US Canada Trade War: अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक बार फिर गर्मी बढ़ गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से कनाडा से आने वाले कई सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ शनिवार से लागू हो गया. आखिरी वक्त तक दोनों देशों के बीच बातचीत से कोई समाधान नहीं निकला. अब कनाडा ने भी जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर ली है. ये नया फैसला सिर्फ सरकारों और बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहने वाला. टैरिफ बढ़ने का असर कारोबार से लेकर सामान की कीमतों और आम लोगों की जेब तक पहुंच सकता है.
20 अरब डॉलर के सामान पर असर
अमेरिका के नए टैरिफ से कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर के सामान प्रभावित होने की उम्मीद है. ये कनाडा के कुल सालाना अमेरिकी निर्यात का लगभग 5 फीसदी है. अमेरिका कनाडा का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. पिछले साल कनाडा के करीब 72 फीसदी माल निर्यात का गंतव्य अमेरिका था. अब नए शुल्क के दायरे में हॉकी स्टिक से लेकर वाइन, सीमेंट और कृषि उत्पाद तक शामिल हैं. इसके अलावा शहद, बीज, कुछ खाद्य और कृषि उत्पाद, कॉस्मेटिक्स, परफ्यूम, कपड़े, गहने, फर्नीचर, कैमरा और कपड़े बनाने में इस्तेमाल होने वाला फैब्रिक जैसे कई सामान भी प्रभावित होंगे. हालांकि, कुछ ऐसे उत्पाद भी इस टैरिफ की चपेट में आए हैं, जिन्हें पहले USMCA यानी संयुक्त राज्य अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौता के तहत सुरक्षा मिली हुई थी.
कौन सा कानून इस्तेमाल किया?
इन टैरिफ को लागू करने के लिए ट्रंप प्रशासन ने करीब एक सदी पुराने कानून का सहारा लिया है. ये सेक्शन 338 ऑफ द टैरिफ एक्स ऑफ 1930 है. ये कानून उस दौर में बनाया गया था जब अमेरिका और दुनिया की अर्थव्यवस्था महामंदी से जूझ रही थी. ये 1930 के स्मूट हॉली टैरिफ कानून से जुड़ा था. इसे अर्थशास्त्रियों ने बाद में वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचाने वाले कदम के रूप में देखा. सेक्शन 338 राष्ट्रपति को ऐसे देशों से आने वाले आयात पर 50 फीसदी तक शुल्क लगाने की शक्ति देता है, जिन पर अमेरिकी कारोबार के साथ भेदभाव करने का आरोप हो. दिलचस्प बात ये है कि इस प्रावधान का इस्तेमाल अब तक इसी तरह टैरिफ बढ़ाने के लिए नहीं किया गया था. ऐसे में नए फैसले को लेकर कानूनी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं.
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कनाडा भी देगा जवाब
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने साफ कर दिया है कि उनका देश चुप बैठने वाला नहीं है. उन्होंने कहा कि कनाडा “डॉलर फॉर डॉलर” के हिसाब से जवाबी शुल्क लगाएगा. इसकी शुरुआत 8 सितंबर से होने की बात कही गई है. कनाडा की जवाबी कार्रवाई में स्टील, डेयरी उत्पाद, घरेलू उपकरण, कृषि मशीनरी, पल्प एंड पेपर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्र शामिल हो सकते हैं. कार्नी ने कहा कि अगर अमेरिका अपने शुल्क में बड़ी कटौती करता है तो कनाडा स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो सेक्टर पर लगाए गए जवाबी शुल्क हटाने पर विचार कर सकता है. हालांकि, फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत पटरी से उतर चुकी है.
आम लोगों की जेब पर असर
टैरिफ असल में आयात करने वाली कंपनियों पर लगाया जाने वाला टैक्स है. लेकिन कंपनियां अक्सर इस बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल देती हैं. यानी दुकानों में सामान महंगा हो सकता है. अगर कनाडाई सामान अमेरिका में महंगा होता है, तो वहां उपभोक्ताओं को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है. वहीं, कनाडा की जवाबी कार्रवाई से अमेरिकी उत्पाद कनाडा में महंगे हो सकते हैं. इसका असर सिर्फ खरीदारी तक नहीं रहता. कंपनियों की लागत बढ़ने पर निवेश, उत्पादन और रोजगार पर भी दबाव पड़ सकता है.
टैरिफ की कहानी
कनाडा पर ये 50 फीसदी शुल्क अचानक नहीं आया है. अमेरिका पहले ही कनाडा पर अलग-अलग टैरिफ लगा चुका है. पिछले महीने भी 10 फीसदी का शुल्क लगाया गया था. इसके अलावा स्टील और बाकी सेक्टरों पर अलग शुल्क का असर भी जारी है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऊंचे टैरिफ लंबे समय तक बने रहे तो, उत्तरी अमेरिका का कारोबारी माहौल और ज्यादा अनिश्चित हो सकता है. ट्रंप के लिए भी ये फैसला राजनीतिक रूप से अहम है. अमेरिका में महंगाई और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें लोगों के लिए बड़ा मुद्दा बनी हुई हैं. ऐसे में अगर टैरिफ की वजह से कीमतों पर और दबाव बढ़ता है, तो आने वाले महीनों में इसका राजनीतिक असर भी दिखाई दे सकता है. फिलहाल अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड वॉर का अगला अध्याय शुरू हो चुका है. सवाल अब ये है कि दोनों देश बातचीत की मेज पर लौटेंगे या टैरिफ की ये लड़ाई और लंबी चलेगी.
News Source: PTI
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