए 80 से ज़्यादा सैंपल में क्लोराइड की मात्रा 3 ppm से कम पाई गई.
160 टेस्ट रिपोर्ट का एनालिसिस किया गया
1000 से ज़्यादा सैंपल की कड़ी मॉनिटरिंग के तहत पिछले कुछ दिनों में क्लोराइड की मात्रा के लिए 160 टेस्ट रिपोर्ट का एनालिसिस किया गया है और लेवल 0-3 ppm की रेंज में हैं, जबकि कई सौ PPM होने का दावा किया जा रहा था. सर्विलांस सिस्टम ने सिर्फ चार ऐसे मामले पहचाने जिनमें क्लोराइड का लेवल ज्यादा पाया गया. इन मामलों में तुरंत सप्लाई रोक दी गई और सप्लाई फिर से शुरू करने से पहले समस्या की जड़ का पता लगाने के लिए डिटेल में एनालिसिस किया गया और जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए गए.
पानी के घुसने की टेस्टिंग
लगभग 90,000 RO ने अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक का जरूरी इंस्पेक्शन और मॉनिटरिंग शुरू कर दिया है. RO पर अंडरग्राउंड टैंक का हर दिन 8-12 बार इंस्पेक्शन किया जा रहा है और अब तक कहीं भी पानी घुसने का कोई मामला सामने नहीं आया है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियां ग्राहकों को भरोसा दिलाना चाहती हैं कि फ्यूल की क्वालिटी उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है. पूरी सप्लाई चेन में लगातार क्वालिटी की निगरानी की जाती है और जहां भी कोई कमी या गड़बड़ी पाई जाती है. वहां तुरंत और ठोस सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं.
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