S Jaishankar: ईरान और अमेरिका के बीच शांति प्रस्ताव की बात काफी आगे बढ़ चुकी है और जल्द ही इन दोनों देशों के बीच एक शांति समझौता हो सकता है. इसकी जानकारी और संकेत दोनों देशों ने दे दी है. इस शांति समझौते से पहले ईरान और अमेरिका के बीच हमले की एक नई दौर शुरू हुई थी.
इसी दौरान ओमान तट पर भारतीय क्रू वाले एक-दो नहीं बल्कि तीन जहाजों पर हमला किया गया था. ये हमले अमेरिकी सेना के द्वारा किए गए थे. इनमें से एक हमला वाणिज्यिक पोत सेट्टेबेलो पर भी किया गया था, जिसमें कुल 24 भारतीयों में से 3 की मौत हो गई थी.
हमले के कुछ देर तक इन तीनों की कोई सूचना नहीं थी और शुरुआती जांच में ये लापता बताए जा रहे थे, लेकिन कुछ घंटों के बाद इनकी मौत की पुष्टि हो गई थी. अब अमेरिकी हमले में तीन भारतीयों की मौत का मामला ग्लोबल स्तर पर तूल पकड़ चुका है. इस बीच देश के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने रुबियो को फोन पर इस मुद्दे को उठाया है. आइए जानते हैं पूरा मामला.
इस तरह की घातक कार्रवाई उचित नहीं- जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर अभी यूरोप के दौरे पर हैं. न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, शनिवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बात की. इस दौरान उन्होंने रुबियो के सामने ओमान की खाड़ी में एक व्यापारिक पोत पर अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठाया.
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा, “आज शाम मैंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात की. मैंने खाड़ी में अमेरिकी नौसेना द्वारा किए गए हमलों पर भारत के कड़े विरोध को दोहराया, जिसमें तीन भारतीय नौसैनिक मारे गए.” उन्होंने आगे कहा, “वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ इस तरह की घातक कार्रवाई उचित नहीं है.”
बता दें कि भारत ने शुक्रवार को चार्ज डी’अफेयर्स जेसन मीक्स को तलब किया और उनसे कहा कि ओमान के तट पर भारतीय चालक दल के सदस्यों वाले वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिकी सेना के घातक हमले अस्वीकार्य हैं.

तीन जहाजों पर हमला
जानकारी के अनुसार, 8 जून को अमेरिकी सेना ने पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर ‘मारिवेक्स’ को निशाना बनाया था. इस जहाज पर 24 भारतीय नाविक सवार थे. हालांकि, इस हमले में किसी की हताहत होने की कोई सूचना नहीं थी और सभी 24 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया था.
उसके बाद 10 जून को, अमेरिका ने पलाऊ ध्वज वाले एक अन्य टैंकर ‘सेट्टेबेलो’ पर हमला किया. इसमें भी 24 भारतीय नाविक सवार थे. बचाव कार्य हुआ तो 21 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था और तीन भारतीय चालक दल की मौत हो गई थी.
इस हमले के बाद भी अमेरिका नहीं माना और उसके बाद एक अन्य जहाज ‘जलवीर’ को भी निशाना बनाया. यह गिनी-बिसाऊ के ध्वज वाला टैंकर था और इसमें 20 भारतीय सवार थे. इस जहाज पर गुरुवार को हमला किया गया था. अमेरिका के द्वारा भारतीय क्रू वाले जहाजों पर लगातार हमले के बाद भारत ने अमेरिका से कड़ा विरोध जताया है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने क्या कहा था?
अमेरिका के द्वारा वाणिज्यिक पोत सेट्टेबेलो पर हमले की भारत ने कड़ी निंदा की थी. बुधवार को विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा था, “हम आज सुबह ओमान के तट पर वाणिज्यिक पोत सेट्टेबेलो पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हैं.” विदेश मंत्रालय ने कहा था कि ओमान स्थित भारतीय दूतावास स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और चल रहे सर्च रेस्क्यू ऑपरेशन में स्थानीय अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से समन्वय कर रहा है. विदेश मंत्रालय ने कहा था, “क्षेत्र में जहाजों पर हमलों की लगातार घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और ये क्षेत्र में चल रहे संघर्ष का सीधा परिणाम हैं.”
US ने फिर 24 भारतीय क्रू वाले जहाज को बनाया निशाना, 3 लापता; नई दिल्ली ने हमले का किया कड़ा विरोध
News Source: PTI
