Iran US Deal: पश्चिम एशिया में फरवरी के आखिरी दिन से जारी तनाव अब जाकर खत्म हो रहा है. ईरान और अमेरिका के बीच पिछले करीब 107 दिनों का यह संघर्ष दोनों देशों के बीच एक शांति समझौते के साथ समाप्त होने जा रहा है. अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने इस शांति समझौते का ऐलान कर दिया है. उन्होंने यह भी बताया कि 19 जून दिन शुक्रवार को दोनों ही देश इस समझौते पर स्विट्जरलैंड में साइन करेंगे. इसके बाद भारत समेत दुनिया के तमाम देशों की एनर्जी सप्लाई (तेल, गैस आदि) के लिए अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से खुल जाएगा.
हालांकि, अब बड़ा सवाल यह है कि होर्मुज के खुलने के बाद क्या तेल और गैस की सप्लाई जल्द ही पहले की तरह नॉर्मल हो जाएगी? इसपर पर एनर्जी एक्सपर्ट ने अपनी-अपनी राय दी है. उन्होंने इस बात को एकदम साफ कर दिया है कि ईरान-अमेरिका समझौता होने और होर्मुज के खुलने के बाद रातोंरात एनर्जी सप्लाई सामान्य नहीं हो जाएगी, इसमें अभी वक्त लगेगा.
कई महीनों का लग सकता है समय- एक्सपर्ट
न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को घोषित ईरान युद्ध को समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के समझौते के बावजूद, तेल और गैस की उच्च कीमतें और ऊर्जा आपूर्ति(एनर्जी सप्लाई) की समस्याएं रातोंरात हल नहीं होंगी.
एनर्जी एक्सपर्ट कहते हैं कि एनर्जी कंपनियों को दुनिया की डिमांड को पूरा करने के लिए ऑपरेशन फिर से शुरू करने में संभवतः कई महीने लग सकते हैं. उन्होंने कहा कि कच्चे तेल के परिवहन (शिपिंग)और रिफाइनिंग की धीमी गति और होर्मुज से यात्रा की सुरक्षा को लेकर संदेह के कारण इसका प्रभाव तुरंत दिखाई नहीं देगा.
बता दें कि कच्चे तेल से लदे जहाज तीन महीने से अधिक समय से फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं, क्योंकि वे उस समुद्री रास्ते से सुरक्षित रूप से यात्रा करने में असमर्थ हैं, जिससे होकर युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के तेल और गैसोलीन की आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता था.
फंसे हुए जहाजों को होर्मुज से बाहर निकालना होगा- एक्सपर्ट
पीटीआई के अनुसार, एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी में ईंधन और रिफाइनिंग रिसर्च के वैश्विक प्रमुख डैनियल इवांस ने कहा, “लोगों को सहज महसूस करने और बीमा व्यवस्था लागू होने में समय लगेगा… विशेष रूप से कुछ संपत्तियों को फिर से शुरू करने के लिए लोगों को जमीनी स्तर पर लाने में समय लगेगा.”
इवांस ने कहा कि सबसे पहले, फंसे हुए जहाजों को जलडमरूमध्य से बाहर निकलना होगा और फिर नए टैंकरों को माल लोड करने के लिए आना होगा. उन्होंने आगे कहा, “किसी जहाज को अंदर लाने के लिए, आपको इस बात का पूरा भरोसा होना चाहिए कि आपके पास उसे अंदर लाने, उस पर सामान लादने और उसे बाहर ले जाने के लिए सुरक्षा का पर्याप्त समय है.”
इवांस ने बताया कि तेल टैंकर भी धीरे-धीरे चलते हैं. होर्मुज से दूर देशों तक यात्रा करने, कच्चे तेल को प्रोसेसिंग के लिए रिफाइनरी तक पहुंचाने और फिर अपने अंतिम गंतव्य तक पहुंचने में महीनों लग जाते हैं. इसके अलावा, मध्य पूर्व में कुछ उत्पादकों ने भंडारण स्थान समाप्त होने पर तेल निकालने का काम रोक दिया, जिसे ‘शट-इन’ कहा जाता है. इन कार्यों को दोबारा शुरू करना एक धीमी प्रक्रिया हो सकती है.
