UNGA81: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार (25 सितंबर) को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के हाई-लेवल सेशन के दौरान कई अहम द्विपक्षीय बैठकें कीं. इस दौरान उन्होंने आर्मेनिया, बारबाडोस और इराक के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की. इसके अलावा उन्होंने पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो से भी मुलाकात की. एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए इन बैठकों की जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि बैठकों के दौरान द्विपक्षीय सहयोग, क्षेत्रीय घटनाक्रम और व्यापक अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई. आर्मेनिया के विदेश मंत्री अरारत मिर्जोयान से मुलाकात के बाद जयशंकर ने एक्स पर लिखा कि अरारत मिर्जोयान से मिलकर अच्छा लगा. दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई.

क्षेत्रीय घटनाक्रम और सहयोग पर हुई चर्चा
विदेश मंत्री ने बारबाडोस के विदेश मंत्री क्रिस्टोफर पीटर सिंकलर के साथ भी बैठक की. जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट किया, जिसमें लिखा कि बारबाडोस के विदेश मंत्री क्रिस्टोफर पीटर सिंकलर के साथ संक्षिप्त बातचीत. इराक के साथ जयशंकर की बातचीत मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और बगदाद के साथ भारत के आर्थिक और ऊर्जा सहयोग पर केंद्रित रही. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में इराक के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री फुआद हुसैन से मिलकर बहुत खुशी हुई. पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर विचारों का आदान-प्रदान किया. साथ ही हमारे आर्थिक और ऊर्जा संबंधों पर भी चर्चा की. विदेश मंत्री ने UNGA कार्यक्रमों के दौरान पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो से भी मुलाकात की. जयशंकर ने कहा कि पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो से मिलकर सौभाग्य महसूस हुआ. ये हालिया बैठकें UNGA के दौरान जयशंकर की व्यापक कूटनीतिक गतिविधियों का हिस्सा हैं, जिसमें उन्होंने कई क्षेत्रों के नेताओं और विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय घटनाक्रम और बहुपक्षीय सहयोग पर चर्चा की. दिन की शुरुआत में जयशंकर ने एंटीगुआ और बारबुडा के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन के साथ बैठक करके अपने UNGA81 कार्यक्रमों के चौथे दिन की शुरुआत की.
UNGA-81 में विभिन्न विषयों को किया गया शामिल
जयशंकर ने अपनी पोस्ट में बताया कि उन्होंने UNGA81 के चौथे दिन की शुरुआत एंटीगुआ और बारबुडा के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन के साथ बैठक से की. उन्होंने कहा कि ब्राउन के साथ बातचीत में भारत की विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. साथ ही उन्होंने कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट मीटिंग (CHOGM) की सफलता के लिए भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई.
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में UNOPS के प्रमुख जॉर्ज मोरेरा दा सिल्वा से भी मुलाकात की. उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में लॉजिस्टिक्स को सुगम बनाने में UNOPS के योगदान की सराहना की. इसके अलावा उन्होंने ब्रिटेन के विदेश सचिव एड मिलिबैंड के साथ भी बातचीत की. दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों और संघर्षों से उत्पन्न वैश्विक चुनौतियों, खासकर खाद्य और ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई. ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन के साथ बैठक के बाद जयशंकर ने कहा कि दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय घटनाक्रम और लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री से मिलकर उन्हें खुशी हुई और क्षेत्र के साथ-साथ दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को लेकर अच्छी बातचीत हुई.

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इन विदेश मंत्रियों से भी की मुलाकात
UNGA कार्यक्रमों के दौरान जयशंकर ने ऑस्ट्रेलियाई सीनेटर पेनी वोंग, उरुग्वे के राष्ट्रपति यामांडू ओर्सी, मालदीव की विदेश मंत्री इरुथिशम एडम, घाना के विदेश मंत्री सैमुअल ओकुद्ज़ेटो अबलाकवा, सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन और एस्टोनिया के विदेश मंत्री मार्गस त्साहकना से भी मुलाकात की. मालदीव की विदेश मंत्री इरुथिशम एडम के साथ उनकी चर्चा द्विपक्षीय संबंधों और बहुपक्षीय सहयोग पर केंद्रित थी, जबकि घाना के विदेश मंत्री के साथ बैठक में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी बात हुई. एस्टोनिया के विदेश मंत्री मार्गस त्साहकना के साथ जयशंकर ने यूक्रेन संघर्ष और बहुपक्षीय सहयोग पर चर्चा की. बैठकों का यह सिलसिला UNGA81 में भारत की व्यापक राजनयिक सक्रियता को दर्शाता है.
संयुक्त राष्ट्र में ढांचागत बदलावों में देरी
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में ढांचागत बदलावों में देरी को लेकर दुनिया भर में बढ़ रही निराशा यह बताती है कि सुधार का विरोध करने वाले लोग इस संस्था का समर्थन करने के बजाय सिर्फ इसका फायदा उठा रहे हैं. गुरुवार को UN जनरल असेंबली के 81वें सत्र के दौरान ‘रप्चर्स एंड रैम्पार्ट्स: बिल्डिंग ब्रिजेस फ़ॉर ए चेंजिंग वर्ल्ड’ नाम के एक मंत्री-स्तरीय सत्र में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि संस्थागत बदलाव की सामूहिक इच्छा और तेज हो गई है. यह कार्यक्रम ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन, रिलायंस फ़ाउंडेशन, भारत में UN और UN में भारत के स्थायी मिशन ने आयोजित किया था. इसमें जमैका, सूरीनाम और घाना के विदेश मंत्रियों समेत कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने हिस्सा लिया. संस्थागत प्रगति में रुकावट डालने वाली प्रक्रियात्मक बाधाओं पर बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि निराशा इसलिए बढ़ रही है क्योंकि अगर हम सुधार को लेकर गंभीर हैं, तो हमें टेक्स्ट-आधारित बातचीत की जरूरत है. बिना टेक्स्ट के बातचीत नहीं हो सकती.

