West Bank: फिलिस्तीन के गाजा और वेस्ट बैंक में जारी संघर्ष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. युद्धविराम के बाद भले ही बड़े हमले कम हो गए हो, लेकिन इसके बावजूद लोगों के मारे जाने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. इजरायली सेना समय-समय पर अभियान चलाकर अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई कर रही है. शुक्रवार को कब्जे वाले वेस्ट बैंक में पत्थरबाजी की एक घटना के बाद इजरायली सेना (IDF) पर एक फिलिस्तीनी किशोर की हत्या का आरोप लगा है. इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है. इसी बीच तुर्की ने घोषणा की है कि वह इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की गिरफ्तारी के लिए अंतरराष्ट्रीय वारंट की मांग कर रहा है. नेतन्याहू पर मई में गाजा की नौसैनिक नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रही कई नावों को रोकने में भूमिका निभाने का आरोप है. वहीं, इजरायल-हिज्बुल्लाह युद्ध का असर लेबनान की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है. संघर्ष के कारण देश में दर्ज की गई आर्थिक वृद्धि को झटका लगा है और कुछ समय के लिए जारी विकास की रफ्तार कमजोर पड़ गई है.
इजरायली नागरिकों पर पत्थर फेंके
फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि कब्जे वाले वेस्ट बैंक में हेब्रोन के उत्तर में स्थित सैर (Sa’ir) में शुक्रवार को पत्थर फेंके जाने के बाद इजरायली बसने वालों की गोलीबारी में 17 साल के एक फिलिस्तीनी की मौत हो गई. साथ ही एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया. मंत्रालय ने किशोर की पहचान करीम सनद राजा शलालदेह के रूप में की. किशोर के पिता ने अस्पताल में अमेरिकी समाचार एजेंसी AP को बताया कि वेस्ट बैंक में बसने वाले इजरायली ने उनके बेटे की हत्या कर दी. इजरायली सेना का कहना है कि सैर में सैनिकों को तब भेजा गया जब फिलिस्तीनियों ने उन इजरायली नागरिकों पर पत्थर फेंके जो बिना पूर्व अनुमति के उस इलाके में मौजूद थे. कुछ इजरायली घायल हो गए और इस दौरान एक सुरक्षा अधिकारी ने गोली चला दी. इसके अलावा फिलिस्तीनी नागरिक मामलों के सामान्य प्राधिकरण ने स्वास्थ्य मंत्रालय को सूचित किया कि शुक्रवार तड़के जेनिन में इजरायली बलों द्वारा 58 वर्षीय फथी खाजेम की गोली मारकर हत्या कर दी गई. सैन्य नियमों के अनुसार नाम न बताने की शर्त पर बात करते हुए इजरायली सेना के एक अधिकारी ने कहा कि खाजेम ने रात भर चले एक ऑपरेशन के दौरान एक इजरायली सैनिक को चाकू मारने की कोशिश की. इसमें कोई इजरायली सैनिक घायल नहीं हुआ. इजरायली अधिकारी ने कहा कि खाजेम, राएद खाजेम के पिता थे जिन्होंने अप्रैल 2022 में तेल अवीव में हमला किया था.

87 फिलिस्तीनी मारे गए
बीते कुछ समय से वेस्ट बैंक में हिंसा बढ़ गई है. फिलिस्तीनी अधिकारियों के अनुसार, इस साल में बसने वालों इजरायली और सैनिकों ने 1,500 हमले किए, जिसमें 87 फिलिस्तीनी मारे गए हैं. गाजा की नौसैनिक नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे एक अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक बेड़े को इजरायल द्वारा रोके जाने के मामले में तुर्की इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की गिरफ्तारी के लिए अंतरराष्ट्रीय वारंट जारी करने की मांग कर रहा है. तुर्की के न्याय मंत्री अकिन गुरलेक ने X पर जारी एक बयान में कहा कि नेतन्याहू और एक अन्य इजरायली नागरिक के खिलाफ इंटरपोल द्वारा जारी किया गया रेड नोटिस इस्तांबुल की एक अदालत में चल रहे एक मामले से संबंधित है. इसमें 35 आरोपियों पर कथित नरसंहार मानवता के खिलाफ अन्य अपराध, यातना, गैरकानूनी हिरासत और अपहरण के आरोप में उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया जा रहा है. ये आरोप मई में साइप्रस के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कई जहाजों को इजरायली नौसेना द्वारा रोके जाने से संबंधित हैं, जब नौसैनिक बेड़ा तुर्की के मारमारिस बंदरगाह से रवाना हुआ था. हिरासत में लिए गए कुछ कार्यकर्ताओं ने दुर्व्यवहार की शिकायत की. तुर्की इजरायल सरकार के सबसे मुखर आलोचकों में से एक है. नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर जवाब देते हुए तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन को यहूदी-विरोधी तानाशाह बताया.