लगभग एक साल का समय लग सकता है- गेल्डर
वुड मैकेंजी नामक एक विश्लेषणात्मक फर्म में रिफाइनिंग, रसायन और तेल बाजारों के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एलन गेल्डर ने कहा कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश, जहां होर्मुज के अलावा तेल पहुंचाने के लिए वैकल्पिक पाइपलाइन या मार्ग मौजूद हैं, उत्पादन फिर से शुरू करने वाले सबसे तेज देशों में शामिल हो सकते हैं.
उन्होंने कहा, “लेकिन इराक जैसे स्थानों को कहीं अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि वहां बहुत लंबे समय तक लॉकडाउन रहा है, उनके फील्ड अधिक कठिन हैं… उन्हें वापस पटरी पर आने में लगभग एक साल लग सकता है.”
गेल्डर ने कहा कि एनर्जी सिस्टम में निवेश, जिसके परिणाम देखने में वर्षों लग सकते हैं, जलडमरूमध्य के बंद होने के बाद ठप हो गया. इसलिए इस पूंजी को फिर से शुरू होने में समय लगेगा.
कई देशों ने कर दिया तेल उत्पादन बंद
वहीं, कोलंबिया विश्वविद्यालय के सेंटर ऑन ग्लोबल एनर्जी पॉलिसी के वरिष्ठ फेलो डैनियल स्टर्नॉफ ने कहा कि जिन देशों ने तेल उत्पादन बंद कर दिया है, वे तब तक इसे फिर से शुरू नहीं करना चाहेंगे जब तक उन्हें यह पता न चल जाए कि एक स्थिर, टिकाऊ जलडमरूमध्य है और युद्धविराम 30 या 60 दिनों से अधिक समय तक चलेगा.
ट्रंप ने ईरान के साथ शांति समझौते पर क्या कहा?
ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष को खत्म करने और शांति समझौते की जानकारी यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने दी. उन्होंने 15 जून को अपने आधिकारिक ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करके लिखा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया है. सभी को बधाई! मैं इसके जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बिना किसी रोक-टोक के खोलने की पूरी मंजूरी देता हूं.” ट्रंप ने पोस्ट में आगे कहा, “और साथ ही, अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने का भी आदेश देता हूं. दुनिया भर के जहाजों, अपने इंजन चालू करो. तेल का फ्लो शुरू होने दो!”
अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप ने अपने एक अन्य ट्रूथ सोशल पोस्ट में कहा, “यह शानदार डील पूरे इलाके में शांति और सुरक्षा लाएगी.” ट्रंप ने आगे कहा, “शुक्रवार को डील पर साइन होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुलने और बारूदी सुरंगें हटाने के काम के साथ, इलाके और दुनिया के लिए दोनों तरफ से फिर से तेल की सप्लाई शुरू हो जाएगी!”
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बारे में
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की बात करें तो यह दुनिया का बहुत ही महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. फारस और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग 33 किमी चौड़ा और करीब 167 किमी लंबा है. विश्व की एनर्जी सप्लाई इस रास्ते पर बहुत ही अधिक निर्भर है. रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया का करीब 20 से 25 फीसदी तेल और गैस का व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होता है. यह रास्ता एशियाई बाजारों तक करीब 80 फीसदी से अधिक तेल की सप्लाई का माध्यम है. ईरान-अमेरिका संघर्ष की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित हो गया था.
भारत के लिए भी यह रास्ता बहुत ही खास है क्योंकि यहां से वह 30 से 50 फीसदी तक कच्चे तेल और गैस का आयात करता है. भारत इसी समुद्री मार्ग से ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात समेत अन्य देशों से तेल का आयात करता है.
खत्म हुआ ईरान-अमेरिका युद्ध, 107 दिनों के संघर्ष के बाद शांति समझौता; इस दिन से खुलेगा होर्मुज
News Source: PTI
