India-Uzbekistan: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को अज़रबैजान की राजधानी बाकू में उज़्बेक विदेश मंत्री बख्तियोर सैदोव से मुलाकात की. एक दिवसीय यात्रा पर बाकू पहुंचे जयशंकर और सैदोव के बीच हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय एजेंडे के कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. दोनों नेताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि शीर्ष स्तर पर हुए सभी द्विपक्षीय समझौतों को समय रहते और प्रभावी ढंग से धरातल पर लागू किया जाना चाहिए. अपनी यात्रा के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने अज़रबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से भी मुलाकात की. इसके अलावा, उन्होंने वहां के विदेश मंत्री जेहुन बायरामोव के साथ व्यापार, निवेश, ऊर्जा, पर्यटन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी (संपर्क) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन समीक्षा की.
मोदी को मिल चुका है उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर बैठक की तस्वीर साझा करते हुए जयशंकर ने लिखा कि बाकू में उज़्बेक विदेश मंत्री सैदोव से मिलकर अच्छा लगा. वहीं, जॉर्जिया में एक क्षेत्रीय बैठक में भाग लेकर बाकू पहुंचे सैदोव ने भी इस मुलाकात को फलदायी बताते हुए आपसी संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई. यह बैठक इस साल दोनों देशों के बीच बढ़ रहे मजबूत कूटनीतिक संबंधों को दर्शाती है. अगस्त में अपनी उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विदेशी नेताओं के लिए दिए जाने वाले उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान, ‘ओली दराजली दोस्तलिक ऑर्डर’ से सम्मानित किया गया था.
अग्नि मंदिर भी गए जयशंकर
मोदी की दो दिवसीय यात्रा के दौरान, नई दिल्ली और ताशकंद ने अपने संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ाया और द्विपक्षीय व्यापार के लिए 5 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य तय किया. दोनों पक्षों ने खनन और पर्यटन सहित प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 11 समझौतों पर हस्ताक्षर किए. साथ ही, वे उज्बेकिस्तान से भारत को यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए एक रूपरेखा तैयार करने पर भी सहमत हुए. इससे पहले शुक्रवार को, जयशंकर ने बाकू के पास स्थित ऐतिहासिक ‘अतेशगाह फायर टेम्पल’ (अग्नि मंदिर) का भी दौरा किया. ‘X’ (ट्विटर) पर एक पोस्ट में, उन्होंने इसे हमारे दोनों लोगों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक बताया.
हवाई संपर्क और पर्यटन पर भी हुई चर्चा
किले जैसी संरचना वाले इस पंचकोणीय परिसर का निर्माण और उपयोग मुख्य रूप से 17वीं और 18वीं शताब्दी में भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी हिस्से से आए हिंदू और सिख व्यापारियों द्वारा किया गया था. इसकी दीवारों पर संस्कृत और गुरुमुखी लिपि में कुछ लेख खुदे हुए हैं, जिनमें हिंदू प्रार्थनाएं और सिखों का एक पवित्र श्लोक शामिल है. दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश और ऊर्जा सहित आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की. दोनों देश ‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ (INSTC) से जुड़े हैं. यह लगभग 7,200 किलोमीटर लंबा एक मल्टी-मोडल फ्रेट नेटवर्क है, जो भारत को ईरान, कैस्पियन क्षेत्र, रूस, मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ता है. जयशंकर ने कहा कि आज की वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था में इस परियोजना पर करीबी तालमेल होना बहुत महत्वपूर्ण है. दोनों पक्षों ने अन्य विषयों के साथ-साथ हवाई संपर्क, पर्यटन और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान पर भी चर्चा की.
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