Delhi News : दिल्ली में बढ़ते ट्रैफिक जाम और वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कंजेशन प्राइसिंग लागू करने का सुझाव दिया गया है. दिल्ली मास्टर प्लान-2047 में शामिल इस प्रस्ताव के तहत पीक आवर्स के दौरान भीड़भाड़ वाले इलाकों से निजी वाहन लेकर गुजरने पर लोगों से अतिरिक्त शुल्क लिया जा सकता है. इसका उद्देश्य सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या कम करना और लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करना है.
धुआं करता है दिल्ली का AQI खराब
दिल्ली में सुबह और शाम के पीक आवर्स में कई प्रमुख मार्गों पर भारी ट्रैफिक देखने को मिलता है. ऑफिस और स्कूल के समय सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है और लोगों को कई जगहों पर लंबा वक्त जाम में बिताना पड़ता है. इसके साथ ही वाहनों से निकलने वाला धुआं दिल्ली की खराब होती एयर क्वालिटी की एक बड़ी वजह माना जाता है. ऐसे में कंजेशन प्राइसिंग को ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों से निपटने के संभावित उपाय के तौर पर देखा जा रहा है.
सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करेंगे
इस प्रस्ताव के तहत उन इलाकों की पहचान की जा सकती है जहां पीक आवर्स में ट्रैफिक का दबाव सबसे ज्यादा रहता है. निर्धारित समय में इन इलाकों में निजी वाहन लेकर जाने वाले लोगों से शुल्क लिया जाएगा. उम्मीद है कि अतिरिक्त शुल्क की वजह से कुछ लोग यात्रा का समय बदलेंगे, वैकल्पिक रास्ते अपनाएंगे या निजी वाहन की जगह मेट्रो और बस जैसे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करेंगे.
अतिरिक्त शुल्क पर पड़ सकता है बोझ
हालांकि, दिल्ली के आम लोगों के बीच इस प्रस्ताव को लेकर कई सवाल भी हैं. रोजाना कार से ऑफिस या काम पर जाने वाले लोगों का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क उनके लिए आर्थिक बोझ बन सकता है. वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि अगर इससे ट्रैफिक जाम कम होता है और सड़कों पर सफर आसान होता है तो इस तरह के कदम पर विचार किया जा सकता है.
पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से निजी वाहनों की संख्या कम करने और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की वकालत करते रहे हैं. उनका मानना है कि कंजेशन प्राइसिंग सही तरीके से लागू होने पर ट्रैफिक और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकती है. हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सिर्फ शुल्क लगाना पर्याप्त नहीं होगा. इसके साथ दिल्ली की बस सेवा, मेट्रो कनेक्टिविटी और आखिरी छोर तक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा को मजबूत करना जरूरी होगा.
कितना रखा जाएगा शुल्क
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दिल्ली का मौजूदा पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम उन अतिरिक्त यात्रियों का दबाव संभाल पाएगा जो कंजेशन चार्ज से बचने के लिए निजी वाहन छोड़कर सार्वजनिक परिवहन का रुख करेंगे. इसके अलावा यह भी तय करना महत्वपूर्ण होगा कि शुल्क कितना रखा जाए और किन इलाकों व समय पर इसे लागू किया जाए.
कुल मिलाकर, कंजेशन प्राइसिंग दिल्ली में ट्रैफिक और प्रदूषण कम करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे लागू करने से पहले आम लोगों को कितने बेहतर और किफायती सार्वजनिक परिवहन विकल्प उपलब्ध कराए जाते हैं.
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दिल्ली से शालिनी झा की रिपोर्ट
