Iran US Peace Deal: बीते 28 फरवरी से पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष अब समझौते के साथ खत्म हो रहा है. इस डील की जानकारी अमेरिका, ईरान के साथ इन दोनों देशों के बीच मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी दी है.
शरीफ ने कहा, “हमें अमेरिका और ईरान के बीच गहन चर्चा के बाद एक शांति समझौते पर पहुंचने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है. दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान की तत्काल और स्थायी समाप्ति की घोषणा की है.” ईरान और अमेरिका के बीच इस शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किया जाएगा. अब आइए जानते हैं कि इन दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर बनी सहमति में क्या-क्या शर्तें और बातें हैं. इसको हम आसान भाषा में बिन्दुवार जानेंगे.
Iran US Peace Deal: शांति समझौते के 14 प्रमुख बिंदु
- युद्ध पर पूरी रोक: लेबनान सहित सभी सक्रिय मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करना.
- नाकाबंदी हटाना: हस्ताक्षर होने के 30 दिनों के भीतर ईरानी बंदरगाहों से अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को पूरी तरह हटाना.
- अमेरिकी सेना की वापसी: ईरान के आस-पास के क्षेत्रों से अमेरिकी सैन्य बलों को पीछे हटाने की प्रतिबद्धता.
- आंतरिक मामलों में दखल नहीं: ईरान के संप्रभु आंतरिक मामलों में दखल न देने का अमेरिका का औपचारिक वादा.
- क्षेत्रीय सेना पर नियंत्रण: बातचीत के दौरान मध्य पूर्व (Middle East) क्षेत्र में अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों को तैनात न करने की प्रतिबद्धता.
- होर्मुज जलडमरू: बीते कई दिनों से बाधित होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलना.
- शिपिंग फिर से शुरू करना: स्थानीय “ईरानी व्यवस्था” के तहत 30 दिनों के भीतर महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को फिर से शुरू करना.
- तेल प्रतिबंधों पर रोक: ईरान के रेवेन्यू फ्लो को बहाल करने के लिए तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और संबंधित ऊर्जा निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को हटाना.
- फ्रीज की गई संपत्ति की रिहाई: बातचीत की अवधि के दौरान कुल $24 बिलियन (24 अरब डॉलर) की ईरानी संपत्ति को अनफ्रीज (मुक्त) करना.
- बातचीत से पहले फंड की उपलब्धता: अंतिम बातचीत शुरू होने से पहले ही फ्रीज किए गए फंड का आधा हिस्सा ($12 बिलियन) ईरान को सौंपना.
- आर्थिक पुनर्निर्माण योजना: अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा ईरान के लिए कम से कम $300 बिलियन (300 अरब डॉलर) के आर्थिक पुनर्निर्माण के प्रस्ताव पेश करना.
- परमाणु हथियार न बनाने की शर्तें: परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत ईरान का यह दोहराना कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा या हासिल नहीं करेगा.
- 60 दिनों की समय सीमा: अमेरिकी प्रतिबंधों, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के नियमों और IAEA के प्रस्तावों को अंतिम रूप देने के लिए 60 दिनों की सख्त समय सीमा तय करना.
- एजेंडे से बाहर की शर्तें: ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय समूहों के लिए उसके वित्तीय/सामग्री समर्थन को सभी बातचीत के एजेंडे से पूरी तरह बाहर रखना.
किसे फायदा और किसे नुकसान?
डील के मसौदा को देखने पर मालूम होता है कि अमेरिका से अधिक फायदा ईरान को हो रहा है. अमेरिका और इजरायल ने बीते 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था. इसकी कई वजहें थीं, इनमें से एक वजह ईरान को परमाणु हथियार न बनाने देना और कुछ बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को भी पूरा नहीं होने देना था. लेकिन इस शांति समझौते में आप देख सकते हैं कि परमाणु हथियार वाले मामले में ईरान अमेरिका की बात मान गया है लेकिन बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को इस समझौते से बाहर रखा गया है. इसे एक तरह से ईरान की जीत बताई जा रही है.
इतना ही नहीं, अमेरिका ईरान को और भी कई मामलों में राहत देता हुआ दिख रहा है. इनमें तेल प्रतिबंधों पर रोक को हटाना, फ्रीज की गई संपत्ति की रिहाई करना, ईरान के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देना, ईरान के आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के प्रस्ताव पर बात बनना समेत अन्य चीजें शामिल हैं. आप यह देख सकते हैं कि अमेरिका, ईरान को परमाणु हथियार न बनाने की बातों पर राजी कर चुका है, बाकी के अन्य बातों या यूं कहें कि शर्तों पर ईरान भारी पड़ता हुआ दिखा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी एक तरह से ईरान की निगरानी में ही रहेगा. हालांकि, समुद्री नियम के तहत वह इस रास्ते पर कोई टोल नहीं वसूल सकेगा, जो एक समय पर कहा जा रहा था कि ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स ले सकता है.
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News Source: PTI
