Paper Leak: राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को हंगामे के बीच सरकार पर जमकर हमला बोला. आरोप लगाया कि पेपर लीक रोकने वाले कानून में संशोधन सिर्फ़ विरोध कर रहे युवाओं को शांत करने के लिए लाया गया है, न कि इस समस्या को हल करने के लिए.’सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026′ पर बोलते हुए खड़गे ने कहा कि सरकार ने यह नहीं बताया है कि वह ऐसी परीक्षाएं कैसे आयोजित करेगी जिससे पेपर लीक को रोका जा सके. उन्होंने कहा कि ज़्यादा जुर्माना, सख़्त सज़ा और फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट के प्रावधानों से पेपर लीक के मामलों में कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा.
तय हो जवाबदेही
उन्होंने तर्क दिया कि असली फ़र्क इस बात से पड़ेगा कि सरकार ये परीक्षाएं कैसे आयोजित करती है. खड़गे ने कहा कि जब तक संस्थानों और परीक्षा प्रणाली में सुधार नहीं किया जाता और जवाबदेही तय नहीं की जाती, तब तक पेपर लीक होते रहेंगे. खड़गे ने कहा कि पेपर लीक से मासूम छात्रों और उनके माता-पिता को नुकसान पहुंचता है. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि राहुल गांधी ने अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान पेपर लीक का मुद्दा उठाया था और विपक्ष ने भी 2024 में, जब यह विधेयक पहली बार पारित हुआ था, तब एक सख़्त कानून की मांग की थी. हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने राजनीतिक कारणों से जल्दबाजी में यह कानून बनाया.
बिल अभी भी अधूरा
खड़गे ने कहा कि अब दो साल के भीतर ही आपको इसमें संशोधन करना पड़ रहा है लेकिन यह अभी भी अधूरा है. सरकार को धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से हटाने के लिए मजबूर करने पर युवाओं को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि उनकी मजबूत आवाज और संसद में विपक्ष के विरोध के कारण सरकार आखिरकार उनकी मांगों के आगे झुक गई. उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी कुर्सी बचाने के लिए प्रधान को हटाना पड़ा.
लाठीचार्ज और आंसू गैस पर खड़े किए सवाल
खड़गे ने बातचीत करने की सरकार की अनिच्छा की आलोचना करते हुए कहा कि चर्चा की मांग करने वाले युवाओं को देशद्रोही करार दिया गया, उन पर लाठीचार्ज किया गया, आंसू गैस छोड़ी गई और पैलेट गन से इतनी बुरी तरह घायल किया गया कि कई लोगों को आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा. उन्होंने सदन से प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की अनुपस्थिति की भी आलोचना करते हुए कहा कि अशांति के बावजूद दोनों में से किसी ने भी कुछ नहीं कहा.
पेपर लीक पर सोती रही सरकार
उन्होंने कहा कि छात्रों के खिलाफ हुए अत्याचारों के लिए कौन जिम्मेदार है? जनता की ताकत उन्हें सत्ता से बाहर कर देगी. उन्होंने कहा कि अगर गृह मंत्री यह नहीं बता सकते कि छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था और सादे कपड़ों में छात्रों को पीटने वाले लोग कौन थे, तो उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. खड़गे ने पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में भी पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया. आरोप लगाया कि वहां छात्रों पर AK-47 से गोलियां चलाई गईं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में देश भर में कई बार पेपर लीक हुए, लेकिन सरकार सोती रही.
News Source: PTI
