Gujarat News : गुजरात सरकार ने समुद्री जीव-जंतुओं के संरक्षण और मछुआरों की आर्थिक समृद्धि को जोड़ते हुए एक महत्वपूर्ण पहल की है. गुजरात में पहली बार मछुआरों के फिशिंग नेट में टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (TED) लगाए जाएंगे. इस आधुनिक उपकरण की मदद से मछली पकड़ने के दौरान जाल में फंसने वाले समुद्री कछुओं को सुरक्षित तरीके से बाहर निकलने का रास्ता मिलेगा.
TED डिवाइस मुफ्त में उपलब्ध कराए जाएंगे
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत शुरू होने वाली इस योजना में राज्य के 8,925 मछुआरों को 100 प्रतिशत सरकारी सहायता के साथ TED डिवाइस मुफ्त में उपलब्ध कराए जाएंगे. इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 20.96 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. मत्स्य उद्योग मंत्री जीतूभाई वाघाणी के मुताबिक,TED के इस्तेमाल से समुद्री कछुओं के संरक्षण में मदद मिलेगी और समुद्री जैव विविधता को सुरक्षित रखने की दिशा में गुजरात एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाएगा.
आयात पर प्रतिबंधात्मक कदम उठाए गए
इस योजना का सीधा संबंध गुजरात के समुद्री उत्पादों, खासकर झींगा निर्यात से भी जुड़ा हुआ है. पिछले कुछ समय से अमेरिका की ओर से भारतीय ‘वाइल्ड-कॉट श्रिम्प’ यानी समुद्र से पकड़े गए झींगे के आयात पर प्रतिबंधात्मक कदम उठाए गए थे. इसका एक प्रमुख कारण झींगा पकड़ने के दौरान समुद्री कछुओं को होने वाला खतरा बताया गया था. अब फिशिंग नेट में TED लगाने से कछुओं के जाल में फंसने और उनके मारे जाने की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है. इसके चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जरूरी सर्टिफिकेशन हासिल करने में भी मदद मिल सकती है.
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गुजरात के झींगा
सरकार का मानना है कि इससे अमेरिका सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गुजरात के झींगा और अन्य समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा. इसका सीधा लाभ राज्य के मछुआरों और सीफूड एक्सपोर्टर्स को मिलने की उम्मीद है. भारत सरकार ने देशभर में सबसे अधिक 8,925 TED यूनिट्स गुजरात के लिए मंजूर की हैं. इन उपकरणों का विशेष मॉडल ICAR-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज टेक्नोलॉजी, कोच्चि द्वारा अमेरिका के नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है.
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कैसे काम करता है TED?
टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस मुख्य रूप से झींगा पकड़ने वाली ट्रॉल नेट में लगाया जाता है. जाल में जब झींगे के साथ कछुए जैसे बड़े समुद्री जीव फंसते हैं, तो TED उन्हें बाहर निकलने का रास्ता देता है. इसमें एक विशेष ‘एग्जिट फ्लैप’ होता है. छोटे आकार के झींगे जाल में बने हिस्से से आगे निकल जाते हैं, जबकि बड़े समुद्री जीव इस एग्जिट फ्लैप के जरिए बाहर निकल सकते हैं. इससे समुद्री कछुओं के फंसने और मृत्यु का खतरा काफी कम किया जा सकता है.
गुजरात के पास देश का सबसे लंबा समुद्री तट है और राज्य लंबे समय से मत्स्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है. TED जैसी तकनीक को अपनाने से एक तरफ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और कछुओं का संरक्षण होगा. वहीं, दूसरी तरफ गुजरात के सीफूड उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिल सकती है. सरकार के मुताबिक यह पहल पर्यावरण संरक्षण और मछुआरों की आर्थिक समृद्धि के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में अहम कदम है. इससे गुजरात की ‘ब्लू इकोनॉमी’ को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है.
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