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समय के साथ न चलने वाली संस्था
जयशंकर ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि ढांचागत बदलाव की वकालत दुश्मनी के कारण नहीं, बल्कि संस्था के प्रति सच्ची निष्ठा के कारण की जाती है. उन्होंने आगे कहा कि असल में यही वह मुख्य बात है जिसके कारण लगता है कि UN में बदलाव होना चाहिए. UN को समय के साथ न चलने वाला माना जाता है. इसका मतलब UN-विरोधी होना नहीं है. असल में जो लोग UN की परवाह करते हैं, वे ही उसमें सुधार करना चाहते हैं. मेरा मानना है कि जो लोग सुधार का विरोध करते हैं, वे असल में UN की परवाह नहीं करते. उन्होंने आगे कहा कि वे UN का इस्तेमाल तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें UN की परवाह नहीं है. आज यह भावना बहुत मजबूत हो गई है. ठोस नतीजे पाने के लिए जरूरी प्रक्रियाओं पर बात करते हुए जयशंकर ने जोर दिया कि ‘सर्वसम्मति से सुधार नहीं हो सकता.’ उन्होंने समझाया कि ‘लोकतंत्र में यहां तक कि अपने देश में भी हम बहुमत या वोट के जरिए फैसले लेते हैं. यह लोकतांत्रिक तरीका है. इसलिए लोगों की अलग-अलग राय हो सकती है. हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए और फिर लोगों को वोट करना चाहिए. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक समाधान खोजने के लिए सभी नजरियों को एक ही दस्तावेज में लाना जरूरी है. ग्लोबल साउथ में हो रहे बदलावों पर बात करते हुए जयशंकर ने बताया कि विकासशील देशों में सहयोग करने और पुरानी निर्भरता से बाहर निकलने की इच्छा बढ़ रही है, जिससे एक से ज्यादा लोकतांत्रिक वैश्विक माहौल बन रहा है.
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इसके अलावा प्रशासनिक नेतृत्व पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि महिला SG (महासचिव) का विचार नीचे से ऊपर की ओर (bottom-up) जाने वाला विचार है, न कि ऊपर से नीचे आने वाला. ये बातें UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की उन व्यापक अपीलों से मेल खाती हैं, जिनमें उन्होंने आधुनिक भू-राजनीतिक स्थितियों को बेहतर ढंग से दर्शाने के लिए सुरक्षा परिषद के विस्तार का आग्रह किया है. नई दिल्ली 15-सदस्यीय परिषद (जिसमें पांच स्थायी और दस अस्थायी सदस्य शामिल हैं) में संरचनात्मक बदलावों की अपनी पुरानी मांग पर जोर देती रही है. साथ ही 2028-29 के कार्यकाल के लिए अस्थायी सीट के लिए भी अभियान चला रही है.

पाकिस्तान पत्रकार ने की परेशान करने की कोशिश
पाकिस्तानी पत्रकार की इस हरकत पर कड़ा रुख अपनाते हुए जयशंकर ने कहा कि एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है. यह कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही बता दिया गया था कि यह सिर्फ़ बयान देने वाली ब्रीफिंग होगी, लेकिन पाकिस्तानी पत्रकार ने आखिर में अचानक दखल दिया और बेतुका सवाल पूछकर परेशान करने की कोशिश की. जयशंकर ने आगे कहा कि लाइबेरिया गणराज्य की विदेश मंत्री सारा बेसोलो न्यंती के साथ मिलकर ‘शिपिंग और नाविकों की सुरक्षा’ पर ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ के बारे में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे. विदेश मंत्री न्यूयॉर्क में हैं और संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में ‘हाई लेवल वीक’ के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं. वह शनिवार को’हाई लेवल सेशन’ को संबोधित करेंगे. अपनी यात्रा के दौरान विदेश मंत्री ने कई बहुपक्षीय और द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लिया है. भारत ने लगातार पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ‘विश्वसनीय कार्रवाई’ करने को कहा है. पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था, जिसमें 26 आम नागरिक मारे गए थे.
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