Kazakhstan Election: कजाकिस्तान में संसदीय चुनाव के लिए रविवार को मतदान किया जा रहा है. मतदान से पहले चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि मध्य एशिया के सबसे बड़े इस देश में राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव की ताकत बढ़ सकती है. वह एक बार फिर सत्ता में वापसी कर सकते हैं. टोकायेव की समर्थन करने वाली सत्ताधारी ‘अदिलेट पार्टी’ को भारी बहुमत मिल सकता है और टोकायेव को कई छोटी पार्टियों का भी समर्थन प्राप्त है. ऐसे में टोकयेव सत्ता में फिर से आ सकते हैं. बता दें कि 73 वर्षीय टोकायेव सोवियत संघ के पूर्व अधिकारी और कजाख राजनयिक रह चुके हैं.
यह पहला एक-सदनीय चुनाव है
यह देश में ‘कुरुलताई’ नाम की नई, एक-सदनीय संसद के लिए पहला चुनाव है. यह राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव द्वारा मार्च में शुरू किए गए संवैधानिक बदलावों का परिणाम है. उस समय 87 प्रतिशत मतदाताओं ने संसद के दोनों सदनों को मिलाकर एक सदन बनाने और राष्ट्रपति को अहम अधिकारियों की नियुक्ति का अधिकार देने के प्रस्ताव का समर्थन किया था. आपको बताते चलें कि यूक्रेन युद्ध की वजह से रूस पर प्रतिबंध लगने के बाद से ही टोकायेव मास्को और पश्चिम के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने तेजी से बदलती दुनिया में जल्द फैसले लेने की जरूरत का हवाला देते हुए इन बदलावों को सही ठहराया है.
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पिछला कार्यकाल हुआ खत्म
वहीं, पिछले महीने ही कजाकिस्तान की अदालत ने फैसला सुनाया कि इन संशोधनों से टोकयेव के पिछला कार्यकाल खत्म हो गया है. साथ ही बीते सात सालों में एक और चुनाव लड़ने का रास्ता खुल गया है. यह चुनाव कजाकिस्तान के लिए आर्थिक रूप से मुश्किल समय हो रहा है. महंगाई दर 10.2 फीसदी तक पहुंच गई थी और टैक्स में बढ़ोतरी से जनता में नाराजगी थी. वहीं, ईंधन की कीमतों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए थे, जिसमें दर्जनों प्रदर्शनकारी मारे गए थे. टोकायेव सारी ताकत अपने हाथों में केंद्रित करके ऐसी स्थिति से बचने की कोशिश कर रहे हैं. टोकायेव ने कहा कि यह चुनाव सचमुच एक ऐतिहासिक घटना साबित होगा. उन्होंने आगे कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि ये चुनाव हमारे देश के इतिहास में सबसे अहम मोड़ के रूप में याद किया जाएगा. इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव के बीच हमको कजाकिस्तान को सचमुत एक विकसित देश बनाने के लिए निरंतरता के साथ काम करना होगा.
प्रेस की आजादी पर लगाई गई रोक
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि वोटिंग ऐसे समय में हो रही है जब प्रेस की आजादी पर संख्या बढ़ रही. मीडिया संगठनों ने टोकयेव से अपील की है कि वे उन पत्रकारों पर लगे आपराधिक आरोप हटा लें जो अभी नजरबंद हैं और प्रेस की स्वतंत्रता के लिए देश के कानून में बदलाव करें. अधिकारियों ने स्वतंत्र पत्रकारों और मशहूर ब्लॉगर्स के खिलाफ करीब 10 आपराधिक मामले दर्ज कर लिए हैं.
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News Source: PTI