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लेबनान की अर्थव्यवस्था पर पड़ा बुरा असर
नेतन्याहू ने कहा कि राष्ट्रपति एर्दोगन ने कुर्दों का नरसंहार किया, हमास आतंकवादियों को पनाह दी, साइप्रस के आधे हिस्से पर कब्जा कर रखा है. इसके अलावा उन्होंने अपने विरोधियों को रिकॉर्ड संख्या में जेल में डाल रखा है. नेतन्याहू ने शुक्रवार को कहा कि मध्य पूर्व में सच्चे लोकतंत्र के रूप में मौजूद इजरायल के नेताओं और सैनिकों को डराने का एर्दोगन का यह घिनौना प्रयास विफल होगा. वर्ल्ड बैंक ने शुक्रवार को कहा कि इस साल लेबनान की अर्थव्यवस्था में 6.4 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है. हालिया इजरायल-हिज़्बुल्लाह युद्ध ने पिछले साल हुई आर्थिक रिकवरी को उलट दिया है. संस्था ने कहा कि मार्च में शुरू हुए युद्ध से हुई तबाही और उससे टूरिज़्म में आई भारी गिरावट के कारण लेबनान की अर्थव्यवस्था में 2025 में देखी गई 4.2 प्रतिशत की ग्रोथ खत्म हो गई. वर्ल्ड बैंक का यह भी अनुमान है कि सप्लाई में रुकावट, शिपिंग की ज़्यादा लागत और तेल की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई में तेजी आएगी, जिससे लोगों की खरीदने की क्षमता और कम हो जाएगी.

फिलिस्तीनियों की बिजली की आपूर्ति रोकी
इससे पहले इजरायल ने स्पष्ट किया था कि जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं डाल देता है, तब तक उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी. वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी परिवारों के घरों की कथित घेराबंदी को लेकर भी तनाव बढ़ गया था. वेस्ट बैंक के एक शहर के बाहरी इलाके में इजरायली बसने वालों ने कथित तौर पर पांच रातों तक तीन फिलिस्तीनी घरों को घेरे रखा. इस दौरान परिवारों को सुरक्षित बाहर निकलने नहीं दिया गया और उनके खाने-पीने का सामान भी खत्म होने लगा. एक परिवार के मुताबिक, घर का पानी और बिजली की आपूर्ति को रोक दिया गया है. इस घटना को लेकर अमेरिका ने भी चिंता जताई है.
