Home Latest News & Updates बाढ़ की विभीषिका से तो बचे, लेकिन अब बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे नेपाल के हजारों नागरिक

बाढ़ की विभीषिका से तो बचे, लेकिन अब बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे नेपाल के हजारों नागरिक

by Sanjay Kumar Srivastava 30 August 2026, 6:30 PM IST
30 August 2026, 6:30 PM IST
बाढ़ की विभीषिका से तो बचे, लेकिन अब बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे नेपाल के हजारों नागरिक

Flood Relief Camp: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से बचे हजारों लोगों के लिए राहत शिविर अब नई मुसीबत का केंद्र बन गए हैं. रसुवा और नुवाकोट सहित विभिन्न इलाकों में बने अस्थायी शेल्टरों, स्कूलों और सामुदायिक भवनों में करीब 3,500 बेघर लोग रहने को मजबूर हैं. इन शिविरों में रह रहे पीड़ितों के पास उनकी नियमित और जरूरी दवाएं तक उपलब्ध नहीं हैं. बुनियादी सुविधाओं के नाम पर शेल्टरों में साफ पीने के पानी और बुनियादी साफ-सफाई की भारी किल्लत है. आपदा की मार झेल चुके ये लोग अब गंदे पानी और अस्वच्छ माहौल के कारण संक्रामक बीमारियों के बड़े खतरे का सामना कर रहे हैं.

अस्थायी शिविरों में पानी का संकट

रसुवा में तीन और नुवाकोट में 15 राहत कैंप बनाए गए हैं, जबकि लगभग 3,500 बेघर लोगों के लिए स्कूलों और सार्वजनिक व सामुदायिक इमारतों में अस्थायी रहने की व्यवस्था की गई है. 26 अगस्त को आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई है. रविवार तक मरने वालों की संख्या 750 से ज़्यादा हो गई, जबकि 2,500 से ज़्यादा लोग अभी भी लापता हैं. परिवार अपने लापता रिश्तेदारों की तलाश में अस्पतालों में जमा हो रहे थे, जबकि बचावकर्मी रुक-रुक कर हो रही बारिश और नदियों का जलस्तर बढ़ने की नई चिंताओं के बीच कीचड़ और मलबे में खोजबीन कर रहे थे. ‘द काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, नेपाल पुलिस ने बताया कि शनिवार को नुवाकोट में नौ होल्डिंग सेंटरों में लगभग 1,000 बेघर लोग रह रहे थे.

संक्रामक रोगों का खतरा

इसके अलावा अखबार ने बताया कि त्रिशूली अस्पताल के आस-पास तीन विस्थापन कैंपों में लगभग 1,000 लोग रह रहे हैं. ये कैंप भैरंग सेकेंडरी स्कूल, एक कवर्ड हॉल और बेथन एकेडमी में बने हैं. ‘द काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इन कैंपों में अलग-अलग ज़रूरतों वाले लोग रह रहे हैं, जिनमें गर्भवती महिलाएं, हाल ही में मां बनी महिलाएं और बुजुर्ग हैं, वे शामिल हैं. लेकिन इन शेल्टरों में साफ़ पीने के पानी और साफ़-सफ़ाई की कमी है. डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि भीड़-भाड़ वाली जगहों पर बीमारी का ख़तरा बढ़ सकता है. कोलाणी के एक कैंप में, कोपिला परियार अपनी 62 साल की मां की देखभाल कर रही थीं, जिन्हें अस्थमा है और जिन्हें नियमित रूप से दवा की ज़रूरत होती है.

दवाइयों की भी कमी

परियार ने ‘द काठमांडू पोस्ट’ को बताया कि हम उनकी सभी दवाइयां नहीं जुटा पाए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि परिवार के पास न तो पैसे हैं और न ही कपड़े. कैंप में पीने का पानी भी नहीं है. अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ के बाद लापता लोगों में परियार का 16 साल का भाई अविनाश और 43 साल की भाभी शांति भी शामिल हैं. पानी की कमी सिर्फ़ कैंपों तक ही सीमित नहीं है. ‘द काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, बाढ़ ने उस नहर को नष्ट कर दिया जो त्रिशूली अस्पताल और आस-पास की बस्तियों में पीने का पानी पहुंचाती थी, साथ ही तुपचे से गुज़रने वाली एक और पाइपलाइन भी बह गई.

700 मौतों के बाद नेपाल में फिर जलप्रलय का डर! भोटेकोशी उफनी, बाढ़ प्रभावित इलाकों में हाई अलर्ट

News Source: PTI

You may also like

Live Times logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?