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इजरायली व्यक्ति को हिरासत में लिया
14 अगस्त को दर्जनों इजरायली सेटलर कुसरा गांव में घरों के पास पहुंचे और कथित तौर पर उनके दरवाजे बंद कर दिए. घर के मालिक लुई रिडी ने बताया कि इजरायली सेना ने कई बार हस्तक्षेप किया है, लेकिन सेटलर बार-बार वापस आ जाते हैं. मानवाधिकार संगठनों ने लंबे समय से इजरायली सेना पर सेटलर हिंसा की अनदेखी करने या उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने के लिए हस्तक्षेप करने के आरोप लगाए हैं. रिडी ने था कहा कि यह एक चक्र है. उन्हें पूरे इलाके से दूर रखना जरूरी है, न कि सिर्फ हटाकर 100 फीट दूर करना. इजरायली सेना ने इस घेराबंदी की निंदा करते हुए इसे गैरकानूनी, निंदनीय और अस्वीकार्य बताया. सेना ने कुसरा को ‘बंद सैन्य क्षेत्र’ भी घोषित कर दिया. गांव के निवासियों द्वारा बनाए गए वीडियो के मुताबिक, अगले दिन दर्जनों सेटलर फिर इलाके में लौट आए. उन्होंने पत्थरों से सड़क को अवरुद्ध करने की कोशिश की और इजरायली सैनिकों के साथ उनका टकराव भी हुआ. गुरुवार को इजरायली सेना ने कहा कि उसके सैनिकों ने कुसरा और पास के एक गांव में बनाई गई दो गैरकानूनी चौकियों को हटा दिया और एक इजरायली व्यक्ति को हिरासत में लिया. सेना के मुताबिक, इलाके में सुरक्षा और गश्त के लिए अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया गया था. कुसरा के मेयर अब्देल अजीम वादी ने दावा किया कि इजरायली सेना ने गांव में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए एक दर्जन से अधिक घरों को खाली करवाया. उन्होंने कहा कि सेटलरों को उनकी चौकियों से तो हटा दिया गया, लेकिन वे अभी भी गांव के अन्य हिस्सों में मौजूद हैं.

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20 लाख से ज्यादा रहते हैं फिलिस्तीनी
गौरतलब है कि इजरायली सेना गाजा पट्टी में 23 किमी लंबी मिट्टी की दीवार (बफर ज़ोन) बना रही है, जिसे फिलिस्तीनी नेतृत्व ने स्थायी बंटवारे की साजिश बताया है. अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार यह कदम गाजा पर दीर्घकालिक सैन्य नियंत्रण का संकेत है, जबकि मानवाधिकार संगठनों ने इसके कारण राहत आपूर्ति और नागरिकों की आवाजाही ठप होने की चेतावनी दी है. यह निर्माण उन फिलिस्तीनी बस्तियों के ऊपर से गुजर रहा है, जिन्हें इजरायली सेना ने हाल ही में ढहा दिया था. महज 11 किलोमीटर चौड़े इस तटीय क्षेत्र में 20 लाख से ज़्यादा फिलिस्तीनी नागरिक रहते हैं, जिनके लिए यह दीवार आने-जाने और विस्थापन के संकट को और अधिक गंभीर बना देगी. यह खुलासा सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ है. जब सैटेलाइट तस्वीरें दिखाई गईं, तो इजरायली सेना ने पुष्टि की कि उसने तथाकथित ‘येलो लाइन’ वाले इलाके में एक भौतिक दीवार बनाई है. यह वही सीमा रेखा है जहां तक हमास के साथ अक्टूबर में हुए युद्धविराम समझौते के तहत इजरायली सैनिक पीछे हटे थे. अमेरिका समर्थित समझौते में इस रेखा को इलाके के अस्थायी बंटवारे के तौर पर देखा गया था, ताकि बाद में इजरायली सेना पूरी तरह पीछे हट सके.

इजरायल कर रहा अपनी स्थिति मजबूत
ऐसा लगता है कि इजरायल अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है. इससे फ़िलिस्तीनियों को डर है कि यह रेखा एक स्थायी सीमा में बदल रही है. न तो अमेरिकी सेंट्रल कमांड (जिस पर युद्धविराम की निगरानी की ज़िम्मेदारी है) और न ही ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ (अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली संस्था, जिसे आगे चलकर गाज़ा की देखरेख करनी थी) ने इस दीवार पर कोई टिप्पणी की. दीवार के साथ-साथ सेना ने AP को बताया कि उसने इस रेखा के चारों ओर एक सुरक्षा क्षेत्र विकसित किया है, जिसमें खुफिया जानकारी और तकनीकी संसाधन मौजूद हैं. जब पूछा गया कि दीवार को कितना आगे बढ़ाया जाएगा, तो सेना ने इसके रास्ते के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया. सेना ने कहा कि इस दीवार का मकसद घुसपैठ रोकना और गाज़ा के पास मौजूद इज़राइली सैनिकों और इज़राइली बस्तियों की सुरक्षा करना है.
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